भारत का बजट सफर 1860 से डिजिटल दौर तक पहुंचा - शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे, ब्रीफकेस से बही-खाता तक. मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बजट पेश किए, जबकि निर्मला सीतारमण ने सबसे लंबा भाषण और लगातार रिकॉर्ड बनाए. ब्लैक बजट, हलवा सेरेमनी और रेलवे बजट मर्ज जैसी परंपराओं ने बजट को सिर्फ आंकड़े नहीं, इतिहास बना दिया.