स्टडी के मुताबिक, बीते 50 साल में हिंदू कुश हिमालय का तापमान हर 10 साल में औसतन 0.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. इसके साथ ही, 21वीं सदी की शुरुआत से अब तक यहां बर्फ से ढके इलाकों में भी कमी आई है.
बर्फबारी में कमी और बढ़ते तापमान ने ग्लेशियरों की मौजूदगी के उस संतुलन को बिगाड़ दिया है, जो नई बर्फ के जमने और पिघलने की वजह से बनाए रखता है. इसका मतलब है कि ग्लेशियर हमें यह समझने का जरूरी संकेत दे रहे हैं कि धरती का मौसम और तापमान किस तरह बदल रहा है.
यही वजह है कि नेपाल की त्रासदी को पिघलते ग्लेशियर से जोड़ा जा रहा है, जो क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया के सामने आने वाली भयावह स्थितियों का सबसे बड़ा उदाहरण है.