विज्ञापन

ट्विशा शर्मा केस: भोपाल सेंट्रल जेल में 'नो VIP ट्रीटमेंट',जानिए पूर्व जज के लिए क्यों बढ़ाना पड़ा कड़ा पहरा ?

ट्विशा शर्मा मौत मामले में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को VIP ट्रीटमेंट मिलने के दावों पर जेल मुख्यालय ने बड़ी सफाई दी है. प्रशासन का कहना है कि पूर्व जज को कोर्ट के आदेश और कड़े सुरक्षा जोखिमों के चलते बैरक नंबर 8 में अलग रखा गया है. जानिए आखिर जेल प्रशासन को क्यों बढ़ाना पड़ा सुरक्षा का पहरा.

हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में, जहां आरोपियों की हर गतिविधि पर सार्वजनिक नजर बनी हुई है, भोपाल सेंट्रल जेल के भीतर वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. लेकिन जेल मुख्यालय के शीर्ष सूत्रों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जेल नियमों और कोर्ट के निर्देशों के तहत ही रखा गया है.यह सफाई उन आरोपों के बीच आई है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सीबीआई (CBI) जांच वाले इस मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पूर्व जज और उनके वकील बेटे को जेल में विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं. जेल मुख्यालय के सूत्रों ने साफ कहा कि न तो कोई वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, न मुलाकात के लिए कोई अलग कमरा है और न ही दोनों आरोपियों को कोई विशेष सुविधा दी जा रही है.

समर्थ सिंह: बैरक नंबर 4 में 'नो स्पेशल ट्रीटमेंट'

जेल सूत्रों के मुताबिक, पूर्व जज के बेटे समर्थ सिंह को बैरक नंबर 4 में रखा गया है और उनके साथ दूसरे अंडरट्रायल क़ैदियों की तरह ही व्यवहार किया जा रहा है. एक शीर्ष सूत्र ने जेल के भीतर विशेष सुविधाएं मिलने के आरोपों को खारिज करते हुए साफ शब्दों में कहा, “मुलाकात के लिए कोई अलग कमरा नहीं है. जेल में कोई वीआईपी व्यवस्था नहीं की गई है.”

पूर्व जज को आराम नहीं, कोर्ट के आदेश पर 'स्पेशल पहरा'

गिरिबाला सिंह के मामले में जेल अधिकारियों का कहना है कि उन्हें महिला विंग में रखा गया है. ये फैसला किसी आराम या सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है.

उन्हें महिला विंग के बैरक नंबर-8 में रखा गया है जो बुजुर्ग या कुछ हद तक अस्वस्थ महिला बंदियों के लिए निर्धारित है, जिन्हें विशेष निगरानी में रखने की जरूरत होती है. जेल सूत्रों के अनुसार, गिरिबाला को वहां इसलिए रखा गया है क्योंकि कोर्ट ने उन्हें सुरक्षित और अलग रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं.

सबसे बड़ा डर: जेल में बंद हैं पूर्व जज के 'सजायाफ्ता कैदी'

जेल प्रशासन इस समय हाई अलर्ट पर है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक इसकी वजह वीआईपी आराम नहीं, बल्कि सुरक्षा का बड़ा जोखिम है. सबसे चौंकाने वाली वजह यह सामने आई है कि जिन 29 लोगों को गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान सजा सुनाई थी, वे वर्तमान में इसी जेल में बंद हैं.गिरिबाला सिंह 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल जिला अदालत में जज रही थीं. अधिकारियों का कहना है कि इसी कारण जेल के भीतर उनकी सुरक्षा एक बेहद संवेदनशील मामला बन गई है. इसी वजह से उनके बैरक के पास अतिरिक्त गार्ड तैनात किए गए हैं और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की निगरानी भी बढ़ाई गई है. जेल सूत्रों का कहना है कि ये सभी कदम एहतियात और सुरक्षा के लिहाज से उठाए गए हैं, किसी विशेष सुविधा के तौर पर नहीं.

जेल का अंदरूनी फेरबदल या 'रूटीन ट्रांसफर'?

इस विवाद की आंच जेल के अंदरूनी प्रशासनिक ढांचे तक भी पहुंची है.

सूत्रों के मुताबिक, अब महिला सेक्शन का प्रभार प्रियंका को दिया गया है, जबकि पूर्व वार्ड प्रभारी जया यादव को वारंट सेक्शन में स्थानांतरित कर दिया गया है. हालांकि, जेल मुख्यालय ने इसे एक नियमित प्रशासनिक बदलाव बताया है, न कि किसी औपचारिक जांच का परिणाम.

सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि डीआईजी (DIG) स्तर पर कोई औपचारिक जांच या रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है. संबंधित अधिकारी को केवल स्थिति की निगरानी करने के लिए कहा गया था, क्योंकि भोपाल, ग्वालियर और चंबल की जेलें उनके ही अधिकार क्षेत्र में आती हैं. इसके अलावा, एडिशनल आईजी (IG) भी रोजाना जेल का दौरा कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

कैंटीन के नियम सबके लिए बराबर

खाने और अन्य सुविधाओं को लेकर जेल मुख्यालय का कहना है कि सभी सुविधाएं जेल मैनुअल और नियमों के अनुसार ही दी जा रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक, कोई भी बंदी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जेल कैंटीन से अपनी जरूरत का सामान ले सकता है और यही नियम गिरिबाला और समर्थ पर भी समान रूप से लागू होते हैं. इसमें किसी को कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी गई है. कुल मिलाकर जेल मुख्यालय का आधिकारिक रुख पूरी तरह साफ है. गिरिबाला सिंह को कोई विशेष सुविधा नहीं दी जा रही, बल्कि कोर्ट के निर्देशों और सुरक्षा कारणों से उन्हें अलग और निगरानी वाले बैरक में रखा गया है. वहीं, समर्थ सिंह भी किसी वीआईपी व्यवस्था का लाभ नहीं उठा रहे हैं, बल्कि बैरक नंबर 4 में एक सामान्य विचाराधीन बंदी की तरह अपनी न्यायिक हिरासत काट रहे हैं.
ये भी पढ़ें: समर्थ-गिरिबाला के बर्ताव, निजी जिंदगी और प्रेग्नेंसी, CBI ने ट्विशा शर्मा के साइकियाट्रिस्ट से क्या सवाल किए?
ये भी पढ़ें: ट्विशा केस में फंदे को लेकर पुलिस की एक और करतूत का खुलासा, एक्सपर्ट बोले, इससे समर्थ-गिरिबाला को मिलेगा सीधा फायदा

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Twisha Death Case, Twisha Case Updates, Twisha CBI Investigation, Bhopal NEWS
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com