शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयाग में 10 दिनों के धरने के बाद भारी मन से विदा लेने का निर्णय लिया प्रशासन ने शंकराचार्य को ससम्मान पालकी में स्नान के लिए ले जाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने खारिज किया शंकराचार्य ने कहा कि बटुकों और संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए प्रशासन को क्षमा याचना करनी चाहिए थी