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मुंबई से दिल्ली तक जिमखाना क्लब का इतिहास 150 साल पुराना, लाखों में भी नहीं मिलती मेंबरशिप, 30 साल तक वेटिंग

दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने का आदेश केंद्र सरकार ने दे दिया है. यहां 600 के करीब कर्मचारी हैं. ये अफसरों, सैन्य अधिकारियों और सियासतदानों की मुलाकात का बड़ा ठिकाना है, जो अब इतिहास बन जाएगा.

मुंबई से दिल्ली तक जिमखाना क्लब का इतिहास 150 साल पुराना, लाखों में भी नहीं मिलती मेंबरशिप,  30 साल तक वेटिंग
Gymkhana Club Delhi: दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास
नई दिल्ली:

दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास भले ही 113 साल पुराना हो, लेकिन देश में अंग्रेजों के जमाने में बने ऐसे एलीट क्लब की नींव 150 साल पहले पड़ी. सबसे पहले जिमखाना क्लब मुंबई में 1875 में खुला, जबकि दिल्ली में 1913 में. लुटियंस दिल्ली के पावर सेंटर 2 सफदरजंग रोड) में दिल्ली जिमखाना क्लब (DGC) महज सोशल क्लब नहीं है, बल्कि ब्रिटिश इतिहास, सत्तानशीनों के सियासी चर्चा के साथ एलीट क्लास के के मनोरंजन का केंद्र रहा है. केंद्र सरकार ने 27.3 एकड़ में फैले जिमखाना क्लब की बेशकीमती जमीन का लीज डीड रद्द कर 5 जून तक क्लब खाली करने का आदेश दिया है. ये प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के ठीक बगल  में है. सरकार ने इस क्लब को सुरक्षा और सैन्य जरूरतों की वजह से हाथ में लेने का फैसला किया है.

सेना प्रमुख की एंट्री रोक दी थी

भारत के पहले कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल केएम करियप्पा (तब जनरल) एक शाम क्लब के डाइनिंग हॉल में प्रवेश कर रहे थे, लेकिन कैजुअल ड्रेस में होने के कारण स्टाफ मेंबर ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया. करियप्पा बिना किसी गुस्से के चुपचाप अपनी गाड़ी में लौटे, कपड़े बदले और फिर अंदर आए. उन्होंने उस स्टाफ की तारीफ की. 1930 और 1940 के दशक में जब भारत का स्वतंत्रता आंदोलन अपने चरम पर था, तब यह क्लब ब्रिटिश अधिकारियों और भारतीय नेताओं के बीच एक अनौपचारिक चर्चा का केंद्र था. जिन्ना, नेहरू और पार्टी पॉलिटिक्स का ये केंद्र था.

कलकत्ता से दिल्ली आई राजधानी तो बना दिल्ली जिमखाना क्लब

किंग जॉर्ज पंचम ने 1911 में दिल्ली दरबार के दौरान इंडिया की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली लाने की घोषणा की. इसके बाद दिल्ली में अंग्रेजी प्रशासनिक अधिकारियों और सैन्य अफसरों की बाढ़ सी आ गई. इन्हीं नौकरशाहों, फौजी अफसरों के मनोरंजन, खेलकूद के लिए 3 जुलाई 1913 को इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब बना, जिसमें से इंपीरियल शब्द आजादी के बाद हटाया गया.इस क्लब की मुख्य इमारत को 1920-30 के दशक में ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी रसेल ने डिजाइन किया था. रसेल ने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति हाउस, जो पहले कमांडर इन चीफ का आवास था और बाद में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आधिकारिक निवास बना.

Delhi Gymkhana Club

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वायसराय की बीवी का स्विमिंग पूल

शुरुआत में जिमखाना क्लब का स्विमिंग पूल नहीं था. वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) में भी नहीं. वायसराय लॉर्ड विलिंगडन की पत्नी को स्विमिंग का बेहद शौक था, लेकिन उन्हें प्राइवेट  स्विमिंग पूल का इस्तेमाल करना पड़ता था. फिर उन्होंने खुद 21 हजार का डोनेशन देकर जिमखाना क्लब में स्विमिंग पूल बनवाया. 

