पिघलते हिमालय पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियर ध्रुवीय क्षेत्र के बाहर बर्फ से ढके सबसे बड़े इलाकों में से एक है. इसी वजह से नॉर्थ और साउथ पोल के बाद इसे थर्ड पोल भी कहा जाता है. आइए हम अपने आस-पास मौजूद ऐसे ही सात ग्लेशियरों के समझते हैं.

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भारत और इसके आसपास हिंदू कुश हिमालय के 7 इलाके

Satellite survey boxes view of Hindu Kush Himalayan region
सेक्टर 01 / 07

हिंदू कुश

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क्षेत्र 3.2 lakh sqkm
ग्लेशियर 5,071
सबसे बड़ा ग्लेशियर 99 sqkm

यहां ग्लेशियर कुल 3,001 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं. एक ग्लेशियर का औसत आकार 0.59 वर्ग किलोमीटर है. यह क्षेत्र समुद्र तल से 300 से 7,708 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

सेक्टर 02 / 07

काराकोरम

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क्षेत्र 63,474 sqkm
ग्लेशियर 9,067
सबसे बड़ा ग्लेशियर 1,007 sqkm

यहां का क्षेत्रफल महज 63,474 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन ग्लेशियरों का कुल क्षेत्रफल 14,653 वर्ग किलोमीटर है. यानी काराकोरम का 26.27% हिस्सा ग्लेशियर से ढका हुआ है.

सेक्टर 03 / 07

पश्चिमी हिमालय

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क्षेत्र 1.8 lakh sqkm
ग्लेशियर 12,575
सबसे बड़ा ग्लेशियर 113 sqkm

इस क्षेत्र में अन्य सात के मुकाबले ग्लेशियरों की संख्या सबसे ज्यादा 12,575 है. ये कुल 186,678 वर्ग किलोमीटर में से 7,878 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं.

सेक्टर 04 / 07

तिब्बत के अंदर मौजूद पहाड़

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क्षेत्र 5.16 lakh sqkm
ग्लेशियर 3,413
सबसे बड़ा ग्लेशियर 50 sqkm

इस क्षेत्र में 3,413 ग्लेशियर हैं, जो कुल 3,702 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं. यह इलाका भी काफी ऊंचाई पर 3,574 से 6,751 मीटर तक मौजूद है.

ग्राउंड जीरो

मध्य हिमालय

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क्षेत्र 2.5 lakh sqkm
ग्लेशियर 8,722
सबसे बड़ा ग्लेशियर 125 sqkm
Central Himalaya Disaster Telemetry Infographic
सेक्टर 06 / 07

पूर्वी हिमालय

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क्षेत्र 1.6 lakh sqkm
ग्लेशियर 3,401
सबसे बड़ा ग्लेशियर 81 sqkm

यहां ग्लेशियर काफी ऊंचाई पर हैं. इनकी ऊंचाई समुद्र तल से 3,032 से 8,091 मीटर तक है. यहां ग्लेशियर 2,996 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं.

सेक्टर 07 / 07

पूर्वी तिब्बत के पहाड़

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क्षेत्र 3.30 lakh sqkm
ग्लेशियर 580
सबसे बड़ा ग्लेशियर 20 sqkm

सभी सात क्षेत्रों में यहां सबसे कम ग्लेशियर मौजूद हैं. कुल 580 ग्लेशियर महज 299 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं, जबकि यह समूचा इलाका 3.30 लाख वर्ग किलोमीटर में पसरा है.

आपदा प्रतिक्रिया और तैयारी

हम कितना तैयार हैं?

स्टडी के मुताबिक, बीते 50 साल में हिंदू कुश हिमालय का तापमान हर 10 साल में औसतन 0.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. इसके साथ ही, 21वीं सदी की शुरुआत से अब तक यहां बर्फ से ढके इलाकों में भी कमी आई है.

बर्फबारी में कमी और बढ़ते तापमान ने ग्लेशियरों की मौजूदगी के उस संतुलन को बिगाड़ दिया है, जो नई बर्फ के जमने और पिघलने की वजह से बनाए रखता है. इसका मतलब है कि ग्लेशियर हमें यह समझने का जरूरी संकेत दे रहे हैं कि धरती का मौसम और तापमान किस तरह बदल रहा है.

यही वजह है कि नेपाल की त्रासदी को पिघलते ग्लेशियर से जोड़ा जा रहा है, जो क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया के सामने आने वाली भयावह स्थितियों का सबसे बड़ा उदाहरण है.

Severe flash floods and landslides triggered by a low-pressure system over the Bay of Bengal have affected 35 of Nepal’s 77 districts. The Bagmati River in Kathmandu reached a 30-year peak at 14.8m, inundating Pashupatinath temple precincts. Army helicopters conducted 47 rescue sorties, evacuating 612 people from rooftops in Sindhupalchowk.

दस दिन बाद

ग्राउंड जीरो

Nepal Trishuli 3A tunnel rescue operation

रोशन मिजार, क्लास- 7, रोल नंबर- 31

इन किताबों पर उस लड़के का नाम लिखा है, जो श्री बागेश्वरी सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता था. किताब के दो पन्नों के बीच प्लास्टिक का एक स्केल फंसा हुआ मिला. शायद टीचर ने अपनी पिछली क्लास वहीं खत्म की थी. बैग के अंदर दो पेन और लंच था, जो उसे ब्रेक के वक्त खाना था. उस बच्चे का क्या हुआ, किसी को नहीं पता. हो सकता है कि वह किसी तरह सुरक्षित जगह पहुंच गया हो, या फिर वह भी उन लोगों में शामिल हो गया हो, जो इस हादसे में मारे गए या अब भी लापता हैं. लेकिन एक बात तय है कि नेपाल के बाकी लोगों की तरह, उस बच्चे ने भी इस त्रासदी का दर्द झेला.

सबसे बड़ा सवाल

नेपाल एक चेतावनी थी. क्या भारत हिमालय में आने वाली अगली आपदा के लिए तैयार है?

‘थर्ड पोल’ में भारत के बड़े पहाड़ी इलाके भी शामिल हैं, जो पहले से कहीं ज्यादा तेजी से गर्म हो रहे हैं. यहां मौजूद बर्फ के साथ जो होगा वो केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेगा. तराई के इलाकों में बस रहे 1.49 अरब लोगों की जिंदगियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा.