शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने वर्ण व्यवस्था का समर्थन किया. अविमुक्तेश्वरानंद ने मनुस्मृति को संविधान से बड़ा बताया. शंकराचार्य के अनुसार, संविधान समाज में भेदभाव करता है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरक्षण के खिलाफ अपनी राय व्यक्त की.