गर्व है! बिहार के बच्चों को फ्री में पढ़ा रहे हैं कुवैत के डॉक्टर सुमंत मिश्रा

कहते हैं शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिससे अंधकार मिटता है. शिक्षा के कारण लोग जागरुक होते हैं, मज़बूत होते हैं और सशक्त होते हैं. शिक्षा के कारण लोगों का जीवन सफ़ल होता है. शिक्षा एक ऐसी कला है, जो इंसान के पास ख़ुद रहती है.

गर्व है! बिहार के बच्चों को फ्री में पढ़ा रहे हैं कुवैत के डॉक्टर सुमंत मिश्रा

कहते हैं शिक्षा (Education) एक ऐसा हथियार है, जिससे अंधकार मिटता है. शिक्षा के कारण लोग जागरुक (Education for Life) होते हैं, मज़बूत होते हैं और सशक्त होते हैं. शिक्षा के कारण लोगों का जीवन सफ़ल होता है. शिक्षा एक ऐसी कला है, जो इंसान के पास ख़ुद रहती है. इसका न तो बंटवारा किया जा सकता है, ना ही इसे कोई छीन सकता है. इस कारण समाज में विद्यालय और शिक्षक का बेहद महत्व रहता है. अभी दिवाली का त्योहार आने वाला है, इस त्योहार के ज़रिए हम अंधकार को प्रकाश से जीतते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही शख़्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो समाज को शिक्षित और संगठित कर रहे हैं.

इनका नाम डॉ सुमंत मिश्रा (Dr. Sumant Mishra) है. ये कुवैत सरकार के स्वास्थ्य विभाग में बच्चों के दंत चिकित्सक हैं. वर्तमान में डॉ. सुमंत मिश्रा कुवैत में ही रहते हैं. वैसे ये भारत के बिहार राज्य के रहने वाले हैं. प्यार से लोग इन्हें डॉक्टर भैया भी कहते हैं. डॉक्टर भैया (Doctor Bhaiya) भारत समेत कई देशों में सामाजिक कार्य करते रहते हैं. अभी हाल ही में बिहार के गया जिले के लोहानीपुर गांव को गोद लिया है. यहां ये बच्चों की शिक्षा के लिए डिजिटल शिक्षा केंद्र की स्थापना की है. इस  शिक्षा केंद्र का नाम लोहानीपुर शिक्षा केंद्र है. इस शिक्षा केंद्र में बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है.

बच्चों के लिए यहां शिक्षक तैनात किया गया है. शिक्षक का काम बच्चों को पढ़ाना है और सामाजिक रूप से मज़बूत करना है. डॉक्टर भैया बच्चों से सप्ताह में तीन दिन ऑनलाइन क्लास लेते हैं. ऑनलाइन क्लास के ज़रिए बच्चों को शिक्षा और स्वच्छता के महत्व के बारे में बताते हैं. 

एनडीटीवी से बात करते हुए डॉक्टर भैया बताते हैं कि मेरा मक़सद है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले. डिजिटल शिक्षा से पहले मैं बच्चों को बेसिक शिक्षा पर ध्यान दे रहा हूं. हम अभी बच्चों को अच्छे से बैठना, लिखना और नैतिक शिक्षा दे रहे हैं. सिलेबस बहुत बड़ा है, इसलिए शुरुआती शिक्षा बेहतरीन कर रहा हूं.

हर सप्ताह परीक्षा ली जाती है

लोहानीपुर डिजिटल शिक्षा केंद्र में हर सप्ताह बच्चों की परीक्षा ली जाती है. परीक्षा का मक़सद बच्चों की वास्तविक स्थिति के बारे में जानना है.

बच्चों को बिस्किट और चॉकलेट दिया जाता है


डिजिटल शिक्षा केंद्र में बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरुक करने के लिए बिस्किट चॉकलेट भी दिया जाता है. इसके अलावा पढ़ने वाले सभी बच्चों को कॉपी, कलम और पेंसिल भी दिया जाता है.

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डॉक्टर भैया ये ख़र्च अपनी सैलरी के माध्यम से करते हैं. वो चाहते हैं कि बच्चों का वास्तविक विकास हो. डॉक्टर भैया बताते हैं कि शिक्षा के ज़रिए बच्चों का विकास हो सकता है.