Chhattisgarh Naxal Victims Protest: छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवार अब अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आने लगे हैं. नक्सल पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पुनर्वास नीति 2025 लागू होने के बावजूद उन्हें अब तक आर्थिक सहायता, नौकरी, आवास और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया है. पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 तारीख तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे रायपुर पहुंचकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के बंगले का घेराव करेंगे. इस मुद्दे पर अब सियासत भी तेज हो गई है. कांग्रेस ने सरकार पर नक्सल मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा का कहना है कि सरकार पीड़ित परिवारों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है.
नक्सल पीड़ित परिवार सरकार से नाराज
छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवार अब धीरे-धीरे एकजुट हो रहे हैं. नक्सल पीड़ितों का आरोप है कि सरकार द्वारा घोषित योजनाओं और पुनर्वास नीति का लाभ उन्हें ठीक तरीके से नहीं मिल रहा है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि वर्षों से आवेदन और गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.
आंदोलन की तैयारी में नक्सल पीड़ित
छत्तीसगढ़ नक्सल पीड़ित संघ अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है. संघ के पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा. पीड़ित परिवार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के रायपुर स्थित बंगले का घेराव करने की तैयारी में हैं.
क्या है पुनर्वास नीति 2025?
नक्सल पुनर्वास नीति 2025 के तहत राज्य गठन के बाद नक्सली हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए कई प्रावधान किए गए हैं. इनमें आर्थिक सहायता, केंद्र सरकार की राहत राशि, नौकरी, आवास योजना का लाभ और बच्चों की पढ़ाई की सुविधा शामिल है. सरकार का दावा है कि इस नीति के जरिए नक्सल प्रभावित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
“लगातार आवेदन कर रहे, लेकिन कार्रवाई नहीं”
छत्तीसगढ़ नक्सल पीड़ित संघ के पदाधिकारी धीरेंद्र साहू ने कहा कि लगातार आवेदन देने के बावजूद अब तक उचित कार्रवाई नहीं हो पाई है. उन्होंने बताया कि हाल ही में आईजी कार्यालय में भी आवेदन दिया गया था और नई पुनर्वास नीति के तहत लाभ देने की मांग की गई थी. उनका कहना है कि यदि 20 तारीख तक कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित परिवार आंदोलन करने मजबूर होंगे.
“20 साल से भटक रहा हूं”
नक्सल पीड़ित गणेश वर्मा ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में उनके पिता की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी. उन्होंने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों से वे नौकरी और मुआवजे के लिए शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सहायता नहीं मिली. उनके मुताबिक परिवार आज भी आर्थिक और सामाजिक संघर्ष झेल रहा है.
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
नक्सल पीड़ितों की चेतावनी के बीच प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार नक्सल मुद्दे पर राजनीति तो कर रही है, लेकिन पीड़ित परिवारों को राहत नहीं दे पा रही. छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने NDTV को बताया कि नक्सल पीड़ित परिवारों की मांग जायज है, सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए. नक्सल समस्या के समाधान का दवा सरकार कर रही है, लेकिन नक्सली हिंसा में पीड़ितों को राहत तक नहीं दे पा रही है. नक्सल पीड़ित परिवार आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं.
भाजपा बोली- सरकार संवेदनशील
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है. भाजपा प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार जनता और नक्सल पीड़ित परिवारों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है. उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रकार की परेशानी है तो बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए समाधान निकाला जाएगा.
नक्सल समस्या और पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है. बस्तर समेत कई क्षेत्रों में हजारों परिवार इस हिंसा का शिकार हुए हैं. सरकारें समय-समय पर पुनर्वास योजनाएं और राहत पैकेज घोषित करती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
पीड़ित परिवारों की प्रमुख मांगें
नक्सल पीड़ित परिवार मुख्य रूप से ये मांग हैं :
- आर्थिक सहायता
- सरकारी नौकरी
- आवास योजना का लाभ
- बच्चों की शिक्षा
- लंबित मामलों का निराकरण
पीड़ितों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन मिलते हैं, लेकिन वास्तविक राहत नहीं.
सियासत गरमा रहा ये मुद्दा
नक्सल पीड़ितों का यह आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है. एक ओर विपक्ष सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार अपने प्रयासों और योजनाओं का जिक्र कर रही है. आने वाले दिनों में यदि आंदोलन तेज होता है तो यह मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा स्वरूप ले सकता है.
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों तक योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से पहुंचाया जाए. यदि पीड़ित परिवार सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल और गहरे हो सकते हैं.
20 तारीख पर नजरें टिकीं
अब सभी की नजर 20 तारीख पर टिकी हुई है. यदि तब तक सरकार और पीड़ित परिवारों के बीच कोई समाधान नहीं निकलता, तो रायपुर में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है.
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