राम मंदिर को लेकर देश में राजनीति नई नहीं है, मगर अखिलेश यादव ने दान-पात्रों और चढ़ावे में चोरी का जो आरोप लगाया है, उसने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. बेशक इस बयान के तार आगामी चुनावी नफे-नुकसान से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इस कड़वी सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि भारत में मंदिरों की अकूत संपत्ति और वहां होने वाली चोरियों का इतिहास पुराना रहा है. देश में ऐसे कई मामले हुए हैं जब मंदिरों में चोरी की ख़बरों ने लोगों की आस्था को आहत किया.
पहले भी लग चुके हैं आरोप
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)
मई 2026 में लीक हुई केरल पुलिस की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर की सुरक्षा में बड़ी चूक और कुप्रबंधन की बात सामने आई है. श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया 78 ग्राम सोना (बिस्कुट और सिक्के) और गर्भगृह से भगवान का बहुमूल्य हीरा जड़ित आभूषण 'वैरा नामा' कई महीनों से गायब है. मंदिर के एक बहुस्तरीय सोने के दीपक (गोल्ड लैंप) को बिना किसी कागजी रिकॉर्ड के चांदी के दीपक से बदल दिया गया. इससे पहले 2017 में भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायमित्र ने मंदिर से 21 लाख रुपये के 8 प्राचीन हीरे गायब होने की रिपोर्ट दी थी.
सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर (केरल)
मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने (इलेक्ट्रोप्लेटिंग) के दौरान 4.54 किलोग्राम सोना गायब हो गया, जिसे चोरी माना गया. जनवरी 2026 में मंदिर में करीब 35 लाख रुपये के घी के पैकेटों का रिकॉर्ड गायब मिलने से हड़कंप मच गया. हिंदू संगठनों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद केरल हाईकोर्ट ने इस वित्तीय गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए.
तिरुपति बालाजी मंदिर (आंध्र प्रदेश)
मंदिर प्रबंधन (TTD) के एक कर्मचारी को सीसीटीवी पर पैसे की हेराफेरी करते रंगे हाथों पकड़ा गया था. आरोप है कि मंदिर में 100 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ, जिसके पैसों को रियल एस्टेट में इन्वेस्ट किया गया. आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी CID जांच चल रही है. पूर्व मुख्य पुजारी द्वारा मंदिर का बेशकीमती 'गुलाबी हीरा' गायब होने का आरोप भी लंबे समय तक राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा.
कनक दुर्गा मंदिर (विजयवाड़ा)
विजयवाड़ा के कनक दुर्गा मंदिर से मार्च 2026 में दान पेटी (हुंडी) की गिनती के दौरान काउंटिंग रूम से एक हैरान करने वाला मामला आया. कुछ सेवादारों और कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं के चढ़ाए असली सोने के आभूषणों को 'रोल्ड गोल्ड' (नकली सोने) से बदलने की कोशिश की, जिन्हें पुलिस ने मौके पर ही दबोच लिया.
भारत के समृद्ध मंदिरों का वित्तीय साम्राज्य
- भारत के केवल शीर्ष 10 सबसे अमीर मंदिरों की संयुक्त संपत्ति 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक है.
- वैश्विक स्तर पर तिरुपति का डंका: 'ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026' के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर करीब 3.38 लाख करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ दुनिया का तीसरा सबसे अमीर धार्मिक स्थल बन चुका है.
- कई देशों की जीडीपी से बड़ी इकोनॉमी: IMF और विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि अकेले तिरुपति मंदिर की संपत्ति साइप्रस, आइसलैंड और एस्टोनिया जैसे दुनिया के लगभग 100 छोटे देशों की कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) से भी ज्यादा है.
- रोजाना का चढ़ावा: तिरुपति में हर दिन औसतन 1 से 5 करोड़ रुपये का दान आता है. उदाहरण के लिए, इसी साल 17 मार्च 2026 को महज एक दिन में रिकॉर्ड 4.88 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया था.
- स्वर्ण मंदिर की सालाना आय: अमृतसर के पवित्र श्री हरमंदर साहिब (स्वर्ण मंदिर) की वार्षिक आय लगभग 1,260 करोड़ रुपये है.
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (अयोध्या) की वित्तीय स्थिति
पिछले दो वर्षों में अयोध्या के श्रीराम मंदिर के राजस्व (कमाई) में भारी उछाल आया है. मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में मंदिर को कुल 376 करोड़ रुपये की आय हुई. मंदिर की आय का मुख्य स्रोत भक्तों द्वारा दिया जाने वाला दान और बैंक में जमा पैसों पर मिलने वाला ब्याज है. मंदिर ट्रस्ट के पास 70 एकड़ का मुख्य परिसर और उसके आसपास की बड़ी अधिग्रहित जमीन भी शामिल है.
भगवान जगन्नाथ मंदिर (पुरी): जमीन के 'जमींदार'
पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के नाम पर 60,000 एकड़ से अधिक भूमि दर्ज है. यह विशाल जमीन ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैली हुई है. ओडिशा के अलावा देश के 6 अलग-अलग राज्यों में भी मंदिर की 395 एकड़ जमीन मौजूद है.
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल): प्राचीन खजाने का राजा
केरल का यह मंदिर प्राचीन और गुप्त खजाने के मामले में पूरी दुनिया में पहले नंबर पर आता है. इस मंदिर की 99% संपत्ति ऐतिहासिक खजाने के रूप में है, जिसमें सोने की मूर्तियां, प्राचीन सिक्के और बेशकीमती हीरे शामिल हैं. इस गुप्त खजाने की कुल कीमत 2 लाख करोड़ रुपये से भी कहीं ज्यादा आंकी गई है.
किसके पास कितना सोना?

पद्मनाभस्वामी से लेकर तिरुपति और सबरीमाला तक के उदाहरण गवाह हैं कि जहां अकूत संपत्ति होगी, वहां सुरक्षा में चूक और मानवीय लालच की गुंजाइश बनी रहेगी. भगवान के चरणों में अर्पित भक्तों की गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा पवित्र है, और उसकी पवित्रता को बनाए रखने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रबंधन की है. ऐसे में पारंपरिक ढर्रे को पीछे छोड़कर 'स्मार्ट टेक्नोलॉजी' और पारदर्शी 'डिजिटल ऑडिट' को अनिवार्य किया जाना चाहिए, क्योंकि जब तक दान-पात्रों के प्रबंधन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक राजनीति को आस्था पर प्रहार करने और भक्तों के भरोसे को झकझोरने का मौका मिलता रहेगा.
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