करगिल
25 साल बाद
टाइगर हिल
श्रीनगर
करगिल युद्ध के दौरान जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब था.भारतीय सेना के उत्तरी कमांड के लिए इसने मुख्य बेस के रूप में काम किया.सेना की उत्तरी कमांड ने ही पाकिस्तान की घुसपैठ के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समन्वय किया.
सोनमर्ग
यह श्रीनगर-लेह हाइवे पर स्थित एक सुंदर हिल स्टेशन है.करगिल युद्ध के दौरान सोनमर्ग भारतीय सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जगह थी. सोनमर्ग की द्रास सेक्टर से निकटता ने इसे सप्लाई और आवागमन के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु बना दिया.
द्रास
द्रास सेक्टर,रणनीतिक चोटियों टाइगर हिल (प्वाइंट 5140) और तोलोलिंग समेत, करगिल युद्ध का केंद्र था. इन ऊंचाइयों पर फिर से कब्जा करने के लिए पाकिस्तानी सेना से भीषण लड़ाई लड़ी गई.इस लड़ाई में 13 जून, 1999 को तोलोलिंग पर हुआ कब्जा इस लड़ाई का एक प्रमुख मोड़ था.
काकसर
काकसर करगिल जिले का एक गांव था.भारतीय सैनिकों ने जब पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे खदेड़ने की कोशिश की तो वहां बहुत जोरदार लड़ाई हुई थी.इस लड़ाई के शुरुआती चरण में काकसर पर कब्जा बहाल करना एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था.
करगिल
करगिल कस्बा,करगिल जिले का मुख्यालय है.करगिल एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब था.करगिल युद्ध का स्मारक यहीं बनाया गया.स्मारक को इस लड़ाई में अपना बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में बनाया गया था.
बटालिक
सिंधु नदी के पूर्व में स्थित बटालिक सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने रणनीतिक महत्व की चोटियों पर कब्जा जमा लिया था.इस क्षेत्र ने इस लड़ाई में पाकिस्तानी सेना की प्रत्यक्ष भागीदारी को साबित किया. इन चोटियों पर फिर से कब्जा हासिल करने और इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए भीषण लड़ाई हुई थी.
लेह
भारतीय सेना को रसद और प्रशासनिक मदद पहुंचाने के लिए लेह ने एक महत्वपूर्ण रियर बेस के रूप में काम किया.
टाइगर हिल
5,062 m
तोललिंग
5,140 m
युद्ध
की कहानी

आज से 25 साल पहले भारत को उत्तरी कश्मीर में एक अप्रत्याशित चुनौती का सामना करना पड़ा था. 18 हजार फुट की ऊंचाई पर हुई घुसपैठ से नेशनल हाइवे 1ए पर खतरा पैदा हो गया था. इस हाइवे को श्रीनगर और लेह की लाइफ़लाइन माना जाता है. इस पूरे इलाके में केवल यही एक ऑलवेदर सड़क है.

घुसपैठ करने वाले आम घुसपैठिये नहीं थे - वे हथियारों से लैस पाकिस्तानी सेना के सैनिक थे. उन्हें नेशनल हाइवे 1A को काटने का लक्ष्य दिया गया था. इस लक्ष्य पर वे नियंत्रण रेखा से लगती ऊंची खाली जगहों पर बैठकर निशाना साध रहे थे.

ये चोटियां भारतीय क्षेत्र में स्थित थीं.

सेना और वायुसेना के लिए आदेश स्पष्ट थे कि किसी भी कीमत पर घुसपैठियों को बेदखल कर भारतीय इलाके को खाली करना है. राष्ट्रीय राजमार्ग 1ए की रक्षा करनी है. यह सुनिश्चित करें कि करगिल की चोटियों पर पाकिस्तान फिर कभी कब्ज़ा न कर पाए.

