भारत में पर्यावरणीय बदलाव और मानव गतिविधियों के दबाव से बाघों के स्वभाव में बदलाव देखने को मिला है जनवरी से जून 2025 में बाघों द्वारा कम से कम 43 लोगों की हत्या की गई, जो पिछले वर्ष के लगभग समान है बाघों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं, जिससे वे जंगलों के बाहर मानव बस्तियों में आकर संघर्ष कर रहे हैं