“मोदी सरकार जाने वाली है” , राहुल गांधी के इस दावे के मायने क्या हैं और क्या इसमें कोई दम है?

राहुल गांधी ने एक मीडिया ग्रुप को दिए इंटरव्यू में कहा था कि आज की स्थिति में केंद्र में संख्याबल नाजुक है. ऐसे में एक छोटी सी गड़बड़ी से भी सरकार गिर सकती है. राहुल गांधी ने आगे दावा किया कि पीएम मोदी के खेमे में काफी असंतोष है.

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मोदी सरकार को लेकर राहुल गांधी ने किया था बड़ा दावा
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  • उन्होंने दावा किया कि साल भर के भीतर मोदी सरकार गिर जाएगी और धर्म की राजनीति ध्वस्त हो जाएगी
  • बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक हताशा करार देते हुए इसे भारत को अस्थिर करने की मानसिकता बताया
  • विपक्षी दलों में असंतोष और गठबंधन की टूट से मोदी सरकार की स्थिति मजबूत हुई है
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नई दिल्ली:

राहुल गांधी ने शनिवार को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की एक महत्वपूर्ण  बैठक में कहा कि पीएम मोदी ज़्यादा समय तक कुर्सी पर नहीं रह पाएंगे. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि जो आर्थिक संकट आने जा रहा है उससे सरकार घुटने पर आ जाएगी. धर्म की राजनीति ध्वस्त हो जाएगी. इस दबाव को पीएम मोदी संभाल नहीं पाएंगे और भले ही बीजेपी की सरकार रहे लेकिन मोदी साल भर से ज़्यादा समय पीएम पद पर नहीं रहने वाले.

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने बैठक में यह भी कहा कि उनकी भविष्यवाणी हमेशा सही होती है. राहुल गांधी का बयान इस रूप में सामने आया कि उन्होंने  दावा किया कि साल भर में मोदी सरकार गिर जाएगी. इसकी प्रतिक्रिया में बीजेपी ने राहुल के बयान को राजनीतिक हताशा बताया और कहा कि यह भारत को अस्थिर करने की खतरनाक मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है. 

बहरहाल, यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने मोदी सरकार के गिरने का दावा किया हो. 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के फ़ौरन बाद राहुल गांधी ने दो मौकों पर ऐसा बयान दिया था.लोकसभा चुनाव नतीजों के करीब एक हफ़्ते के बाद 13 जून 2024 को कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के साथ पत्रकारों के लिए एक डिनर का आयोजन किया था. इस दौरान अनौपचारिक चर्चा में राहुल गांधी ने दावा किया था कि यह सरकार इतनी कमजोर है कि कांग्रेस जब चाहे सरकार गिरा सकती है. 

राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा था निशाना

इसके कुछ दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में राहुल गांधी ने बीजेपी की अल्पमत सरकार की तरफ़ इशारा करते हुए कहा था कि संख्याबल नाजुक है, छोटी सी गड़बड़ी से भी सरकार गिर सकती है. राहुल गांधी ने यह दावा भी किया था कि पीएम मोदी के खेमे में काफ़ी असंतोष है और उस तरफ़ के कुछ लोग उनके संपर्क में हैं. लोकसभा चुनाव नतीजों में बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल करने में नाकाम रही थी. बीजेपी को 240 सीटें मिली थी.

एनडीए सरकार पूरी तरह जेडीयू (12 सीट) और टीडीपी (16 सीट) समेत एनी छोटे दलों की बैसाखी पर टिकी हुई थी. तब राहुल गांधी के “सरकार गिरने” दावे में दम नज़र आता था. लेकिन तब से बीते दो सालों में बीजेपी-एनडीए ने महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर जबरदस्त वापसी की है. एनडीए में पहले से मजबूत स्थिति में नज़र आ रहा है. वहीं, इंडिया गठबंधन बिखराव है.

क्या है इस दावे के पीछे की वजह 

हालांकि बीते दो सालों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने झारखंड, जम्मू कश्मीर, केरल और तमिलनाडु में सरकार बनाई है. अप्रैल में इंडिया गठबंधन की अगुवाई में विपक्ष में मोदी सरकार का परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने दिया था. लेकिन तमिलनाडु में चुनाव बाद कांग्रेस के टीवीके से हाथ मिलाने के बाद डीएमके इंडिया गठबंधन से बाहर आ चुकी है. आम आदमी पार्टी पहले से कांग्रेस से दूरी बना कर चल रही है. बंगाल की सत्ता जाने से बाद टीएमसी अपने सांसदों को कितना एकजुट रख पाएगी इसपर सवालिया निशान लग गए हैं. कुल मिलाकर विपक्षी खेमे में पड़ी फूट से मोदी सरकार की राह पहले से आसान ही हुई है. इसके बावजूद राहुल गांधी द्वारा मोदी सरकार के गिरने की भविष्यवाणी हैरान करती है. 

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राहुल गांधी ने दी थी ये दलील

शनिवार को हुई कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में अल्पसंख्यक सामाज से आने वाले पार्टी के शीर्ष पचास नेता शामिल थे. इनमें से एक नेता ने एनडीटीवी को बताया कि राहुल गांधी की कोशिश भावी राजनीति का खाका खींचने और अपने नेताओं को हौसला देने की थी. इसीलिए उन्होंने देश के आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में हालात और खराब होंगे और इसे काबू में करना पीएम मोदी के वश में नहीं होगा. ऐसे में उनकी सरकार घुटनों पर आ जाएगी और साल भर बाद वो पीएम नहीं रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी यह भी कहा कि आने वाले दिनों में राजनीति का केंद्र हिंदू-मुसलमान ना होकर अमीर-गरीब होगा.

उम्मीद पर दुनिया कायम है. राहुल गांधी भी अपने नेताओं में हार की निराशा की जगह उम्मीद भरने में लगे हैं. साल 2027 में सात राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इनमें से उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में कांग्रेस का सीधा मुकाबला बीजेपी से है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाजवादी पार्टी का गठबंधन है और पंजाब में कांग्रेस के मुआबला आम आदमी पार्टी से है. कांग्रेस ने इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया तभी राहुल गांधी की “भविष्यवाणी” को गंभीरता से लिया जाएगा. वरना तो वो दो साल पहले से मोदी सरकार के गिरने के दावे कर रहे हैं. 

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