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विचार
  • इसलिए ज़रूरी है इस कविता पर पाबंदी!
    प्रियदर्शन
    जब कोई जान जाता है कि वह हमारी गाली, नाली और अलग की हुई थाली में आता है और इसे बड़ी सहजता से कह देता है तो क्या होता है? हमारे भीतर हमारी सोई हुई शर्म कुछ देर के लिए जाग जाती है.
  • अपर्णा यादव के BJP में जाने से समाजवादी पार्टी को कितना नुकसान और भाजपा को कितना फायदा? 
    2017 में समाजवादी पार्टी में पारिवारिक कलह चरम पर थी. उस वक्त भी अपर्णा खुलकर सपा से बेदखल किए गए ससुर शिवपाल यादव के समर्थन में बोलती दिखाई पड़ती थीं लेकिन अब जब शिवपाल ने अखिलेश को ही नया 'नेताजी' मान लिया है, तब अपर्णा ने बीजेपी का दामन थाम लिया.
  • ये सांप्रदायिक उन्माद की घड़ी है, पहरुए सावधान रहना
    प्रियदर्शन
    बहरहाल, यह सावधान रहने की घड़ी है. जातिगत समीकरण की काट में धार्मिक उन्माद को लगातार दी जा रही हवा फिर से माहौल प्रदूषित कर सकती है. जबकि इन चुनावों में एक सकारात्मक चुनाव का सवाल फिलहाल काफ़ी चुनौती भरा है- यूपी के लिए भी और बाक़ी राजनीति के लिए भी.
  • भगवंत मान ही क्यों बने पंजाब में AAP के CM उम्मीदवार?
    शरद शर्मा
    अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता की राय का हवाला देकर भगवंत मान को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के लिए सबसे उपयुक्त बताया है लेकिन भगवंत मान रायशुमारी से पहले ही आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल की पहली पसंद बन गए थे. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे भगवंत मान आम आदमी पार्टी का पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरा बने.
  • पंजाब में कांग्रेस का CM चेहरा होंगे चरणजीत सिंह चन्नी?
    आदेश रावल
    पंजाब की राजनीति में हमेशा बड़े चेहरों का वर्चस्व रहा है. सुरजीत सिंह बरनाला, प्रताप सिंह कैरों , बेअंत सिंह ,प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिन्द्र सिंह, सुखबीर सिंह बादल और उसी राह पर अब पंजाब के 100 दिन के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी चल रहे है. किसी ने नहीं सोचा था कि इतने कम समय में चरणजीत सिंह पंजाब की जनता के अलावा प्रदेश के बाहर भी इतने लोकप्रिय हो जाएंगे.
  • विराट की एक बड़ी गलती..और देखते-देखते सबकुछ बदल गया!
    मनीष शर्मा
    अब यहां से कोहली के लिए आगे की यात्रा आसान बिल्कुल भी नहीं होने जा रही. उनके लिए खेल में मन को "खुली आंखों" से रमाना आसान नहीं होगा. लेकिन अगर आज जहां कोहली खड़े हैं, उसके लिए वह खुद ही सबसे ज्यादा दोषी हैं!
  • शायद 'दादागीरी' समझ नहीं पाए विराट कोहली
    संजय किशोर
    Virat Kohli Innings : एक समय हर 4 में से 1 मैच में शतक लगाने वाले बल्लेबाज़ के साथ बीसीसीआई का ऐसा बर्ताव बिल्कुल ग़लत है. विराट कोहली में अब भी बहुत क्रिकेट बाक़ी है...
  • योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के साथ पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट 
    स्वाति चतुर्वेदी
    योगी के चुनाव का प्रबंधन करने वाले कुछ निष्ठावान नेताओं ने कहा, अगर महाराज पूर्वांचल से चुनाव लड़ते हैं तो इसका पूरे क्षेत्र में बहुत अच्छा असर होगा. गोरखपुर सदर सीट योगी आदित्यनाथ के लिए संभवतः सबसे सुरक्षित सीट है और इससे उनके लिए पश्चिमी यूपी में बेरोकटोक चुनाव प्रचार करने के लिए आजादी होगी.
  • जिस पेशे को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया...
    रवीश कुमार
    हज़ार दुखों से गुज़र रही भारत की पत्रकारिता का दुख आज हज़ार गुना गहरा लग रहा है. जिस पेश को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया है. कमाल ख़ान हमारे बीच नहीं हैं. हम देश और दुनिया भर से आ रही श्रद्धांजलियों को भरे मन से स्वीकार कर रहे हैं. आप सबकी संवेदनाएं बता रही हैं कि आपके जीवन में कमाल ख़ान किस तरीके से रचे बचे हुए थे. कमाल साहब की पत्नी रुचि और उनके बेटे अमान इस ग़म से कभी उबर तो नहीं पाएंगे लेकिन जब कभी आपके प्यार और आपकी संवेदनाओं की तरफ उनकी नज़र जाएगी, उन्हें आगे की ज़िंदगी का सफर तय करने का हौसला देगी. उन्हें ग़म से उबरने का सहारा मिलेगा कि कमाल ख़ान ने टीवी की पत्रकारिता को कितनी शिद्दत से सींचा था. एनडीटीवी से तीस साल से जुड़े थे. एक ऐसे काबिल हमसफर साथी को अलविदा कहना थोड़ा थोड़ा ख़ुद को भी अलविदा कहना है. 
  • सबके हिस्से के अपने
    अनुराग द्वारी
    कमाल सर की कहानियां में जो सब्र था वो उनकी शख्सियत में भी था. बात में भी कभी हड़बड़ी नहीं आराम से जो पूछा, जैसी मदद मांगी उन्होंने कभी मना नहीं किया. कई बार उनके साथ लाइव करने पर उनको सुनना लंबा लगा लेकिन बोझिल नहीं हर एक शब्द उनकी समझ, लगन, अध्ययन में पिरोया हुआ.  
  • तहज़ीब की एक अलग किताब की तरह थे कमाल खान
    रवीश कुमार
    कमाल खान के बारे में मैं रात तक बोल सकता हूं. जितनी शिद्दत से और समझदारी से उन्‍होंने अयोध्‍या की रिपोर्टिंग की है पिछले 20-25 साल में तो सब जाकर देखने लायक है कि वे किस तरह के हिंदुस्‍तान के बारे में आवाज दे रहे थे.
  • अब कोई दूसरा कमाल ख़ान नहीं होगा
    रवीश कुमार
    वे अक्खड़ भी थे क्योंकि अनुशासित थे. इसलिए ना कह देते थे. वे हर बात में हां कहने वाले रिपोर्टर नहीं है. कमाल ख़ान का हां कह देने का मतलब था कि न्यूज़ रूम में किसी ने राहत की सांस ली है. वे नाजायज़ या ज़िद से ना नहीं कहते थे बल्कि किसी स्टोरी को न कहने के पीछे के कारण को विस्तार से समझाते थे.
  • कमाल सर की याद में- जो मेरे मेंटॉर, सहकर्मी और दोस्त थे....
    आलोक पांडे
    आज अंगुलियों पर चलने वाली, तेजी से भागती पत्रकारिता की दुनिया में वो एक अपवाद थे और मैं ये पूर्व गर्व के साथ कह सकता हूं कि वो NDTV के उन दिग्गजों में शामिल थे जो अपने सिद्धांतों से कभी नहीं हटे, पत्रकारिता की दुनिया में बेस्ट थे वो, और पत्रकारिता के ठोस सिद्धांतों पर चलने वाले हम जैसे लोगों के गुरू थे.
  • हमने कमाल को देखा है
    प्रियदर्शन
    वे कई मायनों में अनूठे और अद्वितीय थे. टीवी खबरों की तेज़ रफ़्तार भागती-हांफती दुनिया में वे अपनी गति से चलते थे. यह कहीं से मद्धिम नहीं थी. लेकिन इस गति में भी वे अपनी पत्रकारिता का शील, उसकी गरिमा बनाए रखते थे. यह दरअसल उनके व्यक्तित्व की बुनावट में निहित था. जीवन ने उन्हें पर्याप्त सब्र दिया था. वे तेज़ी से काम करते थे, लेकिन जल्दबाज़ी में नहीं रहते थे.
  • नवजोत सिंह सिद्धू की आख़िरी 'गुगली'
    आदेश रावल
    जब कांग्रेस ने पंजाब में दलित मुख्यमंत्री देने का फ़ैसला किया था, राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने यह कहा था कि कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने दलित को मुख्यमंत्री बनाया. अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह कैसे सिद्धू को मनाए? दलित मुख्यमंत्री का संदेश भी रहे, यानी सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे.
  • ये हिन्दू TRAD क्या तूफान है? नफरत की दुनिया की नई भीड़ का नाम है
    रवीश कुमार
    सरकारों ने अपनी तरह से इस पर कंट्रोल किया ताकि प्रोपेगैंडा फैला सकें तो दूसरी ओर धर्म, रंग, जाति के नाम पर सर्वोच्चता की सनक से लैस नफरती तबके ने इस पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया. अब कई उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि किसी खास समुदाय के खिलाफ हुए नरसंहार में सोशल मीडिया पर चले नफरती अभियान की भी भूमिका थी.
  • अखिलेश यादव के 'बड़े खेल' के बाद क्‍या योगी पर लगाम कसेगी बीजेपी...?
    स्वाति चतुर्वेदी
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मतदान में पूरा एक महीना बाक़ी है, लेकिन दो चीज़ें अभी से स्‍पष्‍ट हैं: अखिलेश यादव इस बार पूरे रंग में हैं और योगी आदित्यनाथ मुश्किल हालत में फंसते नजर आ रहे हैं.
  • गलती कर बैठे चन्नी
    आदेश रावल
    हाल के दिनों में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने महामृत्युंजय जाप और बगलामुखी पाठ करके लाखों मायूस कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक उम्मीद जगायी है और यह बताने की कोशिश भी की है कि कांग्रेस के पास टैलेंट की कमी नहीं है.
  • टेक फ़ॉग ऐप से सावधान! आपके बच्चों को दंगाई बना देगा
    रवीश कुमार
    अगर आप प्राइम टाइम के नियमित दर्शक हैं तो पिछले सात साल के दौरान आपने हमें कई बार कहते सुना होगा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज़रिए झूठ का जाल बिछा दिया गया है ताकि हर दूसरे लड़के में दंगाई बनने की संभावना पैदा हो जाए. धर्म के नाम पर नफरत का ऐसा माहौल बन जाए कि हर सवाल करने वाला या सरकार का विरोधी उसकी आड़ में निपटा दिया जाए. कुछ सड़क पर उतर कर दंगा करें तो कुछ सोशल मीडिया पर वैसी भाषा लिखने बोलने लग जाएं जो हर नरसंहार या दंगों के पहले बोली जाती है. व्हाट्सएप के फैमिली ग्रुप में रिटायर्ड अंकिलों और NRI अंकिल नफरत की दुनिया के चौकीदार हैं. इस एक सेगमेंट के एक हिस्से ने बच्चों को बर्बाद करने और ज़हर से भरने का जो काम किया है उतना किसी ने नहीं किया है.
  • यूपी चुनाव में पेंशन की राजनीति
    रवीश कुमार
    यूपी के चुनाव में तमाम मुद्दों के बीच पेंशन का मुद्दा भी झूल रहा है. झूलना इसलिए कहा क्योंकि चुनाव से लेकर पेंशन की मांग को लेकर संख्या बल का खूब प्रदर्शन होता है लेकिन उस संख्या का असर चुनावी नतीजों में कहीं नहीं दिखता.
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