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विचार
  • बिना बहस के कृषि क़ानून की वापसी, किसानों से अब भी इतनी दूरी क्यों
    रवीश कुमार
    कानून वापस हुआ है, कानून के बनने की सोच वापस नहीं हुई है. सरकार ने कृषि कानूनों की वापसी के लिए जो बिल पेश किया, उसकी प्रस्तावना में कानूनों की तारीफ ही की. प्रस्तावना के पैराग्राफ तीन और चार में 26 पंक्तियों में तीनों कानूनों के फायदे बताए गए हैं और पैराग्राफ 5 और 6 में वापसी पर 14 पंक्तियां हैं.
  • किसान आंदोलन का एक साल, कहीं चुनाव राजनीति या वर्चस्व की लड़ाई में न बिखर जाए
    रवीश कुमार
    आज किसान आंदोलन का एक साल पूरा हुआ है. कानून वापसी के लिए शुरू हुआ यह आंदोलन किसानों को किसान बना गया. इस एक साल के दौरान किसानों ने उस पहचान को जी भरकर जिया है, जिसे किसान कहते हैं.
  • 26/11 आतंकी हमला: 13 साल बाद भी है इंतजार, उस रात की सुबह कब होगी?
    वंदना
    उस रात मैं भी कहीं न कहीं खुद को मुंबई की अंधेरी सड़कों पर दौड़ता हुआ महसूस कर रही थी, जहां हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था.  नरीमन हाउस के उन परिवारों के बीच भी मैं थी जहां हर कोई अपने आप के बजाय अपने परिवार और दूसरे लोगों की जिंदगी बचाने के बारे में सोच रहा होगा.
  • किस फैक्ट्री में तैयार होते हैं लाखों रोजगार के सैकड़ों सुनहरे आंकड़े?
    रवीश कुमार
    इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट विकास का पुराना चेहरा है लेकिन इसे भव्य बनाकर नया किया जा रहा है. भव्यता को सजाने में रोज़गार के दावों का बड़ा रोल रहता है. प्रोजेक्ट की मंज़ूरी से लेकर शिलान्यास तक रोज़गार को लेकर जिस तरह की ख़बरें छपती हैं और दावे किए जाते हैं उसकी विकास यात्रा पर ग़ौर करना दिलचस्प होगा.
  • पेगासस के ख़िलाफ़ एप्पल का मुक़दमा, क्या सरकार पूछेगी एप्पल से?
    रवीश कुमार
    आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल ने पेगासस सॉफ्टवेयर बनाने वाली इज़राइल की कंपनी NSO पर मुकदमा दायर किया है. एप्पल ने NSO के इस सॉफ्टवेयर को ख़रीदने वाली सरकारों पर मुकदमा नहीं किया है, कंपनी पर किया है. NSO पर मुकदमा करने वाली एप्पल पहली कंपनी नहीं है.
  • ज़ेवर एयरपोर्ट - सरकार के सपनों का शिलान्यास, किसानों की हिल गयी आधारशिला
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला रखने वाले हैं. इस प्रोजेक्ट को लेकर एक तरफ बड़े बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इसके लिए जिनके घर उजड़े हैं वो फिलहाल ऐसे हर सपने से खुद को दूर पा रहे हैं.
  • किसानों को कमेटी नहीं कमिटमेंट चाहिए
    रवीश कुमार
    भारत में कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद श्रीलंका के किसानों को भी एक बड़ी जीत मिली है. पिछले साल जुलाई में वहां की सरकार ने अचानक फैसला लिया कि रसायनिक खेती नहीं होगी. श्रीलंका सौ फीसदी आर्गेनिक खेती वाला देश बनेगा. इसी के साथ रसायनिक खाद से लेकर दवा के आयात और बिक्री पर रोक लगा दी गई. नीयत के हिसाब से देखिए तो इस फैसले में अच्छाई ही अच्छाई है लेकिन कई साल से रासायनिक खेती को बढ़ावा देने वाली सरकार रातों रात अगर अच्छी नीयत अपना ले तो संदेह गहरा हो जाता है.
  • मोदी सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस क्यों लिया, जानें 6 बड़े कारण
    अखिलेश शर्मा
    अमित शाह कह चुके हैं कि 2024 में अगर मोदी को फिर पीएम बनाना है तो यूपी में 2022 में योगी को जिताना जरूरी है, लेकिन किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को नुकसान की आशंका थी. लखीमपुर खीरी की घटना ने भी बीजेपी का नुकसान किया.
  • पीएम मोदी की किसानों से माफी- इसे कैसे समझा जाए
    अब जब कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान हो गया है, तो बीजेपी कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ गठबंधन कर सकती है, जिन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के महीने भर बाद पार्टी छोड़ दी थी.
  • कृषि कानूनों की वापसी: प्रधानमंत्री जी, तपस्या आपने नहीं, किसानों ने की है...
    रवीश कुमार
    आज उन 700 किसानों को याद करने का दिन है, जिनके लिए आज भी इस देश के प्रधानमंत्री ने एक शब्द नहीं कहा. क्या आप यकीन कर सकते हैं कि एक आंदोलन के लिए इस देश के सात सौ किसान शहीद हो गए और उस देश के प्रधानमंत्री ने इस एक साल के दौरान एक शब्द नहीं कहा. 
  • आप किस भारत में रहते हैं?
