दावोस में अगर अंतरराष्ट्रीय मंदी पर नीति बनती है, तो उसका असर आम आदमी की नौकरी, महंगाई और ईएमआई पर पड़ता है. अगर जलवायु नीति पर सहमति बनती है, तो वह आपके बिजली बिल, पेट्रोल-डीजल (ईंधनों) की कीमत को प्रभावित करती है. अगर टेक्नोलॉजी और एआई पर सहमति बनती है, तो भविष्य की नौकरियों और शिक्षा व्यवस्था बदलती है.