यूरोपीय संघ और भारत ने लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की घोषणा की है अमेरिका विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन इस समझौते को नकारात्मक रूप से देख रहा है और इससे असंतुष्ट है यूरोप अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिका से स्वतंत्र करने के लिए भारत को एक प्रभावी साझेदार मान रहा है