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स्टेरॉयड वाला ओलंपिक! रिकॉर्ड तोड़ने के लिए खिलाड़ी खुलेआम ले पायेंगे ड्रग्स, इस टूर्नामेंट में डोपिंग करना ही नियम है

क्या स्टेरॉयड का इस्तेमाल अब खेलों का भविष्य है? रविवार को वेगस में जब एथलिट इकट्ठा होंगे तो दुनिया देखेगी कि प्रतिबंधित दवाईयों का इस्तेमाल करने के बाद एथलिट किस हद तक जा सकते है.

स्टेरॉयड वाला ओलंपिक! रिकॉर्ड तोड़ने के लिए खिलाड़ी खुलेआम ले पायेंगे ड्रग्स, इस टूर्नामेंट में डोपिंग करना ही नियम है

एक ओलंपिक की कल्पना कीजिए जिसमें खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाईयों का इस्तेमाल करने की खुली छूट हो. एथलिट डोपिंग एजेंसी के डर के साएं में ना हों, और स्टेरॉयड का इस्तेमाल करके और तैयारी से लेकर वेटलिफ्टिंग तक में हिस्सा लें. नतीजा- हमें हर दिन कोई ना कोई रिकॉर्ड टूटते हुए देखने को मिल सकता है. जहां एथलिट किस हद तक जा सकते हैं, इसका पता चलेगा. लग सकता है कि यह क्रातिंकारी बदलाव शायद ही कभी हो, लेकिन वेगास में इन दिनों  "लाइव एनहैंस्ड" के ऐड चारों तरफ देखने को मिल रहे हैं. दावा है कि इसमें कई दिग्गज एथलिट हिस्सा लेंगे. यह  स्पोर्ट्स इतिहास के सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल इवेंट्स में से एक से होने जा रहा है. 

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, वेगास में एनहैंस्ड गेम्स हो रहे हैं. यह ठीक ऐसा है, जैसे ओलंपिक में स्टेरॉयड के इस्तेमाल की अनुमति. रविवार को होने वाले पहले कॉम्पिटिशन में दर्जनों टॉप एथलीट ट्रैक, वेटलिफ्टिंग और स्विमिंग में वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश करने के लिए परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली ड्रग्स का इस्तेमाल करेंगे.

25 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्राइस मनी

इस इवेंट के लिए भारी भरकम प्राइस मनी भी रखी गई है. लगभग 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर की. विजेताओं को कैश प्राइज़ दिए जाएंगे. कुछ इवेंट्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने पर एक मिलियन तक की प्राइज मनी है. ऐसे ही एक इवेंट में अमेरिकी दिग्गज धावक  फ्रेड केर्ली नजर आ सकते है. 

एथलिट उन्हीं ड्रग्स का इस्तेमाल कर पाएंगे, जिन्हें  फेडरल ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अप्रूव किया हो. टेस्टोस्टेरोन और ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन बढ़ाने वाली दवाईंयों पर विश्व डोपिंग एजेंसी ने रोक लगा रखी है, लेकिन इस टूर्नामेंट में उसे खुले तौर पर बेचा जा रहा है, बल्कि उसके इस्तेमाल को बढ़ावा भी दिया जा रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप जूनियर दे रहे फंड

उद्यमी एरॉन डिसूज़ा और मैक्सिमिलियन मार्टिन ने 2023 में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था. पीटर थिएल और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर जैसे बड़े अरबपतियों का इसे सपोर्ट है. हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि स्टेरॉयड और ग्रोथ हार्मोन से स्ट्रोक और कार्डियोवैस्कुलर डैमेज के साथ-साथ दूसरे रिस्क भी हो सकते हैं. आयोजनकर्ताओं का दावा है कि परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवाएं खेलों में प्रतिस्पर्धा की भावना को खत्म करे देगा.

डोपिंग नियमों में खामियां, लेकिन ड्रग्स समाधान नहीं

US एंटी डोपिंग एजेंसी के CEO ट्रैविस टाइगार्ट कहते हैं,"सबसे अच्छा बनने के लिए आपको दबाव में आने या ड्रग्स लेने की ज़रूरत नहीं है." उन्होंने बताया कि ओलंपिक के एंटी-डोपिंग प्रोटोकॉल में साफ़ तौर पर कमियां हैं, लेकिन इसका जवाब सिस्टम में सुधार करना है, डोपिंग नहीं. वे कहते हैं कि एथलीट्स को यह भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि ओलंपिक साफ़-सुथरे हैं और चीटिंग करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. "हम नहीं चाहते कि बच्चों को यह कहना पड़े, 'ओलंपिक मेडल जीतने के लिए, जब मैं 18 या 20 साल का होऊंगा, तो मुझे हर दिन अपने पिछले एक खतरनाक ड्रग का इंजेक्शन लगाना होगा.'"

लेकिन एनहैंस्ड का दावा है कि यह खेल इस बात को सबके सामने ला रही है कि कई एथलीट चुपके से चीटिंग करते हैं और परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली ड्रग्स लेते है. इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे कई एथलीट्स मीडिया के सामने आए. उन्होंने करीब दो घंटों तक मीडिया के सवालों के जवाब दिए. लेकिन सिर्फ़ एक - स्ट्रॉन्गमैन हैफ़थोर ब्योर्नसन, जो अपना ही 510kg (1,124.4 पाउंड) का डेडलिफ्ट रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद कर रहे हैं - ने बताया कि वह कौन सी ड्रग्स ले रहे थे. दूसरे एथलीट्स ने कुछ नहीं बताया.

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