प्रमुख मोर्चे
  • द्रास 10,990 feet
  • करगिल 8,780 feet
  • बटालिक12,500 feet
  • टाइगर हिल 8,780 feet
  • तोललिंग 8,780 feet
  • विजय
  • प्रमुख सैनिक
द्रास को अक्सर 'लद्दाख का प्रवेशद्वार' कहा जाता है. यह करगिल युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण युद्ध क्षेत्र था. यह कस्बा श्रीनगर-लेह राजमार्ग (NH1D) के किनारे पर स्थित है. सप्लाई लाइन के लिए यह कस्बा बहुत ज़रूरी था. यहां लड़ी गई तोलोलिंग की लड़ाई प्रमुख लड़ाइयों में से एक थी. इस इलाके में भारतीय सैनिकों को गंभीर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन गहन लड़ाई के बाद वे तोलोलिंग चोटी को सुरक्षित करने में कामयाब हुए. यह जीत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे भारतीय सेना को रणनीतिक लाभ मिला. इससे राजमार्ग को सुरक्षित बनाने में सफलता मिली. कठिन इलाके और खराब मौसम ने द्रास की लड़ाई को बहुत चुनौतीपूर्ण बना दिया था.
ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव:
द्रास के पास स्थित टाइगर हिल पर हमले के दौरान असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया. बुरी तरह जख्मी होने के बाद भी वो लड़ते रहे और दुश्मन के बंकरों को तबाह कर दिया.इसने चोटी पर कब्जा जमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.उनकी इस वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.
Grenadier Yogendra Singh Yadav
  • विजय
  • प्रमुख सैनिक
सिंधु नदी के तट पर स्थित करगिल कस्बा इस लड़ाई के केंद्र में था. पाकिस्तानी सेना ने इस कस्बे के चारों ओर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऊंचाइयों पर कब्जा जमा लिया था. इससे श्रीनगर-लेह राजमार्ग को खतरा पैदा हो गया था. भारतीय सेना ने इन मोर्चों को खाली कराने के लिए 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया. इस दौरान मिली महत्वपूर्ण जीतों में से एक थी गन हिल (प्वाइंट 5140) पर दोबारा कब्जा जमाना. इस जीत ने इस इलाके पर नियंत्रण हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस अभियान में कई मोर्चों पर समन्वित हमले किए गए थे.
कैप्टन विक्रम बत्रा:
गन हिल पर कब्जा जमाने में दिखाई गई उनकी वीरता और उनके प्रसिद्ध नारे 'ये दिल मांगे मोर!' के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को जाना जाता है. उनकी बहादुरी और नेतृत्व ने करगिल क्षेत्र में कई सफल अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसमें तोलोलिंग (प्वाइंट 4875) पर कब्जा भी शामिल था. इस साइट का नाम बाद में उनके सम्मान में बदलकर 'बत्रा टॉप' कर दिया गया. सरकार ने उन्हें मरणोपरांत 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया.
Captain Vikram Batra
लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय:
उल्लेखनीय साहस दिखाते हुए अपनी प्लाटून का नेतृ्त्व किया. इस दौरान उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया.उनके इस साहस ने करगिल के आसपास दुश्मन के मोर्चे पर कब्जा जमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.इसे देखते हुए उन्हें मरणोपरांत 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
Lieutenant Manoj Kumar Pande
  • विजय
  • प्रमुख सैनिक
बटालिक सेक्टर ऊबड़-खाबड़ इलाके और रणनीतिक महत्व के कारण सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक था. भारतीय सेना को ऊंचाई वाली जगहों से दुश्मन सेना को हटाने के लिए बहुत ही नजदीकी लड़ाई में शामिल होना पड़ा. इस क्षेत्र में प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा इलाके को नियंत्रित करने और लेह-श्रीनगर राजमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण था.
कैप्टन गुरजिंदर सिंह सूरी:
बटालिक में ऑपरेशन के दौरान असाधारण बहादुरी और नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन किया. कठिन हमलों के दौरान अपने सैनिकों का नेतृत्व किया.उनके इस एक्शन ने इस इलाके में भारतीय अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
Grenadier Yogendra Singh Yadav
मेजर सोनम वांगचुक:
असाधारण नेतृत्व कौशल और बहादुरी का प्रदर्शन करते हुए,रणनीतिक स्थिति को बहाल करने के लिए एक साहसी हमले में अपने सैनिकों का नेतृत्व किया.बटालिक में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
Major Sonam Wangchuk
  • विजय
  • प्रमुख सैनिक
टाइगर हिल उन सबसे ऊंची और रणनीतिक महत्व की चोटियों में से एक थी, जिन पर पाकिस्तानी सेना ने कब्जा कर लिया था. इस पर फिर कब्जा जमाना काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर नज़र रखने के लिए सुविधाजनक जगह थी. टाइगर हिल पर हमले की योजना सावधानीपूर्वक बनाई गई थी, जिसमें विषम परिस्थितियों में कई दिशाओं से किया जाने वाला हमला शामिल था. यह ऑपरेशन करगिल युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ था. यह भारतीय सैनिकों के दृढ़ संकल्प और उनकी बहादुरी का प्रतीक था. टाइगर हिल पर सफलतापूर्वक कब्जे ने भारतीय सेना के मनोबल को काफी बढ़ा दिया, जिससे निर्णायक जीत हासिल हुई.
कैप्टन विक्रम बत्रा:
टाइगर हिल पर सफल हमले में अहम भूमिका निभाई थी.इस महत्वपूर्ण जगह पर फिर कब्जा करने में उनके निडर नेतृत्व और बहादुरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत 'परमवीर चक्र'से सम्मानित किया गया.
Captain Vikram Batra
राइफलमैन संजय कुमार
टाइगर हिल पर हुई लड़ाई के दौरान उल्लेखनीय साहस का प्रदर्शन किया. दुश्मन के बंकरों को नष्ट कर दिया और घायल होने के बाद भी लड़ाई जारी रखी. उनके इस साहस ने ऑपरेशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्हें 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
Rifleman Sanjay Kumar
  • विजय
  • प्रमुख सैनिक
तोललिंग की लड़ाई करगिल युद्ध की एक महत्वपूर्ण लड़ाई थी.तोललिंग रिज पर पाकिस्तानी सेना ने भारी किलेबंदी की थी. राजमार्ग को सुरक्षित बनाने और लेह तक आपूर्ति लाइनों को बनाए रखने के लिए तोलोलिंग पर दोबारा कब्जा जमाना जरूरी था.इस लड़ाई के दौरान भारतीय सेनाओं को दुश्मन की भीषण गोलाबारी और कठिन इलाके का सामना करना पड़ा.कई हफ्तों की भीषण लड़ाई के बाद आखिरकार वे रिज पर कब्जा जमा पाने में सफल रहे.इस जीत से इस इलाके में भारतीय अभियानों को महत्वपूर्ण बढ़त मिली.इस जीत ने आगे की सफलताओं का मार्ग प्रशस्त किया. .
मेजर राजेश सिंह अधिकारी:
तोलोलिंग पर कब्जा करने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.उनके नेतृत्व कौशल और बहादुरी ने दुश्मन पर काबू पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
Major Rajesh Singh Adhikari
कैप्टन अनुज नैयर

