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  • लखनऊ बन गया है लाशनऊ, धर्म का नशा बेचने वाले लोगों को मरता छोड़ गए
    रवीश कुमार
    भारत को विश्व गुरु बनाने के नाम पर भोली जनता को ठगने वालों ने उस जनता के साथ बहुत बेरहमी की है. विश्व गुरु भारत आज मणिकर्णिका घाट में बदल गया है. जिसकी पहचान बिना आक्सीजन से मरे लाशों से हो रही है. अख़बार लिख रहे होंगे कि  दुनिया में भारत की तारीफ़ हो रही है. आम और ख़ास हर तरह के लोगों को अस्पताल के बाहर और भीतर तड़पता छोड़ दिया है. शनिवार को लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार विनय श्रीवास्तव ट्विटर पर मदद मांगते रहे. बताते रहे कि आक्सीजन लेवल कम होता जा रहा है. कोई मदद नहीं पहुंची और विनय श्रीवास्तव की मौत हो गई.
  • यही चुनाव तय करेगा ममता बनर्जी का भविष्य, BJP का भावी स्वरूप
    मनोरंजन भारती
    लोगों का कहना है कि यहां जो हो रहा है चुनाव में, वो ठीक नहीं हो रहा है. मुद्दों की कोई बात नहीं हो रही है, कोई रोज़गार,स्वास्थ्य या शिक्षा की बात नहीं कर रहा है.
  • धर्म की राजनीति का ध्वजारोहण देखती जनता अस्पतालों के बाहर लाश में बदल रही है
    रवीश कुमार
    सरकार के पास एक साल का वक्त था. अपनी कमज़ोरियों को दूर करने का. उसे पता था कि कोविड की लहर फिर लौटेगी लेकिन उसे प्रोपेगैंडा में मज़ा आता है. दुनिया में नाम कमाने की बीमारी हो गई है. दुनिया हंस रही है. चार महीने के भीतर हम डाक्टरों और हेल्थ वर्करों को भूल गए.
  • वामपंथी तीसरे मोर्चे को 'किंगमेकर' बनना है, तो अच्छा प्रदर्शन करना ही होगा...
    मनोरंजन भारती
    कई जानकार बंगाल में त्रिशंकु विधानसभा की भी बात कर रहे हैं, लेकिन उन हालात में क्या CPM और कांग्रेस अपना समर्थन तृणमूल कांग्रेस को देंगी, इससे भी फिलहाल इंकार नहीं किया जा सकता. लेकिन सबसे अहम यही है कि CPM और कांग्रेस को अच्छा प्रदर्शन करना होगा, और यही इन पार्टियों के लिए भी अच्छा होगा... और कई जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल के लिए भी यही अच्छा होगा.
  • कोरोनावायरस से ख़तरनाक कुछ और भी हैं वायरस
    प्रियदर्शन
    हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ का स्नान दरअसल कोरोना के समंदर में अहंकारग्रस्त हिंदुत्व का भी स्नान है. इस हिंदुत्व को भरोसा हो चुका है कि कोरोना भले उसका कुछ बिगाड़ ले, कोरोना को रोकने की कोशिश में लगा सरकारी तंत्र उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
  • कोविड से बचाव के लिए सभी पत्रकारों का वैक्सीनेशन क्यों नहीं?
    रवीश रंजन शुक्ला
    पिछले साल 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 'पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की तरह मीडिया की भी इस महामारी से लड़ने में अहम भूमिका होगी.' कोरोना काल में ज्यादातर पत्रकारों ने काम के दौरान अपने जान की बाजी लगा दी...अस्पताल से लेकर श्मशान तक और सड़क से लेकर खलिहान तक की रिपोर्टिंग की. आम लोगों की समस्या को सरकार के सामने लाए, लेकिन वैक्सीन आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य कर्मी तो फ्रंटलाइन वर्कर माने गए लेकिन पत्रकारों को इस वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में सरकारी बाबुओं ने दूध में मक्खी की तरह बाहर कर दिया. जबकि इस दौरान देशभर में 50 से ज्यादा पत्रकारों की कोरोना से मौत हुई, सैकड़ों बीमार हुए...हजारों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा...लेकिन मरने के बाद करीब 40 पत्रकारों को 5 लाख की आर्थिक मदद देकर सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया.
  • पश्चिम बंगाल में वही रणनीति अपना रही हैं ममता बनर्जी, जो कुछ साल पहले तक PM नरेंद्र मोदी अपनाते थे...
