अजित पवार ने शरद पवार की उंगली पकड़ कर महाराष्ट्र की राजनीति में कदम रखा और कद्दावर नेता बने. लेकिन वे केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो पाते उससे पहले ही उन्हें MP की सीट चाचा शरद पवार के लिए छोड़नी पड़ी. 2004 में राज्य की गठबंधन सरकार में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी शरद पवार ने अजित पवार को CM नहीं बनने दिया.