- बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में चुनाव तैयारी को लेकर वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की.
- मायावती ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति को चिंता जनक बताया और जनता से बीएसपी पर भरोसा करने को कहा.
- बीएसपी ने हालिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कमजोर प्रदर्शन किया और वोट बैंक में गिरावट देखी गई.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की. इस दौरान उन्होंने रोजगार, कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और जनहित से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि प्रदेश की मौजूदा स्थिति ठीक नहीं है और जनता को एक बार फिर से आजमाई हुई BSP और उसकी “आयरन लेडी” पर भरोसा करना चाहिए.
मायावती ने कहा कि यदि आम लोगों के लिए आत्मसम्मान के साथ जीना मुश्किल हो जाए, तो यह चिंताजनक स्थिति है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल संकीर्ण और भ्रामक राजनीति कर रहे हैं, जिससे जनता को सावधान रहना चाहिए. साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय होकर जनाधार मजबूत करने और संगठन के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने की अपील की.
मुश्किल दौर से गुजर रही बीएसपी!
वर्तमान समय में बीएसपी अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है. हाल के लोकसभा चुनाव में पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल एक सीट पर जीत मिली थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का वोट बैंक कमजोर हुआ. माना जा रहा है कि ‘संविधान बचाओ' जैसे मुद्दों पर बने विपक्षी गठबंधन की वजह से दलित वोटों का बड़ा हिस्सा बीएसपी से हटकर दूसरी पार्टियों की ओर चला गया.
बीएसपी को कम करके आंकना बड़ी भूल!
इसके बावजूद यूपी की राजनीति में बीएसपी को कम करके आंकना बड़ी भूल मानी जाती है. दलित मतदाताओं में पार्टी का गहरा आधार अभी भी मौजूद है. पिछले साल कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ जुटाकर मायावती ने यह संदेश दिया था कि भले ही चुनावी आंकड़ों में पार्टी कमजोर दिखे, लेकिन जमीनी समर्थन अभी भी कायम है.
फिलहाल विधानसभा में सिर्फ एक विधायक होने के कारण बीएसपी, सुभासपा, निषाद पार्टी, आरएलडी, जनसत्ता दल और अपना दल जैसे क्षेत्रीय दलों से भी पीछे नजर आती है. पार्टी के कई पुराने और करीबी नेता भी अन्य दलों में जा चुके हैं, जबकि सतीश चंद्र मिश्रा अभी भी मायावती के प्रमुख सहयोगी बने हुए हैं. इन सबके बीच मायावती दलितों के साथ-साथ कुछ मुस्लिम और अन्य जातियों को जोड़कर एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही हैं. अब देखना यह होगा कि क्या उत्तर प्रदेश की जनता एक बार फिर “आयरन लेडी” पर भरोसा जताती है.
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