    मनोरंजन भारती
    ममता बनर्जी वही काम कर रही हैं जो काम कुछ सालों पहले तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किया करते थे, जब वह गुजरात के चुनाव को गुजरात की अस्मिता से जोड़ते थे. आज पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी इस चुनाव को बंगाल की अस्मिता से जोड़ रही है और उसे वहीं बनाने की कोशिश कर रही हैं
  • कोरोना के दौर में लोगों को चुनाव नहीं वैक्सीन की जरूरत
    सुशील कुमार महापात्र
    मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा रिलीज किए गए डेटा के हिसाब से पिछले 24 घंटों में भारत में 1,61,736 कोरोना केस आए हैं. 879 लोगों की मौत हुई है. पिछले तीन दिनों से डेढ़ लाख से भी ज्यादा केस आ रहे हैं जबकि पिछले 7 दिनों से 1 लाख से ज्यादा केस रिकॉर्ड किए गए हैं. मार्च 2020 में जब भारत में लॉकडाउन लगाया गया तब देश में 500 के करीब केस थे. अब जब देश में रोज डेढ़ लाख से ज्यादा केस आ रहे हैं तब भी कई राज्यों  में चुनाव हो रहे हैं. रोड शो और रैली हो रही हैं. हज़ारों की संख्या में लोग बिना मास्क पहने, बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रैली और रोड शो में शामिल हो रहे हैं.
  • पश्चिम बंगाल: ये तीन जातियां तय करेंगी सत्ता का रास्ता, BJP की कवायद बनाम ममता की किलेबंदी
    मनोरंजन भारती
    पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में BJP की रणनीति बिल्कुल साफ है. BJP ने नॉर्थ बंगाल में अपने भविष्य को आजमाने की कोशिश की है. उत्तर बंगाल में 8 लोकसभा  सीटें हैं. 2019 में नॉर्थ बंगाल की आठ में से सात लोकसभा सीटें BJP ने जीती थीं. भारतीय जनता पार्टी ने एक रणनीति के तहत यहां पर अलग-अलग जातियों या समुदाय को केंद्र में रखा है. सबसे पहले राजवंशी समुदाय, जिसको भूमिपुत्र भी कहा जाता है. कूचबिहार, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग नार्थ, साउथ दिनाजपुर जैसी क़रीब तीस सीटों पर इनका दबदबा है. राजवंशी चाहते हैं कि NRC हो और बांग्लादेशियों की पहचान करके उन्हें बाहर निकाला जाए. यही वजह है कि BJP ने यहां पर अपनी पैठ बना ली है. 
  • पश्चिम बंगाल में आगे कतई नहीं है BJP, कांटे की टक्कर दे रही हैं एन्टी-इन्कम्बेन्सी से जूझतीं ममता
    मनोरंजन भारती
    पश्चिम बंगाल में इस बार का विधानसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण है. यह चुनाव ऐसे वक्त में लड़ा जा रहा है, जब पूरे देश में कोरोना का रोमांच अपने चरम पर है, मगर पश्चिम बंगाल में खूब रैलियां हो रही हैं और बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं. हां, इतना ज़रूर है कि अधिकतर लोग मास्क पहनते हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग कहीं नज़र नहीं आती.
  • आम आदमी दवा नहीं खरीद पाएगा, उसे जीने के लिए 'धर्म का गौरव' दिया जाएगा
    कोरोना के इस दौर में अस्पतालों में भयंकर भीड़ है. आज पूरा दिन बीमार लोगों के लिए फ़ोन करने में गया है. कहीं सफलता नहीं मिली है. इस दौरान महामारी और उसके प्रकोप को लेकर भयावह चीज़ों का पता चला. दवा की कमी है. भले सरकार दावा करती रहे, हक़ीक़त यह है कि जीवन रक्षक दवाओं के लिए भी फ़ोन करना पड़ रहा है.
  • अस्पतालों के बाहर 'गुजरात मॉडल' खोज रहे हैं गुजरात के लोग, मिल नहीं रहा
    गुजरात के लोग भी गुजरात मॉडल के झांसे में रहे हैं. पिछले साल भी और इस साल भी जब वहां के लोग अस्पतालों के बार दर-दर भटक रहे हैं तब उन्हें वह गुजरात मॉडल दिखाई नहीं दे रहा.
  • कोरोना टीकाकरण की प्राथमिकता में गंभीर मरीज कहां हैं?
    रवीश कुमार
    भारत के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण कहते हैं कि सबको टीका नहीं दे सकते हैं. जिन लोगों को ज़्यादा ख़तरा है उन्हें दिया जा रहा है. लेकिन क्या इसका कोई वैज्ञानिक आधार सरकार के पास है कि जिस मरीज़ को डायलिसिस के लिए जाना होता है उसके लिए कोरोना ख़तरा नहीं है? कैंसर के जो मरीज़ कीमो के लिए जाते हैं उन्हें टीके की ज़रूरत नहीं है? ऐसे लोगों को टीकाकरण की प्राथमिकता सूची से बाहर रखने का क्या वैज्ञानिक आधार रहा होगा? यह इस वक्त का सबसे बड़ा कठिन प्रश्न है. पहले हल नहीं किया गया तो क्या अब किया जाएगा?
