सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादीशुदा बेटी को केवल विवाह के आधार पर कल्याणकारी योजना से बाहर नहीं रखा जा सकता. अदालत ने विवाह के बाद बेटी और उसके मायके के संबंध को समाप्त मानना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य बताया. कुलसुम निशा के मामले में कोर्ट ने कहा कि पात्रता आर्थिक निर्भरता और अन्य योग्यताओं पर आधारित होनी चाहिए.