युद्ध के दौरान असाधारण साहस और नेतृत्व का प्रदर्शन किया.अपने सैनिकों का आगे बढ़कर नेतृत्व किया और सर्वोच्च बलिदान दिया.रिज को सुरक्षित बनाने में उनका काम बहुत महत्वपूर्ण था.उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र'से सम्मानित किया गया.

Captain Anuj Nayyar
अमर जवान - करगिल की लड़ाई के हीरो
  • परमवीर चक्र (पीवीसी)
  • महावीर चक्र (एमवीसी)
  • ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव
    18वीं ग्रेनेडियर
  • लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय
    1/11 गोरखा राइफल्स
  • कैप्टन विक्रम बत्रा
    13 जेएके राइफल्स
  • राइफलमैन संजय कुमार
    13 जेएके राइफल्स
टाइगर हिल पर तीन रणनीतिक बंकरों पर कब्जा करने का कठिन लक्ष्य दिया गया था..
तीन गोलियां लगने के बाद भी उन्होंने लड़ना जारी रखा और दूसरे बंकर को तबाह कर अपनी प्लाटून को आगे बढ़ने का आदेश दिया.
इस अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करने के लिए उन्हें 'परम वीर चक्र'से सम्मानित किया गया.
'परमवीर चक्र' हासिल करने के लक्ष्य के साथ ही सेना में शामिल हुए थे.
इन्हें बटालिक सेक्टर से दुश्मन सैनिकों को हटाने का लक्ष्य दिया गया था.
इन्होंने घुसपैठियों को पीछे खदेड़ने के लिए भीषण गोलाबारी के बीच सिलसिलेवार हमले किए.
हमले में शहीद होने से पहले जुबार टॉप और खालुबार हिल पर कब्जा जमा लिया.
मरणोपरांत 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किए गए.
13 जेएके राइफल्स में दिसंबर 1997 में कमिशन मिला.
करगिल युद्ध के दौरान इनका कोडनेम 'शेरशाह' था.
महत्वपूर्ण पूर्ण प्वाइंट 5140 पर कब्जा जमाया.
प्वाइंट 4875 पर कब्जा जमाने के लिए हुई लड़ाई में स्वेच्छा से भाग लिया.
प्वाइंट 4875 पर हुई लड़ाई में 7 जुलाई, 1999 को शहीद हो गए.
मिशन की सफलता के बाद 'ये दिल मांगे मोर' कहकर काफी मशहूर हुए.
मरणोपरांत 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
एरिया फ्लैट टॉप पर हुई लड़ाई में अदम्य साहस का परिचय दिया.
दुश्मन के बंकर पर हमला कर तीन पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया.
तीन गोलियां लगने के बाद भी लड़ते रहे.
दुश्मन के मोर्चे पर तब तक कब्जा जमाए रखा, जब तक सहायता के लिए और सैनिक नहीं पहुंच गए.
इस बहादुरी के लिए उन्हें 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
  • कैप्टन अनुज नैयर
    17वीं जाट बटालियन
  • मेजर राजेश सिंह अधिकारी
    18 ग्रेनिडियर
  • कैप्टन गुरजिंदर सिंह सूरी
    12 बिहार बटालियन
  • नायक दिगेंद्र कुमार
    2 राजपूताना राइफल्स
  • लेफ्टिनेंट बलवान सिंह
    18 ग्रेनेडियर
  • नायक इमलियाकुम एओ
    2 नागा
  • कैप्टन कीशिंग क्लिफोर्ड नोंग्रम
    12 जेएके लाइट इन्फेंट्री
  • कैप्टन नीकेझाकुओ केंगुरुसे
    2 राजपूताना राइफल्स
  • मेजर पद्मपाणि आचार्य
    2 राजपूताना राइफल्स
  • मेजर सोनम वांगचुक
    लद्दाख स्काउट
  • मेजर विवेक गुप्ता
    2 राजपूताना राइफल्स
टाइगर हिल पर दुश्मन के मोर्चे पर कब्जे के लिए चलाए गए अभियान का नेतृत्व किया.
लड़ाई के दौरान 7 जुलाई, 1999 को शहीद हुए.
18वीं ग्रेनियर बटालियन के कमांडर थे.
तोलोलिंग टॉप पर कब्जे की लड़ाई का नेतृत्व किया.
युद्ध के दौरान 30 मई, 1999 को शहीद हुए.
मुश्कोह घाटी में बिरजेन टॉप पर हमले का नेतृत्व किया.
लड़ाई के दौरान 9 दिसंबर, 1999 को शहीद हो गए.