  • अब किसी नई 'पहल' का इंतज़ार है
    प्रियदर्शन
    'पहल' के पहले दौर से भी मैं जुड़ा रहा - एक पाठक की तरह और एक 'पहल' विक्रेता की तरह. यह 87 से 90 के बीच के कभी के दिन थे, जब रांची में रहते हुए और जन संस्कृति मंच के लिए उत्साह और सक्रियता से काम करते हुए हम बाहर की पत्रिकाएं बांटना-बेचना भी अपना कर्तव्य समझते थे.
  • अलग देश बन गए हैं अमित शाह, उन पर लागू नहीं होते भारत के कानून
    रवीश कुमार
    अमित शाह पर कार्रवाई की बात आप कल्पना में भी नहीं सोच सकते और यह तो बिल्कुल नहीं कि चुनाव आयोग कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा, क्योंकि अब आप यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव आयोग की वैसी हैसियत नहीं रही. आप जानते हैं कि कोई हिम्मत नहीं कर पाएगा.
  • कोरोना का संकट गंभीर, कई राज्यों में तालाबंदी की तैयारी
    रवीश कुमार
    कोरोना को लेकर गंभीरता के दो केंद्र हैं. मीटिंग और ब्रीफिंग. तालाबंदी को लेकर सब अलग-अलग तालियां बजा रहे हैं. इस बार भांति भांति की तालाबंदी है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दस दिनों के लिए पूरी तरह तालाबंदी कर दी गई है. महाराष्ट्र में कई ज़िलों में तालाबंदी है तो दिल्ली में रात दस बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक की तालाबंदी है. गुजरात में हाई कोर्ट ने ही कहा है कि तीन-चार दिनों की तालाबंदी कर दी जाए. गुजरात सरकार ने पूरे महीने के लिए 20 शहरों में रात 8 बजे से सुबह छह बजे का कर्फ्यू घोषित कर दिया है. कहीं आठ बजे से कर्फ्यू है तो कहीं दस बजे से कर्फ्यू है. कुछ भी.
  • क्या चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने की कोश‍िशें पर्याप्त हैं?
    रवीश कुमार
    इस चुनाव में कुछ भी हो जा रहा है. मतलब आज कोलकाता में पोलिंग होनी थी, खबर आती है कि उलूबेरिया के सेक्टर अफसर तपन सरकार रिज़र्व EVM लेकर चले गए और अपने एक रिश्तेदार के यहां सो गए. वो रिश्तेदार तृणमूल कांग्रेस के नेता निकले. मतलब कुछ भी. EVM लिया और समोसा खाने चले गए. EVM लिया मामा जी से मिलने चले गए. दोस्त की सगाई में चले गए और खा पी कर सो गए.
  • रफाल लड़ाकू विमान सौदे में फिर लगा दलाली का आरोप
    रवीश कुमार
    आपको याद होगा कि पिछले साल जुलाई में रफाल विमान आने वाला था. गोदी मीडिया के चैनलों ने उसके विजुअल से स्क्रीन को भर दिया. रफाल विमान की खूबियां ज़ोर ज़ोर से बताने लगा और उन लोगों को चिढ़ाने लगा जो रफाल के सौदे पर आरोप लगाया करते थे कि इस डील के ज़रिए अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई है. चैनलों पर रफाल को लेकर चमकदार हेडिंग लगाई गई, ऐसे जैसे गुलाब जल लेकर बारात के स्वागत में एंकर दरवाज़े पर खड़े हों.
  • सरकार ने नमकभर पैसा दिया, ढिंढोरा ऐसा पीटा, जैसे दो-दो लाख दिए हों
    रवीश कुमार
    व्हाट्सऐप यूनवर्सिटी में रिश्तेदारों के ग्रुप में इसे लेकर कोई चर्चा नहीं होती. इस दर्द को भी लोग सांप्रदायिकता के नशे में भूल गए, यह बहुत अच्छी बात है. उन्हें सपना देखना अच्छा लगता है कि भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनेगा, अभी हालत तो यह है कि जो है, वही हाथ से सरकता जा रहा है.
  • क्या भारतीय सियासत में नई इबारत लिख पाएंगे मुस्लिम दल और उनके नेता...?
    अमरीश कुमार त्रिवेदी
    पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों के गठबंधन की राजनीति की परख तो होगी ही, लेकिन साथ ही चुनाव देश में अलग राजनीतिक पहचान और रसूख पाने की कोशिश में जुटे मुस्लिम दलों और मुस्लिम नेताओं के लिए भी बेहद अहम है.
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