माघ मेले में मौनी अमावस्या को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पालकी से संगम स्नान रोकने पर विवाद उत्पन्न हुआ था. प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए नियम बनाए थे और पालकी से आगे बढ़ने पर रोक लगाई थी जिससे भगदड़ का खतरा था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रोक को परंपराओं में हस्तक्षेप बताया और धरना शुरू कर दिया था.