- मणिलाल पाटीदार ने 24 वर्ष की आयु में UPSC पास कर यूपी कैडर में आईपीएस बना.
- महोबा में एसपी रहते हुए वे क्रेशर व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी के हत्या-सुसाइड मामले में फंसा.
- यूपी विजिलेंस की जांच में पाटीदार ने वैध आय से लगभग पौने दस लाख रुपये अधिक खर्च किए पाए गए हैं
उत्तर प्रदेश कैडर के बर्खास्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी मणिलाल पाटीदार एक बार फिर चर्चा में हैं. यह वही शख्स हैं, जो कभी महज 24 साल की उम्र में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS बने थे. लेकिन रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा और अब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा भी दर्ज हो गया है. (इरफ़ान ख़ान पठान की रिपोर्ट)
कम उम्र में बड़ी सफलता और फिर पतन
मणिलाल पाटीदार का जन्म 25 नवंबर 1989 को राजस्थान के डूंगरपुर जिले में रामजी पाटीदार के घर हुआ था. साल 2013 में मणिलाल पाटीदार ने महज 24 साल की उम्र में 188वीं रैंक हासिल करते हुए यूपी पुलिस को बतौर IPS जॉइन किया था. लेकिन यूपी के महोबा में एसपी रहते हुए वे क्रेशर और विस्फोटक कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी सुसाइड कम-मर्डर केस में फंस गए.
विजिलेंस जांच में हुआ बड़ा खुलासा
दरअसल, बर्खास्त IPS मणिलाल पाटीदार की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं. यूपी विजिलेंस की जांच के बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक और मुकदमा दर्ज किया गया है. जांच में सामने आया है कि पाटीदार ने अपनी वैध आय से करीब पौने दस लाख रुपये अधिक खर्च किए थे. सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) कानपुर सेक्टर के इंस्पेक्टर मुरलीधर पांडेय की तहरीर पर पूर्व एसपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आय से अधिक संपत्ति का यह नया मुकदमा दर्ज किया गया है.
क्या था महोबा का इंद्रकांत त्रिपाठी मामला?
बता दें कि साल 2020 में महोबा के क्रेशर और विस्फोटक व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी ने 7 सितंबर 2020 को सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज वीडियो जारी किया था. इस वीडियो में उन्होंने तत्कालीन महोबा एसपी मणिलाल पाटीदार समेत अन्य पुलिस अधिकारियों पर खनन को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. इंद्रकांत ने दावा किया था कि उनसे तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार द्वारा छह लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है और ऐसा न करने पर उनकी जान को खतरा है.
VIDEO वायरल होने के बाद संदिग्ध मौत
वीडियो वायरल होने के अगले ही दिन, 8 सितंबर 2020 को इंद्रकांत त्रिपाठी संदिग्ध परिस्थितियों में गर्दन के पीछे गोली लगने से घायल पाए गए थे. इसके बाद कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 13 सितंबर 2020 को त्रिपाठी की मौत हो गई. इस घटना के बाद मृतक कारोबारी के भाई रविकांत त्रिपाठी ने तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार और दारोगा देवेंद्र शुक्ला सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले की विजिलेंस जांच शुरू कराई थी.
आय और खर्च के आंकड़ों में भारी अंतर
जांच के दौरान कानपुर सेक्टर की टीम ने मणिलाल पाटीदार के लोक सेवक रहते हुए उनकी आय और खर्चों का पूरा ब्योरा खंगाला. विजिलेंस इंस्पेक्टर मुरलीधर पांडेय के मुताबिक, जांच में यह तथ्य सामने आया कि मणिलाल पाटीदार ने वैध स्रोतों से कुल 43.19 लाख रुपये की आय अर्जित की थी, जबकि इस अवधि में उनका कुल खर्च 52.95 लाख रुपये पाया गया. आय के मुकाबले यह 9.75 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च उनकी अनुपातहीन संपत्ति माना गया है. इसी को आधार बनाकर अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत नई एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है.
फरारी और एक लाख रुपये का इनाम
जून 2023 में, उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने IPS अधिकारी मणिलाल पाटीदार को सेवा से बर्खास्त कर दिया था. इससे पहले, 15 अक्टूबर 2022 को पाटीदार ने लखनऊ की एक अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया था. फरारी के दौरान मणिलाल पाटीदार पर पहले 25 हजार, फिर 50 हजार और अंततः एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था.
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