- IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भारत के नए शांति एक्ट और न्यूक्लियर ऊर्जा विस्तार योजनाओं को सकारात्मक कदम बताया.
- इसका मकसद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नियमों को आसान बनाना, निजी निवेश बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है.
- भारत 2047 तक न्यूक्लियर बिजली क्षमता को 8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट तक करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है.
भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा यात्रा को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल गया है. ग्लोबल न्यूक्लियर निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल एम ग्रॉसी ने भारत के नए ‘शांति एक्ट' और देश में न्यूक्लियर बिजली बढ़ाने की योजनाओं का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का एक बहुत अहम खिलाड़ी बताया है. वियना में NDTV से बातचीत करते हुए IAEA प्रमुख ने इस नए कानून पर पहली बार अपनी राय रखी. इस कानून का मकसद भारत में परमाणु बिजली से जुड़े नियमों को आसान और बेहतर बनाना है, ताकि इस सेक्टर में ज्यादा कंपनियां और निवेशक जुड़ सकें.
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपने भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा पर तेजी से काम कर रहा है. शांति एक्ट-2025 को एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इसका मकसद यह है कि नियम ऐसे हों जो आम लोगों की सुरक्षा भी देखें और साथ ही कंपनियों के लिए काम करना भी आसान हो जाए. अभी तक कुछ कानूनी अड़चनों की वजह से इस सेक्टर में अपेक्षित तेजी नहीं आ रही थी, लेकिन नए कानून से उम्मीद है कि प्राइवेट कंपनियां भी ज्यादा आगे आएंगी और न्यूक्लियर बिजली के विकास में तेजी आएगी.

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी
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भारत की ऊर्जा नीति बेहद सकारात्मक
NDTV के सवाल पर ग्रॉसी ने स्पष्ट लहजे में कहा कि वह इस कदम को बेहद सकारात्मक मानते हैं. उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही बिजली के बड़े उपयोगकर्ता और निर्माता देशों में से एक है और अब उसकी ऊर्जा नीति में परमाणु बिजली की भूमिका और भी बढ़ने वाली है.
उनकी बातों से साफ है कि दुनिया में भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा की भूमिका और मजबूत हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि इस नए कानून के बाद भारत और उनकी संस्था के बीच सहयोग और बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि वे भारत के साथ पहले भी काम करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे, इसलिए यह बदलाव दोनों के लिए अच्छी खबर है.
ग्रॉसी ने यह भी समझाया कि भारत सिर्फ ज्यादा बिजली बनाने के लिए नहीं बल्कि अपने पूरे ऊर्जा सिस्टम को मजबूत और संतुलित बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा बढ़ा रहा है.
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नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन
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2047 तक भारत का परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि भारत अपने बिजली स्रोतों को सिर्फ एक या दो साधनों पर निर्भर नहीं रखना चाहता, बल्कि अलग-अलग और भरोसेमंद स्रोत जोड़ रहा है. भारत में अभी करीब दो दर्जन परमाणु बिजली संयंत्र हैं, जो लगभग 8 गीगावाट बिजली बनाते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक इसे करीब 100 गीगावाट तक पहुंचाया जाए. यह योजना भारत की लंबे समय की बिजली सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है, ताकि भविष्य में बिजली की कमी न हो.
इस लक्ष्य को हासिल करने में ‘शांति एक्ट' बहुत अहम माना जा रहा है. इसका मकसद नियमों को आसान बनाकर और निजी कंपनियों को मौका देकर इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे बड़े स्तर पर नए बिजली संयंत्र बनाना आसान होगा, जो पहले कानूनी वजहों से धीमा चल रहा था.
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युद्ध और तनाव से परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा पर चिंता
दुनिया में कई जगहों पर युद्ध और तनाव के बीच परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है. जैसे कुछ देशों में हुए हाल के घटनाक्रमों ने दिखाया है कि ऐसे संयंत्रों की सुरक्षा कितनी जरूरी है. इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या ऐसे जोखिम निवेश को रोक सकते हैं.
ग्रॉसी ने इन चिंताओं को सही बताया, लेकिन यह भी कहा कि दुनिया इन्हें गंभीरता से ले रही है और जरूरी कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि उनकी संस्था सिर्फ बयान नहीं देती, बल्कि जमीन पर जाकर स्थिति संभालने की कोशिश करती है. उदाहरण देते वो बोले कि उनकी टीमें कई सालों से यूक्रेन जैसे संघर्ष वाले इलाकों में भी काम कर रही हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु संयंत्रों पर हमले बहुत चिंताजनक हैं और आम लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि इन घटनाओं के बावजूद दुनिया में परमाणु ऊर्जा बढ़ाने की योजनाएं रुकी नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि अभी भी कई देश परमाणु ऊर्जा को एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मानकर आगे बढ़ रहे हैं. अंत में उन्होंने कहा कि दुनिया में एक मजबूत ट्रेंड दिख रहा है, जहां देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा और तकनीक की जरूरतों के कारण परमाणु ऊर्जा की तरफ बढ़ रहे हैं.
भारत के लिए इसका मतलब यह है कि ‘शांति एक्ट' और परमाणु ऊर्जा विस्तार की योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है, और देश धीरे-धीरे दुनिया में एक बड़े ऊर्जा शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहा है.
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