- उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण रद्द करने का नोटिस जारी किया है
- नोटिस में संपत्तियों की जानकारी अपलोड न करने या अधूरी जानकारी देने वालों को सुधार का मौका दिया गया है
- वक्फ संपत्तियों की जानकारी सुधारने की अंतिम तिथि 5 जून 2026 निर्धारित की गई है, उसके बाद कार्रवाई होगी
उत्तर प्रदेश में 31 हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियों को पंजीकरण (म्यूटेशन/नामांकन) रद्द करने का नोटिस जारी किया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सभी वक्फ संस्थाओं की जानकारी एकत्रित कर उसे निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश जारी किया था. अपलोड करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद, जिन संपत्तियों या अनुबंधों (एग्रीमेंट्स) की जानकारी अपलोड नहीं की गई या अधूरी पाई गई, ऐसे 31 हजार से अधिक मामलों में नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनका नामांकन रद्द क्यों न कर दिया जाए?
अभी दिया नोटिस, बाद में होगी कार्रवाई
प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि अभी केवल नोटिस जारी कर सुधार का मौका दिया गया है, ताकि लोग अपनी संपत्तियों की जानकारी ठीक कर सकें और पोर्टल पर डेटा दोबारा अपलोड किया जा सके. इस नोटिस का जवाब देने और जानकारी दुरुस्त करने की समयसीमा 5 जून 2026 तय की गई है. 5 जून तक जानकारी ठीक करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. इसके बाद केवल वैध (जेन्युइन) जानकारी वाली संपत्तियां ही वक्फ के पास रहेंगी, और अवैध रूप से कब्जाई गई संपत्तियों को जब्त किया जाएगा.
राजभर ने सपा पर साधा निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सपा शासनकाल में बिना किसी अधिकार के लोग वक्फ संपत्तियों को बेच रहे थे. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के पास अब सभी वक्फ इस्लामिया की पूरी जानकारी उपलब्ध है. उन्होंने सपा को चुनौती देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के वोट से चार बार सरकार बनाने वाली सपा अगर मुस्लिम समाज की इतनी ही हितैषी है, तो वह यह घोषणा क्यों नहीं करती कि जब भी उन्हें पूर्ण बहुमत मिलेगा, वे किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाएंगे?
वक्फ बोर्ड क्या होता है?
'वक्फ' का शाब्दिक अर्थ होता है 'अल्लाह के नाम पर समर्पित'. यानी ऐसी संपत्ति जो किसी व्यक्ति या निजी संस्था की नहीं होती, बल्कि मुस्लिम समाज के धार्मिक और परोपकारी कार्यों के लिए समर्पित होती है. इसमें मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह और मजारें आदि शामिल हैं. पिछले कुछ समय में देखा गया कि ऐसी जमीनों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा था और उन्हें अवैध रूप से बेचा या कब्जाया जा रहा था. इसी को देखते हुए वक्फ बोर्ड का गठन किया गया था, ताकि मुस्लिम समाज की इन जमीनों पर नियंत्रण बना रहे, उनके दुरुपयोग को रोका जा सके और जमीनों को गैर-कानूनी कब्जों से बचाया जा सके.
वक्फ संपत्तियां कितने प्रकार की होती हैं?
वक्फ अलल औलाद: यह वह जमीन या जायदाद होती है जिसे किसी व्यक्ति ने मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए दान कर दिया हो. दान के बाद यह संपत्ति समाज के काम आती है, लेकिन इसकी देखरेख या प्रबंधन का अधिकार दानदाता के परिवार के पास रहता है. परिवार के सदस्य इस जमीन को बेच नहीं सकते, लेकिन इससे होने वाली आय या फसल का लाभ उठा सकते हैं.
वक्फ अल खैर: इन संपत्तियों का कोई निजी मालिक या वारिस नहीं होता. वक्फ बोर्ड के अधीन आने वाली इन जमीनों की देखरेख के लिए बोर्ड किसी व्यक्ति को इसका प्रबंधक नियुक्त करता है. वक्फ बोर्ड की भाषा में इस प्रबंधक को 'मुतवल्ली' कहा जाता है. मुतवल्ली इस जमीन का उपयोग समाज के हित में करता है. वह अपने विवेक या मर्जी से यह जमीन किसी और को नहीं सौंप सकता.
यूपी में वक्फ की कितनी जमीन है?
सुन्नी वक्फ बोर्ड: इसके पास प्रदेश में करीब 1,23,000 संपत्तियां/जमीनें हैं.
शिया वक्फ बोर्ड: इसके पास कुल 3,102 संपत्तियां हैं. संख्या में कम होने के बावजूद, शिया बोर्ड के अधीन आने वाली संपत्तियों के भूखंड (प्लॉट) आकार में काफी बड़े हैं.
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