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क्या एलआईसी मजबूत रहेगी या बाहरी प्रभाव के आगे झुक जाएगी?

अगर LIC बाहरी दबाव या चुनिंदा आलोचना की वजह से दबाव में आती है तो इससे देश के बुनियादी ढांचे और कैपिटल मार्केट में होने वाले अहम दीर्घकालिक निवेश में देरी हो सकती है.

क्या एलआईसी मजबूत रहेगी या बाहरी प्रभाव के आगे झुक जाएगी?
  • LIC के पास लगभग 55 लाख करोड़ रुपये की बचत का प्रबंधन करने वाला व्यापक वित्तीय पोर्टफोलियो है
  • इंफ्रास्ट्रक्चर में LIC का निवेश दीर्घकालिक स्थिरता और फिक्स्ड इनकम प्रदान करता है
  • LIC पर दबाव पड़ने से भारत के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में जरूरी लंबे समय के निवेश में बाधा आ सकती है
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भारत की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), जो देश की लगभग ₹55 लाख करोड़ की बचत का प्रबंधन करती है, इन दिनों कुछ समूहों के निशाने पर है. ये समूह मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए LIC के कुछ बड़े निवेशों (जैसे कि अदाणी और रिलायंस समूहों में) को 'रिस्की' बताकर उस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इस खबर में आपको बताते हैं कि LIC को क्यों निशाना बनाया जा रहा है और क्यों उसका मजबूत बने रहना देश के लिए जरूरी है.

एलआईसी का निवेश क्यों है इतना खास?

LIC सिर्फ एक कंपनी नहीं है. यह लगभग हर भारतीय परिवार से जुड़ा है. LIC के भरोसे पर कोई भी हमला भारत के संस्थानों में लोगों के भरोसे पर असर करता है. LIC का पोर्टफोलियो 55 लाख करोड़ रुपये का है. निवेश की बात करें तो LIC के टोटल फंड का करीब 40 लाख करोड़ रुपये हिस्सा 'AAA' रेटेड सरकारी ऋण और अदाणी, रिलायंस जैसी दूसरी कंपनियों की सबसे सुरक्षित संपत्तियों में लगा है. LIC का इक्विटी पोर्टफोलियो 2014 में ₹1.5 लाख करोड़ से बढ़कर आज ₹15.5 लाख करोड़ हो गया है, जो 10 गुना से अधिक की वृद्धि है.

जब दुनिया की हर बड़ी बीमा कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करती है, तो LIC को यह क्यों नहीं करना चाहिए? LIC हमेशा अपने ग्राहकों की सुरक्षा करता आया है. साल 2014 के बाद से इसने किसी बड़े निवेश में नुकसान नहीं झेला है.

एलआईसी को निशाना क्यों बनाया जा रहा है?

संगठित समूह जानबूझकर चुनिंदा जानकारी फैला रहे हैं. वे केवल LIC को निशाना बनाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि SBI लाइफ, HDFC लाइफ, ICICI, कोटक और कई निजी म्यूचुअल फंड का भी इन्हीं कंपनियों में बराबर या कहीं-कहीं इससे ज्यादा निवेश है.

2017 से LIC ने अदाणी समूह में लगभग ₹31,000 करोड़ का निवेश किया. आज इसकी कीमत करीब ₹65,000 करोड़ है. यह घाटा नहीं, बल्कि मुनाफ़ा है. मई 2025 में हुए LIC के ₹5,000 करोड़ के निवेश पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि अमेरिकी बीमा कंपनियाँ (जैसे एथीने लाइफ, मेटलाइफ) और भारतीय बैंक (जैसे HDFC बैंक) ने इसी समूह में समान या इससे भी बड़ा निवेश किया है, पर उन पर सवाल नहीं उठाए जाते.

एलआईसी क्यों करता है इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश?

एक बीमा कंपनी को 20, 30 या 40 साल आगे की सोचकर निवेश करना होता है. इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे एयरपोर्ट, पोर्ट, लॉजिस्टिक्स) में निवेश स्टेबिलिटी और फिक्स इनकम देता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी दुकान या मकान का किराया. दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां, जैसे वॉरेन बफे की बर्कशायर हैथवे भी स्टेबिलिटी के लिए रेलरोड, पावर प्लांट और एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश करती हैं. अदाणी जैसे समूह बड़े नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर चलाते हैं, उनकी संपत्तियां आमतौर पर रेटिंग एजेंसियों से 'AAA' या हाई सेफ्टी रेटिंग पाती हैं. इसलिए इनमें निवेश करना किसी भी जोखिम का काम नहीं है. 

निवेश से पहले सख्त नियम

एलआईसी निवेश करने से पहले सख्त नियमों का पालन करती है. खास बात यह है कि एलआईसी अपने कुल फंड का 1% से ज्यादा किसी भी कॉर्पोरेट ग्रुप में इन्वेस्ट नहीं कर सकती है.

  • विस्तृत जाँच
  • IRDAI रेगूलेटरी
  • बोर्ड की मंजूरी.
  • प्रॉक्सी सलाहकारों पर निर्भरता
कोई भी अधिकारी या राजनेता यह तय नहीं कर सकता कि एलआईसी कहां निवेश करे. एलआईसी का पैसा पूरी अर्थव्यवस्था में फैला हुआ है. एलआईसी ने 300 से ज्यादा शीर्ष भारतीय कंपनियों में निवेश किया है - अदाणी, रिलायंस, टाटा, आदित्य बिड़ला और कई अन्य. यह किसी एक समूह या एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है.

अगर LIC दबाव में झुका तो क्या होगा?

अगर LIC बाहरी दबाव या चुनिंदा आलोचना की वजह से दबाव में आती है तो इससे देश के बुनियादी ढांचे और कैपिटल मार्केट में होने वाले अहम दीर्घकालिक निवेश में देरी हो सकती है. साल 2010 से 2013 के बीच, भारत के कोयला, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले ऐसे ही अभियानों की वजह से नीतिगत लकवा (Policy Paralysis) आ गया था, जिससे आर्थिक ग्रोथ पर असर पड़ा और सरकारी बैंकों में भारी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ गए थे.

ऐसे में LIC का अपनी अप्रोच पर कायम रहना जरूरी है ताकि यह पॉलिसी होल्डर्स के पैसे की सेफ्टी कर सके और भारत की दीर्घकालिक आर्थिक ग्रोथ को बढ़ा सके.

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