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'डील बस होने वाली है', ट्रंप ने 38 बार किया दावा, लेकिन ईरान के साथ समझौता अब भी दूर की कौड़ी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च से लेकर अब तक ईरान युद्ध और समझौते के लेकर दर्जनों बार दावे किए हैं. लेकिन सच इससे कहीं अलग है.

'डील बस होने वाली है', ट्रंप ने 38 बार किया दावा, लेकिन ईरान के साथ समझौता अब भी दूर की कौड़ी
ट्रंप के बयान और ईरान के बयान कभी मेल नहीं खाते हैं. हर बार दोनों पक्ष अलग अलग दावे कर रहे हैं.
AFP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके बड़े-बड़े दावे, दोनों का बहुत पुराना रिश्ता है. ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप लगातार यह माहौल बना रहे हैं कि दोनों देशों के बीच समझौता बस होने ही वाला है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. एक हालिया विश्लेषण के मुताबिक, मार्च के आखिरी हफ्ते से लेकर अब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कम से कम 38 बार यह दावा कर चुके हैं कि ईरान के साथ डील बिल्कुल नजदीक है या फिर ईरान समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है. सोशल मीडिया पोस्ट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया इंटरव्यू के जरिए वे लगातार एक ही राग अलाप रहे हैं, जबकि हकीकत देखकर तो ऐसा लगता है कि दोनों देश किसी अंतिम समझौते से अभी कोसों दूर हैं.

मार्च से शुरू है दावों का सिलसिला

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दावेदारी की शुरुआत 23 मार्च को की थी, जब युद्ध को शुरू हुए एक महीना भी नहीं हुआ था. ट्रंप ने एयरफोर्स वन के बाहर पत्रकारों से कहा था कि दोनों पक्षों के बीच 'समझौते के मुख्य बिंदुओं' पर सहमति बन चुकी है. हालांकि, ईरान ने तुरंत इस बात को खारिज करते हुए किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया था.

इसके बावजूद ट्रंप नहीं रुके. अगले ही दिन 24 मार्च को उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम इसे खत्म करने जा रहे हैं, लेकिन मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता." इसके बाद 25 मार्च को उन्होंने दावा किया कि ईरान डील करने के लिए बेकरार है और 26 मार्च को कैबिनेट बैठक में कह दिया कि ईरान समझौते की भीख मांग रहा है.

अप्रैल में भी उम्मीदें अधूरी रह गईं

29 मार्च को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अगले हफ्ते तक डील हो जाएगी, तो उन्होंने कहा था, "हां, मैं ईरान के साथ डील होते देख रहा हूं." 

7 अप्रैल को ट्रंप ने एक युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की, जो दोनों पक्षों को समझौते का अंतिम रूप तय करने के लिए दो हफ्ते का समय देने के लिए था. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम बहुत आगे निकल आए हैं और इस पुरानी समस्या का समाधान होना एक सम्मान की बात है. लेकिन वह दो हफ्ता बीत गया और कोई नतीजा नहीं निकला. इसके बाद भी ट्रंप के बयानों में कमी नहीं आई.

  • 15 अप्रैल: फॉक्स बिजनेस से कहा, "यह युद्ध खत्म होने के करीब है. मुझे लगता है कि वे डील करने के लिए बेसब्र हैं."
  • 17 अप्रैल: एक ही दिन में तीन अलग-अलग बयानों में दावा कर दिया कि ईरान हर बात पर सहमत हो गया है और अगले एक-दो दिन में डील हो जाएगी.
  • 20 अप्रैल: ट्रुथ सोशल पर लिखा, "यह सब बहुत जल्दी खत्म होने वाला है."

मई में नया बहाना

जब अप्रैल में कुछ नहीं बदला, तो 30 मई आते-आते ट्रंप का नया दावा था कि ईरान समझौते के लिए 'मरा जा रहा' है. 18 मई को उन्होंने यह कहते हुए हवाई हमलों को दो-तीन दिनों के लिए टाल दिया कि मध्य-पूर्व के देश कह रहे हैं कि डील बेहद करीब है.

इस दौरान ट्रंप ने खुद माना कि पहले भी कई बार ऐसा लगा कि डील होने वाली है पर नहीं हुई, लेकिन इस बार बात 'थोड़ी अलग' है. हालांकि, यह भी सच साबित नहीं हुआ. इसके बाद 23 मई को उन्होंने फिर कहा कि डील का मुख्य हिस्सा तय हो चुका है और जल्द ही इसका एलान होगा. 28 मई को अपनी बहू लारा ट्रंप को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा कि हम एक बहुत अच्छी डील के करीब हैं.

'डील अंतिम चरण में है'

हाल ही में एक्सियोस (Axios) को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "हम ईरान के साथ अंतिम समझौते के बहुत करीब हैं. यह एक अच्छी डील होगी. मैं नहीं चाहता कि मौजूदा तनाव (इजरायल-ईरान विवाद) के कारण यह डील बिगड़े."

ट्रंप भले ही इस तरह के दावे करते रहे हों लेकिन जमीन की हकीकत डरावनी बनी हुई है. ईरान की ओर से होर्मुज कोई टिप्पणी नहीं आ रही है. इसके अलावा अब वार्ता भी ठंडे बस्ते में जा चुका है.

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