यूपी का एक व्यक्ति झूठे रेप केस में 20 साल जेल में काटने के बाद रिहा हुआ

रिहा होने के बाद विष्णु तिवारी ने कहा, मेरा शरीर टूट गया है और मेरा परिवार भी, शादी भी नहीं हुई, जेल से बाहर आने से पहले जेल प्रशासन से 600 रुपये मिले, मेरे पास बस यही है

यूपी का एक व्यक्ति झूठे रेप केस में 20 साल जेल में काटने के बाद रिहा हुआ

रिहा होने के बाद जेल के बाहर खड़े विष्णु तिवारी.

लखनऊ:

इस साल जनवरी में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा निर्दोष करार दिया गया एक व्यक्ति बलात्कार (Rape) के मामले में 20 साल जेल में बिताकर बाहर आया. उत्तर प्रदेश (UP) में मध्यप्रदेश की सीमा से सटे ललितपुर (Lalitpur) जिले का यह व्यक्ति आज शाम को आगरा सेंट्रल जेल से निकलकर अपने गांव गया. विष्णु तिवारी नाम के 43 साल के इस व्यक्ति को 16 सितंबर सन 2000 में गिरफ्तार किया गया था. उस पर रेप और एट्रोसिटीज के तहत एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया था. साल 2003 में उसे ललितपुर की अदालत ने रेप के मामले में 10 साल और एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास की सजा दी. कोर्ट के आदेश के मुताबिक दोनों सजाएं साथ-साथ चलनी थीं. तिवारी पर आरोप था कि उसने गांव की एक महिला का उस समय बलात्कार किया जब वह घर से खेत में काम करने के लिए जा रही थी. 

आगरा सेंट्रल जेल के विजुअल्स में तिवारी जेल के गेट से बाहर आते हुए दिखाई दे रहे हैं. उनकी रिहाई का आदेश उनके हाथ में है. उन्हें लेने के लिए कोई भी नहीं आया लेकिन उन्होंने मीडिया से कहा कि वे ओवरनाइट बस से ललितपुर के अपने गांव पहुंचना चाहते हैं. तिवारी ने एक इंटरव्यू में एनडीटीवी को बताया कि “मैं 20 साल से जेल में हूं, मुझे आगे क्या देखना चाहिए? मेरा शरीर टूट गया है और मेरा परिवार भी. मेरा केवल एक छोटा भाई है. मेरी शादी भी नहीं हुई है. मेरे हाथों को देखो, जेल की रसोई में काम करने से फफोले पड़ गए हैं. आज जेल से बाहर आने से पहले मुझे जेल प्रशासन से 600 रुपये मिले. मेरे पास बस यही है. 


जनवरी 2021 में तिवारी को बरी करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा - “चिकित्सीय साक्ष्यों में जबरन संभोग के कुछ लक्षण दिखाई देने चाहिए, भले ही हम अभियोजन पक्ष के उस वर्जन के अनुसार चले जाएं जिसके अनुसार अभियुक्त ने उसे जमीन पर पटक दिया. ऐसे में पूरी तरह शरीरिक रूप से विकसित महिला को कुछ चोटें लगी होंगी. हमाने पाया कि चिकित्सा साक्ष्य में डॉक्टर को कोई स्पर्म नहीं मिला था. डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि जबरन संभोग का कोई संकेत नहीं मिला. यह भी पाया गया कि महिला को कोई अंदरूनी चोट नहीं थी. तथ्यों और सभी तीन गवाहों से जिरह में भी कई विरोधाभास सामने आए हैं.''

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तिवारी को बरी करने का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में आए तथ्यों और सबूतों के मद्देनजर हम आश्वस्त हैं कि आरोपी को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है. इसलिए लगाए गए फैसले और आदेश को उलट दिया जाता है और आरोपी को बरी किया जाता है. ” अदालत ने इस बात पर भी कड़ा रुख अख्तियार किया कि इतनी लंबी अवधि की अपील के लिए आदमी जेल में कैसे था?