ईरान के विरोध सालों में सबसे गंभीर हैं, लेकिन इस्लामी गणराज्य के तुरंत पतन की भविष्यवाणी अभी जल्दबाजी होगी. संगठित विपक्ष की कमी और प्रवासी ईरानियों की आपसी खींचतान बदलाव की सबसे बड़ी बाधा है. खामेनेई के बाद सत्ता किसे मिलेगी, यही ईरान के भविष्य का सबसे बड़ा सवाल बन गया है.