पितृपक्ष में किन-किन रूपों में धरती पर आते हैं पूर्वज?

Story Created By: Arti Mishra

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हिंदू धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व होता है. इसको श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है. इस समय में पिंडदान, श्राद्ध कर्म किया जाता है.

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इस साल पितृपक्ष 7 सितंबर 2025, रविवार से शुरू होंगे और समापन 21 सितंबर 2025, रविवार को होगा.

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यह समय पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष माना गया है. मान्यता है कि इस दौरान पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से वे प्रसन्‍न होते हैं.

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पितृपक्ष को लेकर कई मान्यताएं हैं. एक मान्यता यह भी है कि इस दौरान पितृ धरती पर अलग-अलग रूपों में आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं.

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जानें मान्‍यतानुसार पितृपक्ष के दौरान पितृ यानि पूर्वज किन-किन रूपों में धरती पर आते हैं.


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मान्यतानुसार, पितृपक्ष में पितृ कौए के रूप में आते हैं. इसलिए श्राद्ध के समय सबसे पहले कौओं को खाना खिलाया जाता है.


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धार्मिक मान्यताओं में कौओं को पूर्वजों का प्रतीक भी माना गया है.


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कौओं के अलावा पितृ पक्ष के दौरान पितृ गाय या बैल के रूप में आकर आशीर्वाद देते हैं.


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पितृपक्ष में बंदरों को भी खाना खिलाना शुभ माना गया है. अगर बंदर घर आ जाएं, तो माना जाता है कि पितृ प्रसन्न हैं.

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