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विचार
  • उद्धव ठाकरे और BJP - फिर से 'साथ आने' को लेकर हो रही बात
    स्वाति चतुर्वेदी
    जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी, जिसकी वजह से शिवसेना का विभाजन हुआ. शिवसेना के विभाजन ने भाजपा को मौका दिया और वो शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर महाराष्ट्र में सत्ता में लौट आई.
  • BJP ने 2024 के लिए अपनी योजना स्पष्ट की- मोदी, मोदी, मोदी
    स्वाति चतुर्वेदी
    बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 तक बढ़ा दिया गया है. नड्डा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2024 से पहले नौ चुनाव होने हैं और बीजेपी को उन सभी को जीतना है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पीएम पर "व्यक्तिगत हमलों" के साथ विपक्ष ने स्वीकार किया है कि वह बीजेपी की सफलता की कुंजी हैं.
  • एक ख़त कमाल के नाम
    प्रियदर्शन
    कमाल साहब, हम दोनों को जो चीज़ जोड़ती थी, वह भाषा भी थी- लफ़्ज़ों के मानी में हमारा भरोसा, शब्दों की नई-नई रंगत खोजने की हमारी कोशिश और अदब की दरबानी का हमारा जज़्बा. पत्रकारिता के सतहीपन ने आपको भी दुखी किया और मुझे भी.
  • मंडल के पुरोधा : अलविदा शरद जी
    मनोरंजन भारती
    27 साल के कच्‍ची उम्र में उम्र में वो संसद में चुनकर पहुंचे थे. वर्ष 1976 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी प्रस्ताव लेकर आई थीं कि लोकसभा के कार्यकाल को 6 साल किया जाए तब दो सांसदों ने इस्तीफा दिया था उसमें शरद यादव शामिल थे.  
  • सूर्य कुमार यादव की जाति के बहाने
    प्रियदर्शन
    बेशक, यह स्थिति भी स्थायी नहीं रहेगी. सूर्य कुमार यादव या ऐसे दूसरे खिलाड़ियों का उदय बता रहा है कि पुरानी शक्ति-संरचनाएं टूट रही हैं और नई सामाजिक शक्तियां अपनी आर्थिक हैसियत के साथ अपना हिस्सा मांग और वसूल रही हैं. यह स्थिति सिर्फ किसी खेल में नहीं, हर क्षेत्र में देखी जा सकती है.
  • अब एक और हिंदी दिवस आ गया! 
    प्रियदर्शन
    दिलचस्प यह है कि एक तरफ़ हिंदी के मसाले में रेत की यह मिलावट जारी है और दूसरी ओर शुद्धतावाद और पवित्रतावाद का प्रपंच भी चल रहा है.
  • अब विदेशी विश्वविद्यालयों से भी लीजिए ज्ञान!
    प्रियदर्शन
    उच्च शिक्षा के निजीकरण के बाद उसके भूमंडलीकरण की इस कोशिश के कुछ निहितार्थ तो स्पष्ट हैं. उच्च शिक्षा अब ग़रीबों की हैसियत से बाहर होने जा रही है. क्योंकि वे जिन सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करते हैं, वे धीरे-धीरे आर्थिक और बौद्धिक रूप से विपन्न बनाए जा रहे हैं. यह सच है कि भारत के विश्वविद्यालय कभी भी बहुत साधन-संपन्न नहीं रहे.
  • आखिर क्यों दिल्ली की सड़कों से गायब है दिल्ली पुलिस?
    मुकेश सिंह सेंगर
    नए पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने अभी तक ऐसा कोई बड़ा कदम नहीं उठाया, जो दिल्ली पुलिस उनके जाने के बाद याद रखे. हालांकि, अभी उनका कार्यकाल चल ही रहा है.
  • नया साल और हिंदी-उर्दू का सवाल
    प्रियदर्शन
    यह सच है कि हिंदी और उर्दू को सांप्रदायिक पहचान के आधार पर बांटने वाली दृष्टि बिल्कुल आज की नहीं है. उसका एक अतीत है और किसी न किसी तरह यह बात समाज के अवचेतन में अपनी जगह बनाती रही है कि हिंदी हिंदुओं की भाषा है और उर्दू मुसलमानों की.
  • बंद नोट और राजनीतिक नीयत का खोट
    सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही भी थी और मामला बंद देने का सुझाव दिया था. लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील पी चिदबंरम की इस दलील ने उसे अपना विचार बदलने को मजबूर किया कि इससे नोटबंदी जैसे फ़ैसलों की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होगी. ये फ़ैसला बीते दिनों को भले पलट न सके, लेकिन आने वाले दिनों के लिए नज़ीर बन सकता है. 