उस समूह का हिस्सा थे, जिसे प्वाइंट 4875 (तोलोलिंग) पर कब्जा जमाने का काम सौंपा गया था.
एक हाथ में गोली लगने के बाद भी दूसरे हाथ में लाइट मशीनगन (LMG) लेकर लगातार फायरिंग जारी रखी.
इस साहस और संकल्प का प्रदर्शन करने के लिए उन्हें 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
यह उस घातक प्लाटून का हिस्सा थे,जिसे 3 जुलाई 1999 को उत्तर-पूर्व दिशा से टाइगर हिल पर हमले का लक्ष्य दिया गया था.
16,500 फुट की ऊंचाई पर चोटी तक पहुंचने के लिए खतरनाक और अनिश्चित मार्ग पर 12 घंटे तक टीम का नेतृत्व किया. इस दौरान तोपखाने उनकी टुकड़ी पर लगातार गोले बरसाते रहे.
इस दौरान बुरी तरह घायल होने के बाद भी एक नजदीकी लड़ाई में दुश्मन के चार सैनिकों को मार डाला.
उनके इस प्रेरणादायक नेतृत्व और बहादुरी ने टाइगर हिल पर कब्जा जमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उनके इस साहस और निस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
नगालैंड के रहने वाले थे.
2 नगा रेजिमेंट में काम किया.
मशकोह घाटी में अभियान के दौरान असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया.
करगिल युद्ध के दौरान उनके कार्यों के लिए 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
पहाड़ी इलाके के युद्ध कौशल के लिए जाने जाते हैं.
बटालिक सेक्टर में प्वाइंट 4812 पर हुई लड़ाई का नेतृत्व किया.
इस दौरान 1 जुलाई, 1999 को शहीद हो गए.
बेहद ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने नेतृत्व और साहस के लिए जाने जाते हैं.
मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किए गए.
द्रास सेक्टर में लड़ाई का नेतृत्व किया.
युद्ध में 28 जून, 1999 को शहीद हुए.
मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किए गए.
उनके सहकर्मी उन्हें उनके निक नेम 'निबू' के नाम से पुकारते थे.
पहाड़ों पर चढ़ने की महारत उनके लिए निर्णायक साबित हुई.
2 राजपूताना राइफल्स में कंपनी कमांडर थे.
तोलोलिंग की चोटी पर दुश्मन के एक मोर्चे पर कब्जा जमाने का लक्ष्य दिया गया था.
पाकिस्तानी गोलाबारी और गोलियों का सामना करते हुए मिशन को पूरा करने के बाद शहीद हो गए.
उनकी वीरता और काम के प्रति लगन के लिए उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
चोरबत ला सब सेक्टर में अभियान का नेतृत्व किया.
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चोरबत ला दर्रे को सुरक्षित करने में उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया था.
करगिल युद्ध में उनकी भूमिका को देखते हुए 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
वांगचुक को अधिक ऊंचाई वाले इलाके और अपने स्थानीय इलाके की असाधारण जानकारी के लिए जाना जाता है.
द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ खतरनाक हमले का नेतृत्व किया.
इस कार्रवाई में शहीद होने से पहले दुश्मन के दो बंकरों पर कब्जा जमा लिया था.
रेजिमेंट में नियुक्त होने के ठीक सात साल बाद लड़ते हुए शहीद हुए.
इस बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया.
टाइम लाइन करगिल युद्ध
1999
स्थानीय चरवाहों ने करगिल में भारतीय सेना को पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी दी.
चरवाहों की शुरुआती रिपोर्टों के जवाब में भारतीय सेना के गश्ती दल भेजे गए. पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच भारतीय