    प्रियदर्शन
    भारत अगर यूरोप जैसा समृद्ध होना चाहता है तो किसे लूटे? उसने अपने ही एक हिस्से को उपनिवेश बना रखा है. 40 करोड़ का भारत 80 करोड़ के भारत को लूट रहा है. इस 40 करोड़ के भारत में अमीर लगातार अमीर हुए जा रहे हैं और गरीब लगातार और गरीब.
  • पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह कमजोर नहीं थे 
    आदेश रावल
    मोदी समर्थक उनकी तारीफ़ इस बात को लेकर करते थे कि प्रधानमंत्री मोदी कभी भी कठोर फ़ैसले करने से पीछे नहीं हटेंगे. आज जब प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से माफ़ी माँगी और तीन क़ानून रद करने का फ़ैसला किया तो हो सकता है उनके समर्थकों में थोड़ी निराशा हुई हो. 
  • PM मोदी ने क्यों लिया कृषि कानून वापसी का फैसला? क्या BJP ने जला लिए खुद के हाथ? 
    अगले साल फरवरी-मार्च में वैसे तो पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं लेकिन इनमें सबसे अहम उत्तर प्रदेश है. 2017 में हुए चुनाव में 403 सीटों में से 312 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. उसे कुल 39.67 फीसदी वोट मिले थे. उस वक्त बीजेपी के साथ अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी थी.
  • यह लोकतंत्र की बड़ी जीत है, लेकिन और बड़ी लड़ाइयां और चुनौतियां बाक़ी हैं.
    प्रियदर्शन
    शायद अब सरकार को यह समझना होगा कि मनमाने फ़ैसले नहीं चलेंगे. तीनों कृषि क़ानून बिना किसी चर्चा के लाए गए थे और उन्हें वापस भी बिना किसी चर्चा के किया गया. यानी मेज़ पर बातचीत अटकी रही, मंत्री और प्रधानमंत्री बताते रहे कि किसान जहां चाहें आकर बातचीत कर लें, और एक दिन उन्होंने चुपचाप कानूनों की वापसी का एलान कर दिया.  
  • देश के किसानों ने तमाम सिसकती हारों के बदले जीत हासिल की है
    रवीश कुमार
    किसानों के इस आंदोलन की जीत हर तरह के विभाजन के खिलाफ़ जीत है. हिन्दू मुस्लिम राजनीति के दम पर उनके आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की, किसानों ने जय श्री राम और अल्लाहू अकबर और वाहे गुरु का नारा लगाकर इस विभाजन को पंचर कर दिया. किसानों के किसी सवाल का सरकार ने जवाब नहीं दिया. जनवरी महीने से बात करना बंद कर दिया था.
  • चीन के उकसावे से कैसे निपट रही है सरकार?
    रवीश कुमार
    NDTV ने इस साल जनवरी में एक रिपोर्ट दिखाई थी कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के अंदर करीब सौ घरों एक गांव बसा लिया है. हमारे सहयोगी विष्णु सोम की नई रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अरुणाचल प्रदेश में ही एक अलग जगह पर एक और गांव बसा लिया है.
  • सरकारों ने आपके जीवन से खिलवाड़ कर लिया
    रवीश कुमार
    हमारा दो घंटे का समय बर्बाद हुआ. चीफ जस्टिस एन वी रमना की यह टिप्पणी ज़हरीली हवा को लेकर होने वाली सारी सुनवाइयों का सार है. आज और सोमवार की नहीं, बल्कि हवा में फैल रहे ज़हर को लेकर पिछले पांच छह साल में सुप्रीम कोर्ट की जितनी भी सुनवाई हुई है उसका यही सार है.
  • रोडवेज़ बनाम रन-वे : यूपी की बसों और डिपो को विकास का इंतज़ार
    रवीश कुमार
    रन-वे के दौर में रोड-वेज़ की बात. दास्सों कंपनी के जहाज़ों के सामने डिपो की वीरता का बखान बेहद ज़रूरी है. सर्वप्रथम डिपो की परिभाषा. डिपो उस एयरपोर्ट को कहते हैं जहां पर ज़मीन पर उड़नेवाली वाली बसें निकलती हैं और वापस आती हैं. यहां पर हर दिन लाखों यात्री बस से उतरते हैं, बस में चढ़ते हैं. बड़े बड़े एयरपोर्ट बिक गए लेकिन डिपो नहीं बिका है.
  • चीन ने कहा, आग से खेलेंगे तो जलेंगे
    कादम्बिनी शर्मा
    15 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वर्चुअल मोड में बातचीत हुई. इसके बाद दोनों देशों ने इस पर प्रेस रिलीज जारी किए हैं. वाइट हाउस का बयान छोटा और सधा हुआ है.
  • किसान नहीं कार और कारखाना वाले फैला रहे हैं हवा में ज़हर
    रवीश कुमार
    केवल नौकरशाही और मीडिया का विभाजन नहीं हुआ है बल्कि प्रदूषण का भी हुआ है. भूगोल और मौसम के हिसाब से प्रदूषण की चिन्ताओं को बांट दिया है और उसे सीबीआई और ईडी के अफसरों की तरह विस्तार देते रहते हैं. जिस तरह अब सीबीआई के प्रमुख तक पांच साल के लिए मेवा विस्तार मिलेगा सॉरी सेवा विस्तार मिलेगा उसी तरह से वायु प्रदूषण को हर नवंबर के बाद अगले नवंबर के लिए विस्तार मिल जाता है.
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