विंबलडन के बाहर सबसे ज्यादा ग्रास कोर्ट

दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर में 26 एक्टिव ग्रास टेनिस कोर्ट (घास के मैदान) हैं. लंदन के विंबलडन जैसी कुछ जगहों को छोड़कर ये सबसे बड़ी संख्या है. भारत के कई डेविस कप मैचों की मेजबानी इस क्लब ने की है.

देश के विभाजन का वक्त

देश का बंटवारा 1947 में हुआ तो भारत-पाकिस्तान की सेनाएं भी अलग हुईं. सेना की रेजीमेंटों के सिख, हिंदू और मुस्लिम अफसर यहीं आखिरी बार मिले और आखिरी ड्रिंक शेयर की थी. वो उनके लिए भावुक विदाई का पल था.

Delhi Gymkhana Club

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टक्सीडो से कुर्ता-पायजामा तक ड्रेस कोड

जिमखाना क्लब में कठोर ब्रिटिश ड्रेस कोड लागू थे. क्लब के डाइनिंग हॉल और ऑफिशियल स्थानों पर डिनर जैकेट (टक्सीडो) पहनना अनिवार्य था. लंबी लड़ाई के बाद जिमखाना क्लब ने जोधपुरी, बंदगला और कुर्ता-पायजामा जैसे पारंपरिक भारतीय पोशाकों को जगह ही.

दिल्ली जिमखाना क्लब की मेंबरशिप

दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता का आवेदन शुल्क अफसरों के लिए 1 और आम नागरिकों के लिए 1.5 लाख रुपये आवेदन शुल्क है. जबकि एक बार के शुल्क के तौर पर डेढ़ लाख अफसरों और 7.5 लाख रुपये तक का चार्ज आम नागरिकों को देना पड़ता है. फिर भी यहां कोटा होने के कारण मेंबरशिप के लिए 30-40 साल की वेटिंग होती है. क्लब के करीब 5600 मेंबरों में 40 फीसदी मेंबरशिप आईएएस, आईपीएस अफसरों, 40 फीसदी डिफेंस और 20 प्रतिशत ही आम नागरिकों को मिलती हैं. हालांकि फैमिली और अन्य को मिलाकर कुल 11 से 12 हजार की तादाद होती है.

मुंबई का जिमखाना क्लब

बॉम्बे के तत्कालीन गवर्नर सर फिलिप वोडहाउस ने साउथ मुंबई के आजाद मैदान के पास बेशकीमती जमीन इसके लिए दी. पहले यहां केवल ब्रिटिश पुरुषों को प्रवेश की अनुमति थी. भारतीय नागरिकों और महिलाओं को सदस्यता मिलना तो दूर मुख्य भवन में प्रवेश तक की मनाही थी.

Delhi Gymkhana Club Photo

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भारतीयों के प्रवेश की मनाही

पहले ये क्लब नस्लवाद के प्रतीक थे.भारतीयों के प्रवेश की मनाही थी. 1920-1947 के बीच भारतीय राजाओं-महाराजाओं (पटियाला, ग्वालियर और जोधपुर के महाराजा) और अमीर कारोबारियों के लिए भी जिमखाना के दरवाजे खुले.1947 के बाद भारतीय सेना के जनरलों और आईएएस (IAS) अधिकारियों के हाथ में नियंत्रण आ गया. 

जिमखाना क्लब का विवाद

क्लब में गुटबाजी, वित्तीय गड़बड़ी और प्रबंधन में वर्चस्व का विवाद बढ़ा है.प्रशासनिक अफसरों और सैन्य अधिकारियों के गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई कोर्ट तक पहुंची. सरकार ने फिर इसका मैनेजमेंट संभालने के लिए एक समिति बनाई.

जिमखाना का मतलब

जिमखाना (Gymkhana) इंग्लिश वर्ड Gymnasium (व्यायामशाला) से मिलता है, लेकिन ये हिंदुस्तानी और फारसी से बना है. ये गेंदखाना से जिमखाना बना, जहां ब्रिटिशकाल में अफसर बॉल से खेलने आते थे. लेकिन उच्चारण की वजह से इसे अंग्रेजी के जिम दूसरा फारसी शब्द  खाना (घर/स्थान) मिलाकर जिमखाना किया गया. 
 

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