भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे लंबी टनल रोड 'जोजिला' का काम पूरा होने वाला है. जोजिला टनल हिमालयी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी. इससे भारत के बॉर्डर इंस्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा. इसके साथ-साथ लद्दाख से देश के बाकी हिस्सों से कनेक्टिविटी सालभर और हर मौसम में बनी रहेगी. यह टनल रोड श्रीनगर और लद्दाख को आपस में जोड़ती है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को टनल का फाइनल ब्लास्ट यानी ब्रेकथ्रू किया. यानी इसका सबसे मुश्किल खुदाई वाला काम पूरा हो गया है और जल्द ही यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी.
जोजिला सुरंग का कमाल
जोजिला टनल प्रोजेक्ट पर हैदराबाद की कंपनी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) काम कर रही है. MEIL का कहना है कि यह टनल भारत की बढ़ती इंजीनियर क्षमताओं का प्रतीक है. इसे भारत के सबसे मुश्किल हिमालयी रास्तों में से एक पर बनाया गया है, जो हर साल भारी बर्फबारी, एवलांच और खराब मौसम के कारण लंबे समय तक कटा रहता है.
क्यों खास है ये जोजिला टनल?
जोजिला टनल 11,578 फीट की ऊंचाई पर हिमालय के पहाड़ों में बनाई जा रही है. यह 30 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है. खास बात यह है कि यह दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब टनल रोड है. यह सुरंग द्रास और करगिल होते हुए श्रीनगर और लेह के बीच पूरे साल आवाजाही को आसान बनाएगी. यह सुरंग श्रीनगर-करगिल-लेह नेशनल हाईवे का हिस्सा है. इस सुरंग के बन जाने से आम लोगों और सेना दोनों के लिए आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा.
The 13.153-km Zojila Tunnel, the world's longest single-tube bi-directional road tunnel at the highest altitude, and its final breakthrough will be a historic milestone in India's infrastructure history.
— ANI (@ANI) June 7, 2026
Located in the Zojila region between Baltal (Sonamarg) and Meenamarg (Drass… pic.twitter.com/CUstVp7zj0
सेना के लिए कितनी अहम है यह सुरंग?
यह सुरंग रणनीतिक लिहाज से काफी मायने रखती है. इससे लद्दाख में सेना और जरूरी सामान तेजी से और आसानी से ले जाया जा सकेगा. इससे सेना को पाकिस्तान के साथ LOC और चीन के साथ LAC पर अपनी ऑपरेशनल तैयारी बढ़ाने में मदद मिलेगी. MEIL के जनरल मैनेजर हरपाल सिंह ने कहा कि 'यह प्रोजेक्ट पूरा हो रहा है. यह एक सपना सच होने जैसा है. यह हमारे बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बहुत जरूरी है. इससे लद्दाख में सैनिकों और मिलिट्री हार्डवेयर की आवाजाही तेज और आसान होगी.'
क्यों जरूरी थी ये टनल?
सर्दियों में और खराब मौसम के कारण जोजिला दर्रा अक्सर बंद हो जाता था. इससे लॉजिस्ट्रिक्स से जुड़ी चुनौतियां पैदा होती थीं. मई-जून 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ टकराव और गलवान झड़प के बाद खराब और मुश्किल सड़कों के कारण सेना और भारी हथियारों को तैनात करना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था. अधिकारियों का कहना है कि जोजिला सुरंग को औपचारिक रूप से खोले जाने से पहले ही सेना और आम नागरिक आपातकालीन स्थिति में इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.
ज़ोजिला सुरंग परियोजना भारत की सबसे बड़ी और कठिन पहाड़ी परियोजनाओं में से एक है। सोनामार्ग से बालताल तक फैली यह सुरंग और इससे जुड़ी सड़कें, पुल और छोटी सुरंगें मिलकर कुल लगभग 31 किलोमीटर लंबा नेटवर्क बनाती हैं। इसमें निलग्रार क्षेत्र की दो सुरंगें, तीन पुल, कट एंड कवर सेक्शन और… pic.twitter.com/9H58kzeLni
— Megha Engineering and Infrastructures Ltd (@MEIL_Group) June 8, 2026
MEIL ने कहा कि यह सुरंग रणनीतिक रूप से सीमा से सटे रास्तों पर ऑपरेशन मोबिलिटी और लॉजिस्टिक की तैयारी को मजबूत करती है. यह न सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, बल्कि राष्ट्रीय कनेक्टिविटी और सुरक्षा के लिए भी एक अहम संपत्ति है. MEIL ने बताया कि जोजिला टनल को 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' यानी NATM का इस्तेमाल करके बनाया जा रहा है. यह तरीका हिमालय की कमजोर संरचना और अलग-अलग तरह की चट्टानों के लिए बिल्कुल सही है.
ज़ोजिला टनल का निर्माण भारत के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाके में किया जा रहा है। पश्चिमी हिमालय के इस क्षेत्र में हर साल भारी बर्फबारी, खतरनाक बर्फीले तूफान (एवलांच) और हाड़ कंपाने वाली हवाएं चलती हैं, जिससे रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इस रास्ते को हर मौसम में… pic.twitter.com/oUQJM2nNSV
— Megha Engineering and Infrastructures Ltd (@MEIL_Group) June 5, 2026
हरपाल सिंह ने बताया कि सर्दियों में यहां तापमान माइनस 25 डिग्री सेल्यिसस से भी नीचे चला जाता है. लेकिन इससे मजदूरों का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने दिन-रात काम किया. उन्होंने बताया कि इस सुरंग को बनाने वालों में 90% कश्मीरी हैं. उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में सैकड़ों मजदूरों और इंजीनियरों ने खराब मौसम और मुश्किल इलाकों के बीच इस प्रोजेक्ट पर काम किया है.
इससे फायदा क्या होगा?
PIB के मुताबिक, जोजिला टनल को बनाने की लागत 6,809.69 करोड़ रुपये है. सुरंग बन जाने के बाद सबसे बड़ा फायदा तो यही होगा कि सेना की सीमाई इलाकों तक पहुंच आसान और तेज हो जाएगी. किसी भी स्थिति और किसी भी मौसम में सेना अपने हथियार और लॉजिस्टिक को जल्दी से बॉर्डर तक ले जा सकेगी. इससे दूसरा फायदा आम लोगों को होगा. टनल बन जाने से सालभर लद्दाख तक कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी. उम्मीद है कि इससे कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ पूरे इलाके में आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
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