इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर का एक वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर में बवाल मच गया है. वीडियो में गाजा के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहे जहाजों से पकड़े गए एक्टिविस्ट्स को घुटनों के बल बैठाकर रखा गया है. उनके हाथ बंधे हुए दिख रहे हैं और सिर जमीन की ओर झुकाए गए हैं. इस वीडियो के सामने आते ही कई देशों ने इजरायल पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. हिरासत में लिए गए कुछ एक्टिविस्ट्स ने तो जेल में मारपीट, यौन उत्पीड़न और बलात्कार तक के आरोप लगाए हैं.
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने साफ कहा कि इस तरह का व्यवहार 'मानवीय गरिमा का अपमान' है. मेलोनी ने इजरायली सरकार से माफी मांगने और हिरासत में लिए गए इटालियन नागरिकों को तुरंत रिहा करने की मांग की. इटली ने इस मामले में इजरायली राजदूत को तलब करने का फैसला भी लिया है.
Le immagini del ministro israeliano Ben Gvir sono inaccettabili. È inammissibile che questi manifestanti, fra cui molti cittadini italiani, vengano sottoposti a questo trattamento lesivo della dignità della persona.
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) May 20, 2026
Il Governo italiano sta immediatamente compiendo, ai più alti…
दुनिया भर में इजरायल की आलोचना
इजरायल की कार्रवाई पर सिर्फ इटली ही नहीं, बल्कि कई देशों ने आलोचना की है. फ्रांस ने इजरायली मंत्री बेन गवीर को बैन तक कर दिया है.
वहीं कनाडा, नीदरलैंड, स्पेन, आयरलैंड, पुर्तगाल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कई देशों ने अपने यहां इजरायली राजदूतों को बुलाकर विरोध दर्ज कराया. फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने बेन गवीर के व्यवहार को 'अस्वीकार्य' बताया और फ्रांसीसी नागरिकों की तत्काल रिहाई की मांग की.
Las imágenes del ministro israelí Ben Gvir humillando a los miembros de la flotilla internacional en apoyo a Gaza son inaceptables.
— Pedro Sánchez (@sanchezcastejon) May 20, 2026
No vamos a tolerar que nadie maltrate a nuestros ciudadanos. En septiembre anuncié la prohibición de acceso al territorio nacional de este miembro…
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए. वहीं दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इजरायल की कार्रवाई को 'हद से परे' बताया. स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुएल अल्बारेस ने एक्टिविस्ट्स के साथ हुए व्यवहार को 'शैतानी' बताया है, जबकि आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएंटी ने वीडियो देखकर आलोचना की है.
I have directed my officials to summon the Israeli ambassador regarding the heinous treatment of civilians aboard the flotilla. Civilians must be protected at all times. The video shared by Ben-Gvir is deplorable and documents the mistreatment of civilians. Canada has already… https://t.co/AviEXpkdYG
— Anita Anand (@AnitaAnandMP) May 20, 2026
अपने ही देश में घिर गए बेन गवीर
इस वीडियो को लेकर इजरायल के भीतर ही बेन गवीर की तीखी आलोचना हो रही है. वीडियो में वह हिरासत में लिए गए एक्टिविस्ट्स के बीच इजरायल का झंडा लहराते और उनका मजाक उड़ाते दिख रहे हैं. इस पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि एक्टिविस्ट्स के साथ इस तरह का व्यवहार इजरायल के मूल्यों और परंपराओं के खिलाफ है.
इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने भी बेन गवीर की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मंत्री की हरकतों ने देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. यूरोपीय आयोग की अधिकारी हदजा लहबीब ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि मानवता की रक्षा करने वालों को सजा नहीं मिलनी चाहिए.
ככה אנחנו מקבלים את תומכי הטרור
— איתמר בן גביר (@itamarbengvir) May 20, 2026
Welcome to Israel 🇮🇱 pic.twitter.com/7Hf8cAg7fC
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, गाजा में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए कई देशों के सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार एक्टिविस्ट जहाजों के जरिए मदद लेकर जा रहे थे. मंगलवार को इजरायली सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 50 जहाजों को रोक लिया और उनमें सवार लगभग 430 लोगों को हिरासत में ले लिया. बाद में इन्हें दक्षिणी बंदरगाह अशदोद ले जाया गया.
रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप
रिहा किए गए कई एक्टिविस्ट्स ने इजरायली हिरासत में दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं. इटली के अर्थशास्त्री लूका पोगी ने रोम पहुंचने के बाद दावा किया कि हिरासत के दौरान लोगों को निर्वस्त्र किया गया, जमीन पर पटका गया और टेजर गन से झटके दिए गए. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के साथ यौन उत्पीड़न भी हुआ. कम से कम 15 एक्टिविस्ट्स ने बलात्कार और यौन हिंसा की शिकायत की है. कुछ घायल हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं.
हालांकि इजरायल की जेल सेवा ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. दूसरी ओर, इटली में अभियोजकों ने अपहरण, यातना और यौन उत्पीड़न जैसे संभावित अपराधों की जांच शुरू कर दी है. लौटे हुए एक्टिविस्ट्स के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.
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