पूर्णिया की दो बहनें पुरुष-प्रधान मूर्तिकला क्षेत्र में अपनी कला से नारी-सशक्तिकरण का उदाहरण पेश कर रही हैं उनके पिता रामनारायण पंडित ने 1995 में झारखंड से पूर्णिया आकर मूर्तिकला की शुरुआत की और बेटियों को यह विरासत दी पूजा और आरती ने वर्ष 2013-14 से पूरी तरह मूर्तिकला को अपनाया और इस कला में अपनी पहचान बनाई है