Siddhivinayak Corridor Project: मुंबई के प्रभादेवी स्थित प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर (Shree Siddhivinayak Ganapati Mandir) के लिए प्रस्तावित 500 करोड़ रुपये के कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. परियोजना के तहत नर्दुल्ला टैंक मैदान में पार्किंग निर्माण का प्रस्ताव है, जिसका स्थानीय नागरिकों और शिवसेना (यूबीटी) ने विरोध शुरू कर दिया है. विरोध करने वालों का कहना है कि यह मैदान केवल खुली जमीन नहीं, बल्कि आसपास के लोगों के लिए बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के टहलने और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है. वहीं मंदिर ट्रस्ट और सरकार का तर्क है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक कॉरिडोर और पार्किंग व्यवस्था जरूरी है. इस मुद्दे ने अब विकास बनाम सार्वजनिक स्थान की बहस को राजनीतिक रंग दे दिया है.
500 करोड़ के कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर घमासान
सिद्धिविनायक मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कॉरिडोर परियोजना तैयार की गई है. करीब 500 करोड़ रुपये की इस योजना का उद्देश्य मंदिर क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना बताया जा रहा है. परियोजना में यातायात प्रबंधन, पार्किंग और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है.
पार्किंग निर्माण को लेकर विवाद
विवाद की सबसे बड़ी वजह नर्दुल्ला टैंक मैदान में प्रस्तावित पार्किंग निर्माण है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मैदान वर्षों से क्षेत्र के लोगों के उपयोग में आने वाला सार्वजनिक स्थान है. यहां बच्चे खेलते हैं, बुजुर्ग सैर करते हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं.
शिवसेना (यूबीटी) ने किया विरोध
शिवसेना (यूबीटी) उद्धव ठाकरे गुट के विधायक महेश सावंत ने परियोजना के इस हिस्से पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उनका विरोध कॉरिडोर प्रोजेक्ट से नहीं, बल्कि मैदान की जमीन पर पार्किंग बनाए जाने से है. महेश सावंत का दावा है कि मंदिर परिसर के आसपास पहले से पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है.
बीएमसी फंड के इस्तेमाल पर सवाल
विरोध करने वालों ने यह सवाल भी उठाया है कि जब सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट आर्थिक रूप से मजबूत है, तो परियोजना के लिए बीएमसी के फंड का उपयोग क्यों किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए.
मंदिर ट्रस्ट ने आरोप किए खारिज
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट की सदस्य मनीषा तुपे ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रस्तावित पार्किंग स्थल बीएमसी की संपत्ति है. ट्रस्ट के मुताबिक पार्किंग निर्माण का खर्च भी बीएमसी ही वहन करेगी, जबकि कॉरिडोर परियोजना का बाकी खर्च मंदिर ट्रस्ट उठाएगा. ट्रस्ट का कहना है कि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना है. शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट ने भी परियोजना का समर्थन किया है. उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया है.
श्रद्धालुओं ने किया समर्थन
मंदिर आने वाले कई श्रद्धालुओं ने परियोजना का समर्थन किया है. उनका कहना है कि वर्तमान में पार्किंग और भीड़ प्रबंधन बड़ी समस्या है. नई पार्किंग और कॉरिडोर बनने से दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी.
विकास बनाम सार्वजनिक स्थान की बहस
यह मुद्दा अब केवल मंदिर परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है. एक ओर सरकार, बीएमसी और मंदिर ट्रस्ट इसे श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक पर्यटन से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिक इसे खुले मैदान और सार्वजनिक अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं.
मुंबई की राजनीति और गरमा सकती है
आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक रूप ले सकता है. स्थानीय नागरिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष तेज होने के संकेत मिल रहे हैं. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि बीएमसी और राज्य सरकार इस विवाद का क्या समाधान निकालती हैं.
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