पंडित प्रदीप मिश्रा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना शिव के विष पीने के भाव से की और संयम की बात कही. डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सभ्य समाज की स्थापना महिलाओं के योगदान के बिना असंभव है और उनका सम्मान जरूरी है. भागवत ने हिंदू समाज को पंथ नहीं बल्कि एक ऐसा स्वभाव बताया जो मतभेदों को पार करते हुए सद्भाव बनाए रखता है.