सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों तक सीमित है धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है और कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती अनुसूचित जनजाति के मामले में धर्म परिवर्तन को सदस्यता समाप्ति का अंतिम आधार नहीं माना जाएगा