- टीएमसी के बागी सांसदों के समर्थन के बाद एनडीए खेमा उत्साहित है
- बीजेपी अप्रैल से ही संसद में दो तिहाई बहुमत के जुगाड़ में जुटी है
- टीएमसी के बागी के बाद एनडीए की नजर डीएमके पर भी टिकी हुई है
तृणमूल कांग्रेस के बीस से अधिक सांसदों की बगावत ने मोदी सरकार की राह का एक बड़ा कांटा निकालने की तैयारी कर दी है. लोकसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से दूर है और इस कारण अप्रैल में महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. लेकिन अब 20 सांसदों के एनडीए को समर्थन करने के ऐलान से एनडीए की संख्या वर्तमान लोक सभा में पहली बार तीन सौ के पार निकलने वाली है. डीएमके से सशर्त समर्थन लेने के लिए भी एनडीए की बातचीत चल रही है. ऐसे में एनडीए दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच जाएगा.
मॉनसून सत्र में सरकार की बड़ी तैयारी
बीजेपी के एक बड़े नेता ने कहा कि सरकार जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने जा रहे मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. इनमें 33 प्रतिशत महिला आरक्षण 2029 लोक सभा चुनाव से ही लागू करने के लिए आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक और एक देश एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण बिल शामिल हैं. उन्होंने कहा कि एनडीए इसके लिए दो तिहाई बहुमत के नजदीक पहुंचने का इंतजार कर रहा है और जैसे ही यह मिलेगा, सरकार विधेयक ले आएगी.

संसद में दो तिहाई बहुमत जुटाने में जुटा एनडीए
अप्रैल से ही मोदी सरकार तैयारी में जुटी है
दरअसल, अप्रैल में संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद से मोदी सरकार ने दो तिहाई बहुमत की व्यवस्था करने की कोशिशें तेज कर दी हैं. हाल के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद के घटनाक्रम ने एनडीए को इसके लिए मजबूती दे दी. तमिलनाडु में डीएमके की हार और उसके कांग्रेस से रिश्ते तोड़ लेने के बाद डीएमके के 22 सांसदों का मुद्दों के आधार पर समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है. वहीं बंगाल में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस जिस तरह से ताश के पत्तों के महल की तरह बिखरी, उसके बाद एनडीए और मजबूत स्थिति में आ गया है.
लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा
अगर संख्या बल के हिसाब से देखें तो 543 की लोक सभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है. इस समय तीन सीटें खाली हैं. ये हैं- बसीरहाट, शिलॉंग और नौगांव. ये तीनों सांसदों के निधन से खाली हुई हैं. इस हिसाब से लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है. एनडीए की वर्तमान संख्या 293 है. अगर टीएमसी के 22 सांसदों का गुट एनडीए को समर्थन देता है तो यह संख्या 315 हो जाती है. अगर मुद्दों के आधार पर डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन मिलता है तो यह संख्या बढ़ कर 337 हो जाती है. सरकार की नजरें शिवसेना यूबीटी के नौ सांसदों पर भी है. अगर इनमें टूट होती है तो छह और सांसदों का समर्थन हासिल हो सकता है. इस तरह यह आंकड़ा बढ़ कर 343 तक पहुंच सकता है.
निर्दलीय सांसदों पर भी सरकार की नजर
अप्रैल में संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के समय एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था. यानी उसे कुछ अतिरिक्त वोट भी मिले थे. अगर इन पांच वोटों को जोड़ें तो एनडीए की संख्या 348 तक हो सकती है जो दो तिहाई बहुमत से केवल 12 दूर है. सरकार को उम्मीद है कि अन्य छोटे दलों, निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग के जरिए यह आंकड़ा छुआ जा सकेगा.
सरकार की प्लानिंग समझिए
संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. यानी सदन की कुल संख्या के कम से कम आधे सदस्यों का सदन में उपस्थित रहना आवश्यक है और उनमें दो तिहाई बहुमत मिलने पर ही संविधान संशोधन विधेयक पारित हो सकता है. अप्रैल में संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के समय 528 सांसद मौजूद थे और दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 352 था. सरकार को 298 वोट मिले थे और विधेयक के खिलाफ 230 वोट डाले गए थे. यानी 54 वोटों से यह विधेयक गिर गया था. अब सरकार ने इस अंतर को काफी हद तक पाट लिया है.
राज्यसभा में भी बहुमत का आंकड़ा
राज्यसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत के नजदीक पहुंच रहा है. वहां टीएमसी के 13 सांसद थे जिनमें से एक सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफा दे दिया है. वे अब बीजेपी से राज्यसभा में आ सकते हैं. टीएमसी के कुछ और भी सांसद इसी फार्मूले के तहत इस्तीफा देकर उपचुनावों के माध्यम से राज्यसभा में आ सकते हैं. एनडीए राज्यसभा में 150 का आंकड़ा पहले ही छू चुका है. डीएमके के आठ सांसद वहां भी सशर्त समर्थन दे सकते हैं. राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 का है. ऐसे में अन्य छोटे दलों के समर्थन से एनडीए इस आंकड़े के भी नजदीक पहुंचता दिख रहा है.
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