जवानों को पकड़कर उनकी हत्या कर दी. पाकिस्तानी सेना ने करगिल में भारतीय सेना के गोला-बारूद के ढेर को नष्ट कर दिया.
इस दौरान द्रास, काकसर और मुस्कोह सेक्टर में भी घुसपैठ की ख़बरें मिलीं. भारत ने करगिल जिले की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कश्मीर से और अधिक सैनिक भेजे.

भारतीय सेना ने कब्जाई गई चोटियों पर कब्जा बहाल करने के लिए 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया.
भारतीय वायुसेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' शुरू कर पाकिस्तानी कब्जों पर हवाई हमला शुरू कर दिया.
पाकिस्तानी बलों ने भारतीय वायुसेना के तीन लड़ाकू जहाजों (मिग-21, मिग-27 और एमआई-12) को मार गिराया.
पाकिस्तान ने कश्मीर और लद्दाख में नेशनल हाइवे-1 पर गोलाबारी शुरू की.
भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों के पास से बरामद कागज़ात सार्वजनिक किए. ये कागज़ात हमले में उनकी संलिप्तता को प्रमाणित करते थे.
बटालिक सेक्टर में भारतीय सैनिकों ने दो महत्वपूर्ण चोटियों पर फिर से कब्जा जमाया.
ज़ोरदार लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने रणनीतिक रूप से अहम द्रास सेक्टर की तोलोलिंग चोटी पर फिर कब्जा जमा लिया.
भारतीय सेना ने द्रास सेक्टर में महत्वपूर्ण टाइगर हिल पर फिर से कब्जा जमाया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने करगिल से पाकिस्तानी सैनिकों को वापस हटाने की घोषणा की.
जब भारतीय सेना ने महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा जमाया तो पाकिस्तानी सुरक्षा बल वहां से पीछे हट गए.
भारतीय सेना ने सभी पाकिस्तानी बलों के चले जाने की घोषणा करते हुए 'ऑपरेशन विजय' को सफल बताया.
करगिल @ 25 वीडियो
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