सहरसा जिले के आरण गांव ने मृत्युभोज जैसी पुरानी कुरीति को खत्म करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है मृत्युभोज अब संवेदना का प्रतीक नहीं बल्कि पीड़ित परिवार पर आर्थिक और मानसिक बोझ बन चुका है समय के साथ मृत्युभोज का स्वरूप बदलकर सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया है जो गरीबों को प्रभावित करता है