  • अभद्र भाषा से लेकर गंभीर बीमारी तक बस नक़ली चिंता 
    प्रियदर्शन
    भारतीय राजनीति ने इस कुत्ता शब्द के और भी बुरे इस्तेमाल देखे हैं. 2014 से पहले प्रधानमंत्री पद की दौड़ में लगे तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि 2002 के गुजरात दंगों का दर्द उन्हें नहीं है? 
  • बदरंग आस्था बनाम बेशरम रंग 
    प्रियदर्शन
    एक दौर में राज कपूर, देवानंद और दिलीप कुमार की फिल्में भी ‘लड़कों को बिगाड़ने वाली’ मानी जाती थीं. बड़े-बूढ़े तो पूरी फिल्म संस्कृति को संदेह से और नाक-भौं सिकोड़ कर देखते थे.
  • ये अर्थव्यवस्था है नादान! 
    प्रियदर्शन
    जिस डिजिटल लेनदेन का नगाड़ा अगले कई दिनों तक ज़ोर-शोर से बजाया जाता रहा और जिस तरह राष्ट्रीय मुद्रा में लेनदेन का लगभग अवमूल्यन करते हुए डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया गया, उसका उस पहले भाषण में लेश मात्र भी ज़िक्र नहीं था.  
  • Opinion: गुजरात में बीजेपी की शानदार जीत, AAP के लिए एक भूमिका
    स्वाति चतुर्वेदी
    ये चुनाव 2024 के लिए बड़े फेस-ऑफ़ के लिए वार्म-अप हैं; एक दिलचस्प पक्ष यह है कि अरविंद केजरीवाल की आप राजनीति में अपनी शुरुआत के दस साल बाद आधिकारिक रूप से एक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर रही है.
  • क्या मंदी का असर भारत पर पड़ेगा ?
    रवीश कुमार
    वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने तो कई बार ट्विट किया है कि अमुक चीज़ का निर्यात बढ़ गया है। ट्विटर पर अलग अलग आइटमों के निर्यात की सूचना अलग अलग शीर्षक से देते रहते हैं। बस किसी आइटम की तुलना 2013 से करते हैं तो किसी कि 2021 से।
  • गुजरात चुनाव बीजेपी के लिए पूरी तरह से अमित शाह का शो..
    स्वाति चतुर्वेदी
    2016 में आनंदीबेन पटेल की जगह उनके वफादार के रूप में जाने जाने वाले विजय रूपानी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद अमित शाह ने खुद को गुजरात की राजनीति से दूर कर लिया था.
  • BJP के लिए गिफ्ट हैं राहुल गांधी, और तोहफे देते भी रहे हैं...
    स्वाति चतुर्वेदी
    बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अहम चुनाव से पहले राहुल गांधी की गलत समय पर की गई टिप्पणियां शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा के लिए एक उपहार के रूप में आई हैं. इस चुनाव में टीम ठाकरे और शिंदे-भाजपा गठबंधन के बीच पहला वास्तविक आमना-सामना होगा.
  • 'भारत जोड़ो यात्रा' से राहुल गांधी को फायदा, लेकिन स्थानीय नेताओं को करनी होगी मेहनत
    राष्ट्रीय स्तर की राजनीति के बारे में तो राहुल गांधी बात कर रहे हैं, लेकिन जरूरत है कि जो स्थानीय नेता है, जो राज्य के नेता है. वह उन्हें अपने राज्य की परेशानियों के बारे में भी बताएं, ताकि जो लोग उनकी सभाओं में आ रहे हैं. वह सुने और अपने आप को इस यात्रा से जुड़ा पाएं.
  • जब तक ठोस प्लानिंग और रीफॉर्म नहीं होगा, हाल हर बार यूं ही बेहाल होगा...!
    मनीष शर्मा
    द्रविड़ ने नियुक्ति के बाद पूरा ज़ोर वर्कलोड मैनेजमेंट और खिलाड़ियों की ज़्यादा से ज़्यादा आज़माइश पर दिया. यह अच्छी बात रही, लेकिन इसके होने और स्तरीय / ज़्यादा विकल्पों के बावजूद भारतीय कोच विश्व कप में पहले मैच से लेकर शर्मनाक विदाई (इंग्लैंड के हाथों 10 विकेट से हार) तक 'समझौतावादी एकादश' के साथ खेले!
  • नोटबंदी के छह साल, भ्रष्टाचार का वही हाल
    रवीश कुमार
    आज ही के दिन यानी 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू की गई थी. आम तौर पर अपने हर बड़े काम के वार्षिक समारोह मनाने वाली सरकार नोटबंदी के अगले ही साल उसे भुला चुकी थी.
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