इस खास कार्यक्रम में एनडीटीवी इंडिया की एंकर सुचारिता कुकरेती ने डीपीएस मथुरा रोड में जाकर सीधे छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों से बात की है. हाल ही में हुए NEET पेपर लीक विवाद और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) में सामने आई भारी गड़बड़ियों ने छात्रों के मन में गहरा डर और अनिश्चितता पैदा कर दी है.
छात्रों का साफ कहना है कि बिना किसी उचित टेस्टिंग के OSM को लागू करना एक बड़ी गलती थी, जिसके कारण कई बच्चों के मार्क्स कट गए और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. इसके अलावा, 9वीं कक्षा में अचानक लागू किए गए 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' ने भी बच्चों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि उन्हें अब अचानक से एक नई भारतीय भाषा पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है.
वीडियो के मुख्य अंश:
NEET परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक से छात्रों का सिस्टम से टूटता भरोसा.
CBSE 12वीं की ऑनलाइन चेकिंग (OSM) में हुई भयंकर गलतियां - छात्रों ने खुद शेयर किए अपने डरावने अनुभव.
9वीं क्लास में अचानक 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' थोपने से बच्चों और अभिभावकों की परेशानी.
पैनल में शामिल एक्सपर्ट्स की राय: डॉ. राम सिंह (प्रिंसिपल, DPS), अपराजिता गौतम (प्रेसिडेंट, DPA), डॉ. दीपक रहेजा (साइकियाट्रिस्ट) और एसके दत्ता (एजुकेशनिस्ट).
विशेषज्ञों और अभिभावकों का भी यही मानना है कि किसी भी नई तकनीक या नियम को बच्चों पर थोपने से पहले उसका पूरी तरह से परीक्षण (Testing) होना बहुत जरूरी है. बच्चों की शिक्षा कोई प्रयोग करने की चीज नहीं है.
क्या आपको भी लगता है कि शिक्षा बोर्ड को कोई भी नया नियम लागू करने से पहले उसे अच्छी तरह से टेस्ट करना चाहिए? क्या पुराने ऑफलाइन चेकिंग सिस्टम को ही वापस लाना चाहिए?
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