पाकिस्तान के कब्जे वाले PoK में मासूम नागरिकों और विरोध कर रहे लोगों को सरेआम गोली मारने की घटना के बाद भारत की प्रतिक्रिया आयी है. भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मंत्रालय का इस मुद्दे पर नजर है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम पाकिस्तान की ओर से फर्जी खबरों और वीडियो का एक सिलसिला लगातार देख रहे हैं. यह अपनी विफलताओं को छिपाने और अपने मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशा-पूर्ण प्रयास है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भीषण पुलिस बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं. हम उम्मीद करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा."
Delhi: MEA official spokesperson Randhir Jaiswal says, ''As also other related issues, we continue to see in this context a pattern of fake news and videos emanating from Pakistan. It is a desperate attempt by Pakistan to cover up its own failings and deflect attention away from… pic.twitter.com/Z8bIeNgDPf
— IANS (@ians_india) June 9, 2026
जनरल डायर बन गया है आसिम मुनीर
पीओके में बिगड़ते हालात के बीच जम्मू-कश्मीर को पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने NDTV से कहा, "पीओके में बहुत गंभीर हालात बने हुए हैं. ये आम लोगों का जनसंहार है. ये जलियांवाला बाग की तरह है. पाकिस्तान आर्मी का चीफ आसिम मुनीर इस हादसे में जनरल डायर की भूमिका में है. वह तथाकथित फील्ड मार्शल है. ये निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा रहा है कि जो आटा सस्ता कर दो या बिजली सस्ती कर दो. ये तो जायज मांग है, लेकिन मुनीर इनपर गोलियां चलवा रहा है."

Photo Credit: NDTV
क्यों हो रहे विरोध प्रदर्शन?
दरअसल बीते कुछ वक्त से पीओके की जनता शहबाज सरकार और पीओके में उसकी कठपुतली सरकार के खिलाफ विरोध कर रही थी. विरोध की ये आवाज पाकिस्तानी हुक्मरानों को रास नहीं आई. इस बीच विरोध की सुलगती आवाज को शांत करने के लिए शहबाज सरकार ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया.
पाकिस्तानी सरकार इस इलाके के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार करती आई है. इस इलाके का प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा कर लिया गया है और इसके बदले सिर्फ जुल्मों सितम ही मिले हैं.
Pok में विरोध तब तेज हुआ जब प्रशासन ने JAAC से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. बताया गया है कि प्रशासन ने JAAC को बैन कर दिया है और 9 जून को प्रस्तावित 'लॉन्ग मार्च' से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए थे. आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से ही पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं. ऐसा करने से कम्युनिकेशन सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुई.
यह भी पढ़ें: ब्रिटेन में पाकिस्तान कांसुलेट के सामने विरोध प्रदर्शन, Pok में हिंसा पर 30 ब्रिटिश सांसदों ने लिखा खत
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं