NDTV Khabar
होम | ब्लॉग

ब्लॉग

विचार
  • धार्मिक समानता है तो आर्थिक असमानता की चिंता नहीं...
    रवीश कुमार
    25 हज़ार महीने का कमाने वाले टॉप टेन में आ गए हैं? प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे आराम नहीं करते हैं, काम ही काम करते हैं तब फिर ये नतीजा क्यों है? आर्थिक असमानता इतनी भयंकर क्यों हो गई, जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती है? : If there is religious equality then don't worry about .
  • निकहत-मैरीकॉम की हेट स्टोरी...
    संजय किशोर
    भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन ने इतिहास रच डाला है. तेलंगाना की 25 साल की मुक्केबाज ने 12वीं आईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता.
  • कैसे बनती है ख़बर, जो ख़बर नहीं है
    रवीश कुमार
    कई बार टीवी की रिपोर्टिंग में किसी ग़रीब की कहानी उसके आंसुओं के साथ भावुक बना देती है, लेकिन उसमें ग़रीबी के मूल कारणों का ज़िक्र नहीं होता, जिसकी जवाबदेही होनी चाहिए वह सरकार नहीं होती है, उसकी नीतियां नहीं होती हैं. इस तरह से जहां आपकी नज़र होनी चाहिए, वहां से हटाकर रोते हुए ग़रीब पर टिका दी जाती है ताकि उसकी ग़रीबी नीतियों का नतीजा न लगे, उसकी अपनी नाकामी लगे.
  • नीतीश कुमार का शासन इतना लुंजपुंज क्यों है ?
    मनीष कुमार
    नीतीश के शराबबंदी का सच यह है कि सर्वोच्च न्यायालय बार-बार उनके क़ानून पर असंतोष ज़ाहिर कर चुका है. इसको विफल कराने में जो माफिया सक्रिय हैं उसमें पुलिस की भी सक्रिय भूमिका भी किसी से छिपी नहीं है और उसके मुखिया पिछले सोलह वर्षों से अधिक समय से नीतीश कुमार खुद हैं.
  • राहुल गांधी की क्या भूमिका होगी? उदयपुर में सबसे बड़े सवाल को जानबूझकर टाला गया
    दो सबसे बड़े सवाल - फिर से चुनाव कैसे जीतें (लोकतंत्र में केवल एक यही चीज मायने रखती है) और भाजपा के बहुसंख्यक हिंदुत्व के एजेंडे से कैसे निपटा जाए, इन पर मुंह मोड़ लिया गया.
  • क्या आप भी जमीन के नीचे कुछ खोज रहे हैं? अपने घर में देखिए, मुद्दे ही मुद्दे हैं...
    रवीश कुमार
    टीवी पर महंगाई की चर्चा मिशन नहीं है, न ही टैगलाइन में मिशन महंगाई वापसी है लेकिन मिशन मान्यूमेंट वापसी एक नया टैगलाइन चलाया जा रहा है. ऐसे टाइटल कहां से आते हैं? क्या ट्विटर पर चलने वाले हैशटैग के उठाकर टीवी के स्क्रीन पर चिपका दिया जाता है? ट्विटर पर हमने देखा कि हैशटैग मान्यूमेंट वापसी को लेकर कोई 20 ट्वीट हैं, इसके बाद भी एक न्यूज़ चैनल अपनी तरफ से मिशन लगा देता है ताकि मान्यता मिले और दर्शकों को लगे कि इस मिशन को पूरा करना उनका भी काम है. आए होंगे महंगाई देखने लेकिन चैनल उन्हें मिशन का काम पकड़ा रहे हैं.
  • महंगाई आसमान पर, शेयर बाज़ार ज़मीन पर, लेकिन मस्जिद के नीचे क्या है...
    अगर आपके घर के आस-पास कोई इमारत नहीं है तो चिन्ता न करें. अपने ही घर पर दावा कर दें कि इसके नीचे कुछ है.बस कुछ टीवी वाले,कुछ अधिकारी, कुछ कानून के जानकार दौड़े आ जाएंगे, और सभी मिलकर राष्ट्रीय बहस का उत्पादन कर डालेंगे.
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश में किसी और शक्ल में तो नहीं आ जाएगा राजद्रोह कानून?
    रवीश कुमार
    एक आज़ाद मुल्क में नागरिक के पास बोलने की आज़ादी हो, उसे किसी तरह से डराया नहीं जाए, इसलिए इस कानून को चले जाना चाहिए. यह बड़ी बात है कि कोर्ट के इस अंतरिम रोक ने सरकारों की करतूत को उजागर कर दिया है लेकिन हम यह भी समझते हैं कि इससे सरकारों को कोई फर्क भी नहीं पड़ने वाला है.
  • श्रीलंका में सिंहासन छोड़कर भागते नेता, जनता को गोली मारने के आदेश...
    रवीश कुमार
    व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के देश में इस बात को नहीं समझा जा सकेगा लेकिन व्हाट्स एप के इस दौर में कहा जा रहा है कि किताब ही क्रांति का औज़ार है. श्रीलंका की हालत बहुत खराब है.वहां के पत्रकार लिख रहे हैं कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने संकट को अनदेखा किया है
  • दिल्ली की सड़कों के नाम बदलने की मांग कर रहे लोग किस मानसिकता के ग़ुलाम हैं? 
    प्रियदर्शन
    दिलचस्प ये है कि बीजेपी सिर्फ़ सड़कों के नाम बदलने की मांग नहीं कर रही, उसकी वैचारिकी से जुड़े संगठन पूरी की पूरी विरासत हड़पने की कोशिश में हैं. ताजमहल से लेकर कुतुब मीनार तक को वे हिंदू राजाओं की देन साबित करना चाहते हैं.
  • बाबाजी से पूछो, रुपये की कमज़ोरी का इलाज, पटक देंगे इस डॉलर को, किया करते थे एलान 
    रवीश कुमार
    दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने राज्य सभा में बताया था कि 2018 में रुपये की कीमत में 9.2 प्रतिशत की गिरावट आई थी. 2018,2019,2020 और 2021 में लगातार रुपया कमज़ोर हुआ है. 2.3 प्रतिशत से लेकर 2.9 प्रतिशत तक कमज़ोर हुआ है. चार साल से भारत का रुपया कमज़ोर होता जा रहा है लेकिन आज इतिहास में सबसे अधिक कमज़ोर हो गया.
  • कब तक दबाव झेल पाएगा भारत?
    क्या भारत अपने रुख पर कायम रहेगा या इस लगातार खिंचते युद्ध में उसे एक पक्ष लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. इसका जवाब कई बातों पर निर्भर करता है.
  • महंगाई जीने लायक नहीं छोड़ रही, ईमानदार पत्रकारिता मरती जा रही है...
    रवीश कुमार
    प्रेस की स्वतंत्रता की रैकिंग भारत की सरकार भले न स्वीकार करे कि विश्व गुरु के यहां प्रेस की स्वतंत्रता दुनिया में 150 वें नंबर पर है, लेकिन एस्टोनिया नाम के देश ने खंडन नहीं किया है, जिसे प्रेस की स्वतंत्रता की रैकिंग में दुनिया में चौथा स्थान प्राप्त है.
  • रुला देगी कांस्टेबल के बेटे की कहानी
    संजय किशोर
    भारत में क्रिकेट को धर्म का दर्ज़ा हासिल है. बात शायद घिसीपिटी हो चुकी है कि लेकिन क्रिकेट के स्टेटस में आज भी कोई बदलाव नहीं है. गेंद और बल्ले के इस खेल का वर्चस्व कायम है. भारत की विविधता और विभिन्नता को क्रिकेट जोड़ता है.
  • जनता में पुलिस की दहशत ज़्यादा, बेख़ौफ़ घूम रहे हैं चोर
    रवीश कुमार
    इस देश में पुलिस सुधार की बात करने वाले दुकान चलाने लगे और सत्ता से सेट हो गए. पुलिस सुधार के नाम पर नई वर्दी और नई गाड़ी तो आ गई मगर पुलिस नई पुलिस नहीं बन सकी. जब तक आप विश्व गुरु टाइप के समाजों के मर्दों की टाइप को नहीं समझेंगे, तिकलधारी सरोज को नहीं समझें.
  • अपनी ही प्रेस से दूर होते प्रधानमंत्री, अपने ही शब्दों से अनजान होती जनता
    रवीश कुमार
    आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस है. आज के दिन प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हैं. भारत और जर्मनी के बीच 14 समझौतों पर दस्तख़त हुए हैं. इनकी घोषणा के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर श्कोल्ज़ प्रेस के सामने हाज़िर हुए. दुनिया भर के पत्रकार इन समझौतों और यूक्रेन युद्ध को लेकर सवाल जवाब का इंतजार कर रहे थे लेकिन उन्हें बताया गया कि प्रेस कान्फ्रेंस में सवाल जवाब नहीं होगा. 
  • महंगाई के बाद बिजली संकट सहने को तैयार रहें
    रवीश कुमार
    भारत की जनता कहां तक और कब तक सह सकती है, उसकी इस क्षमता को आप कभी कम न समझें. बर्दाश्त करने के मामले में जनता का जवाब नहीं है. अभी तक ऐसा कोई संकट नहीं आया है जिसे भारत की जनता ने सहकर नहीं दिखाया है. अगर कोई समस्या इस संकोच में धीरे-धीरे आ रही है या नहीं आ रही है कि लोग सह नहीं पाएंगे,उनमें ताकत नहीं बची है. मेरी इन संकोची समस्याओं से अपील है कि वे जल्दी-जल्दी आएं. भारत की जनता को सहने का मौक़ा देकर गौरवान्वित करें. यह कतई न समझें कि भारत की महान जनता इस वक्त समस्याओं से घिरी है तो नई समस्याओं को नहीं सह पाएगी. महंगाई ने उसे डराने का प्रयास किया, जनता महंगाई की सपोर्टर बन गई और इसे बहस से गायब कर दिया. वह समस्याओं को दूर करने का नहीं, बल्कि सहने का अभ्यास कर रही है और काफी सफल है. 
  • जम्मू-कश्मीर से निकली इस 'धारा' को तुरंत 'भारत' से जोड़ने की ज़रूरत!
    मनीष शर्मा
    रिकॉर्डधारी दिग्गज कपिल देव और उनके दौर के बाद भारत के लिए कई मीडियम पेसर आए, लेकिन ये मध्यम तेज़ गति के गेंदबाज़ ही कहलाए और ये स्विंग और सीम पर ज़्यादा निर्भर रहे. इनकी नैसर्गिक ताकत तेज़ी नहीं थी. इनमें चेतन शर्मा, जवागल श्रीनाथ वगैरह रहे, लेकिन...
  • सबका बदला लेगा रे तेरा चाइनामैन
    संजय किशोर
    लेफ़्ट आर्म स्पिनर कुलदीप यादव ने इस सीज़न शानदार वापसी की है. कुलदीप यादव ने अपनी पुरानी टीम कोलकाता के ख़िलाफ़ एलाने जंग कर दिया है-पिछले साल बेंच पर बिठाया था न! अब चखो मज़ा. 
  • क्या आपने भी महंगाई प्रतिरोधक टीका लगवाया...?
    रवीश कुमार
    यह पहली बार हुआ है, जब एक राजनीतिक वर्ग के रूप में महंगाई के सपोर्टर का उदय हुआ है. महंगाई के ये सपोर्टर कहीं भी आराम से महंगाई के पक्ष में तरह-तरह की दलीलें देते हैं और शास्त्रार्थ जीत जाते हैं.
12345»

Advertisement

 
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com