JEE के रिजल्ट में इस बार राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के निवासी छात्र इंद्रजीत ने बाजी मारी है. इंद्रजीत ने JEE में यह सफलता आर्थिक तंगी और तमाम मुश्किलों से लड़ते हुए हासिल की. इंद्रजीत के पिता ई-रिक्शा चलाकर परिवार पालते हैं. JEE के रिजल्ट में इंद्रजीत को कामयाबी मिलने के बाद से ही उसकी सफलता की कहानी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. इंद्रजीत ने पिछले साल भी JEE परीक्षा पास की थी, लेकिन कम रैंक आने के कारण फिर से तैयारी की और परीक्षा दी. लगातार प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर इंद्रजीत ने OBC वर्ग में 1028वीं रैंक हासिल की.
कोचिंग के लिए नहीं थे पैसे
बड़ी बात है कि इंद्रजीत के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि लाखों रुपये खर्च कर फिजिकल कोचिंग करवाई जा सके. ऐसे में उसने JEE की तैयारी के लिए इंटरनेट और मोबाइल का सहारा लिया. उसने नियमित रूप से ऑनलाइन क्लासेज अटेंड कीं. उसका कहना है कि ऑनलाइन शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उसकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

स्टोर रूम को बना दिया स्टडीरूम
इंद्रजीत की बहन प्रियंका ने बताया कि घर में पढ़ाई के लिए अलग से कोई कमरा नहीं था. ऐसे में परिवार ने स्टोर रूम को साफ कर उसके पढ़ने लायक बना दिया. कमरे में आज भी कबाड़ का सामान रखा हुआ है और कई बार वहां अन्य घरेलू सामान भी रखा रहता है. बावजूद इसके इंद्रजीत ने उसी माहौल में बैठकर अपनी तैयारी जारी रखी.
परिवार के अनुसार जिस कमरे में इंद्रजीत पढ़ाई करता था, वह गर्मियों में बेहद गर्म और सर्दियों में काफी ठंडा हो जाता था. कई बार बिजली कटौती के कारण अतिरिक्त परेशानियों का भी सामना करना पड़ता था. इसके बावजूद उसने कभी शिकायत नहीं की और लगातार अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा. यही दृढ़ संकल्प उसकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना.

पिता ई रिक्शा चलाकर परिवार पालते
पिता बोले- बेटे पर गर्व है
इंद्रजीत के पिता रामनिवास श्रीगंगानगर शहर में ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. पिता ने बताया कि आर्थिक चुनौतियां हमेशा बनी रहीं, लेकिन बेटे की पढ़ाई को लेकर परिवार ने कभी हार नहीं मानी. आज बेटे की उपलब्धि से पूरा परिवार बेहद खुश है और उन्हें अपने बेटे पर गर्व महसूस हो रहा है. इंद्रजीत की दोनों बड़ी बहनें भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं. बहन भावना का कहना है कि भाई की सफलता ने पूरे परिवार को नई ऊर्जा दी है. अब उन्हें भी विश्वास हो गया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.
गांव के पूर्व सरपंच के पुत्र दीपक कुमार ने बताया कि पठानवाला जैसे छोटे गांव से इस स्तर की सफलता बहुत बड़ी उपलब्धि है. इंद्रजीत ने साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़े शहर या महंगे संसाधन ही जरूरी नहीं होते. उसकी उपलब्धि गांव के अन्य विद्यार्थियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास देगी. आज पूरे गांव को इंद्रजीत पर गर्व है.
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