- भारत ने पहली बार 12 परमाणु मिसाइलों को रेडी टू फायर वाले मोड में तैयार रखा है
- हथियार निगरानी संस्था सीपरी ने परमाणु हथियारों पर अपनी ताजा रिपोर्ट दी है.
- दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार अमेरिका, रूस और चीन के पास हैं.
भारत ने परमाणु हथियार नीति में बड़ा बदलाव करते हुए 12 एटमी हथियार तैनात कर दिए हैं. हथियार निगरानी संगठन SIPRI की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. हालांकि सवाल है कि क्या यह भारत की परमाणु हथियारों की पहली तैनाती है. यह भारत की दशकों पुरानी नीति से एक बड़ा बदलाव है. अभी तक परमाणु हथियार और मिसाइल समेत उन्हें दागने वाले डिलिवरी सिस्टम को अलग-अलग रखा जाता था.रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है, बजाय एक भंडार के तौर पर. भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है.भारत की परमाणु हथियारोंके पहले इस्तेमाल न करने की नीति है. इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है.
SIPRI रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की 1770 एटमी मिसाइलें तैनात हैं. जबकि उसके पास 1930 के करीब परमाणु हथियार सुरक्षित हैं. रूस की 1796 मिसाइलें तैनात हैं औऱ 2604 भंडारगृहों में सुरक्षित हैं. ब्रिटेन के पास कुल 225, फ्रांस के पास 290 और चीन के कुल तैनात और संरक्षित परमाणु हथियारों की बात करें तो यह संख्या 620 होती है. भारत ने 12 परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी हैं. जबकि 178 परमाणु हथियार सुरक्षित रखे गए हैं. पाकिस्तान ने कोई एटमी मिसाइल तैनात नहीं की है. जबकि उसके पास 170 परमाणु हथियार हैं.
बदल रही भारत की पॉलिसी
इस वक्त दुनिया में 9 देश हैं, जिनके पास परमाणु हथियार हैं. ये 9 देश हैं- अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, नॉर्थ कोरिया और इजरायल.
ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी. इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था. SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती हैः
- शांति के समय तैनाती: चीन की तरह ही भारत ने भी अब शांति के समय कभी-कभी मिसाइलों पर सीदे तौर पर कुछ परमाणु हथियार तैनात करना शुरू कर दिया है.
- कितना डिप्लॉयमेंट: भारत के कुल 190 परमाणु हथियार हैं. SIPRI का अनुमान है कि अब शांति के समय में भी भारत ने 12 परमाणु हथियारों को तैनात कर रखा है.
- पाकिस्तान के कितने हथियार: 2025 तक भारत के पास 180 परमाणु हथियार थे, अब 190 हो गए हैं. वहीं, पाकिस्तान के पास 170 हथियार हैं. जबकि, चीन के पास 620 हथियार हैं.
- असर क्या होगा: भारत ने 12 न्यूक्लियर वॉरहेड भी तैनात किए हैं. इससे भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर तनाव और चीन-भारत के बीच प्रतिद्वंद्विता और बढ़ सकती है.

दुनियाभर में कितनी तैनाती?
दुनिया के 9 देशों के पास 12,187 परमाणु हथियार हैं. सबसे ज्यादा 5,420 परमाणु हथियार रूस के पास हैं. अमेरिका के पास 5,042 हथियार हैं.
SIPRI का अनुमान है कि इनमें से 9,745 परमाणु हथियारी मिलिट्री स्टॉकपाइल में हैं. जबकि 4,012 हथियारों को मिसाइलों और विमानों के साथ तैनात किया गया है.
रिपोर्ट कहती है कि तैनात हथियारों में से 2,100 से 2,200 हथियार बैलिस्टिक मिसाइलों पर हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर रखे गए हैं. खास तौर पर अमेरिका और रूस ने. इनके अलावा फ्रांस और यूके के भी कुछ हथियार हाई अलर्ट पर हैं.

हथियार खर्च के मामले भारत पांचवें नंबर पर
भारत वर्ष 2025 में 92.1 अरब डॉलर के रक्षा खर्च के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार खरीदार बन गया है. इंटरनेशनल थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट में यह कहा गया है. भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ये वृद्धि देखी गई है.
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भारत के पास कितने परमाणु हथियार
भारत के पास जनवरी 2026 तक करीब 190 परमाणु हथियार हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170 हथियार हैं. भारत ने अपने परमाणु भंडार में थोड़ा बढ़ावा किया है और नए वेपन सिस्टम को लगातार विकसित करना जारी रखा है.भारत अब हथियारों को उस स्तर पर एडवांस बना रहा है, जो चीन के पूरे इलाके तक पहुंच सकते हैं. हालांकि पाकिस्तान के साथ पारंपरिक संघर्ष भी बड़ी वजह है.
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पहलगाम हमले के बाद मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 5 दिन सैन्य संघर्ष चला था. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए थे.दोनों देशों के बीच परमाणु हमले का खतरा भी बढ़ गया था.
SIPRI की चेतावनी- दुनियाभर में बढ़ रहा तनाव
SIPRI के डायरेक्टर करीम हग्गाग का कहना है कि दुनिया में गलत फैसलों और तनाव बढ़ने का खतरा लगातार बढ़ रहा है. उनके मुताबिक हथियार नियंत्रण से जुड़े पुराने समझौते कमजोर पड़ रहे हैं. नई सैन्य तकनीकें तेजी से फैल रही हैं. साथ ही बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है.
रिपोर्ट में देशों से अपील की गई है कि वे हथियार नियंत्रण और तनाव कम करने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय प्रयास शुरू करें.
SIPRI का मानना है कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक बना हुआ है. भारत और पाकिस्तान 1947 के बाद तीन बड़े युद्ध लड़ चुके हैं. इसके अलावा कई बार सीमित सैन्य टकराव भी हुए हैं. अब साइबर युद्ध जैसी नई क्षमताओं के जुड़ने से जोखिम और बढ़ गया है.
रिपोर्ट के अनुसार भारत जहां चीन और पाकिस्तान दोनों से पैदा होने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी सैन्य तैयारी बढ़ा रहा है, वहीं आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान हथियारों की खरीद के जरिए सैन्य संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. SIPRI की चेतावनी साफ है कि अगर हथियारों की दौड़ और क्षेत्रीय तनाव इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले सालों में एशिया वैश्विक सुरक्षा का सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बन सकता है.
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