'भोपाल की ट्विशा शर्मा अपने घर वालों को बताती थी कि वो परेशान थी. उसके साथ कुछ सही नहीं हो रहा था.', ये कहना है उसके घरवालों का. आखिर उसकी मौत हो गई. कैसे हुई अभी नहीं पता, खुदकुशी की या खुदकुशी के लिए मजबूर कर दी गई. खुदकुशी की या मार दी गई? जवाब तो जांच के बाद ही मिलेगा. लेकिन एक चीज तय है कि ट्विशा एक टॉक्सिक रिलेशनशिप में जीने को मजबूर थी.
जयपुर की अनु मीणा ने अपने पति को वीडियो कॉल किया और फंदे पर लटक गई. अब घरवाले कह रहे हैं कि उसे दहेज के लिए सताया जा रहा था. उसका पति उसे पीटता था, गालियां देता था. क्या सच है ये जांच के बाद पता चलेगा. लेकिन एक और चौंकाने वाली बात उसके घरवालों ने कही है. उन्होंने कहा है कि मार्च में ही उसके पति ने उसे और बच्चों को घर में लॉक कर दिया था. गैस ऑन करके. किस्मत से अनु बच गई. इस आरोप में भी कितनी सच्चाई ये जांच का विषय है. लेकिन अगर अनु के परिजनों की बात सही है तो अनु एक ऐसे व्यक्ति के साथ रहने को मजबूर थी जो उसकी जान लेना चाहता था? उसे किसने मजबूर किया? क्या मार्च के इस कथित जघन्य कांड के बाद कोई मामला दर्ज हुआ?
दीपिका नागर ने ग्रेटर नोएडा में खुदकुशी कर ली. घरवालों का आरोप है कि उसे दहेज के लिए सताया जा रहा था. पिता ने शादी में एक करोड़ रुपये खर्च किए थे. स्कॉर्पियों दी थी. लेकिन ससुराल वालों को 51 लाख और फॉर्चूनर कार भी चाहिए थी. दीपिका का पति और ससुर गिरफ्तार हो चुका था. आरोप सही हैं या नहीं, ये अदालत को तय करना है. लेकिन एक बात तय है, दीपिका एक टॉक्सिक रिलेशनशिप में थी. जब दीपिका के ससुराल वाले इतने लालची थे कि उनकी बेटी को दहेज के लिए सताते थे तो उनके घर क्यों रहने दिया?
बेंलगुरु में 26 साल की लक्ष्मी प्रिया ने खुदकुशी कर ली. उसके घर वालों ने पति और ससुराल वालों पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. कितना सही है, जांच का विषय है. लेकिन लक्ष्मी ने अपने घरवालों को बताया तो होगा कि उसके साथ क्या हो रहा है, फिर इस टॉक्सिक रिलेशनशिप में रहने के लिए क्यों मजबूर थी?
शहर हो या गांव लड़कियां कहीं सुरक्षित नहीं
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि शहर हो या गांव लड़कियां कहीं सुरक्षित नहीं हैं. 34% महिलाएं पति या साथी के हिंसा का शिकार होती हैं. वहीं शहर भी इससे पीछे नहीं हैं, वहां 27% महिलाओं के साथ हिंसा होती है. कहते हैं गांव पिछड़े हैं और शहर तरक्कीपसंद तो यहां फर्क क्यों नहीं दिखता. अमीर हो या गरीब, हर तरह के परिवारों से दहेज हत्या की खबरें आती हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे- 5 के मुताबिक सबसे अमीर और सबसे गरीब दोनों ही घरों में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा हो रही है.
हर 90 मिनट में एक महिला की जान जा रही है
NCRB के ताजा आंकड़े डराने वाले हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक भारत में साल 2024 में 5737 दहेज हत्याएं हुईं हैं. हर 90 मिनट में एक महिला की जान जा रही है. साल 2024 के NCRB डेटा के मुताबिक, दहेज हत्या के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए हैं. अकेले उत्तर प्रदेश में 2024 में 2,038 मामले दर्ज किए गए. बिहार 1,078 मामलों के साथ इस सूची में दूसरे नंबर पर है. जबकि मध्य प्रदेश में 450 मामले दर्ज किए गए और ये राज्य तीसरे स्थान पर है.
ट्विशा शर्मा, अनु मीणा, दीपिका नागर, लक्ष्मी प्रिया...इन चारों की मौत या कहिए 'हत्या' महज कुछ दिनों में हुई है. मुझे नहीं मालूम कि जब मैं ये लिख रही हूं तो कितनी ट्विशा, कितनी अनु, कितनी दीपिका, कितनी लक्ष्मी ऐसे ही टॉक्सिक रिलेशनशिप में जीने को मजबूर होंगी, न जाने इस वक्त किनके साथ मारपीट हो रही होगी, न जाने इनमें से कौन अपने घरवालों को बता रही होगी कि उसके साथ जुल्म हो रहा है. मैं सोच रही हूं इनमें से कितने के घरवाले कह रहे होंगे बेटी तुम्हारी सुरक्षा पहली प्राथमिकता है. और मैं ये सोचकर परेशान हूं कि इस सवाल का जवाब क्या होगा?
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