- दिल्ली काजिमखाना क्लब जुलाई 1913 में ब्रिटिश अधिकारियों और सेना के अफसरों के लिए स्थापित हुआ था
- सरकार ने सुरक्षा कारणों से 5 जून को जिमखाना क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को वापस लेने का निर्णय लिया है
- क्लब की मुख्य इमारत लुटियंस डिजाइन की है और इसे आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी रसेल ने बनाया था, जो दिल्ली की पहचान है
Gymkhana Club History: 1913 के जुलाई में दिल्ली में ब्रिटिश अधिकारियों और सेना के अफसरों के लिए बना इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब का सफर अब खत्म होने जा रहा है. सरकार सुरक्षा कारणों से 5 जून को परिसर वापस लेगी. लुटियंस दिल्ली के केंद्र में स्थित राजधानी का प्रतिष्ठित 'दिल्ली जिमखाना क्लब' कभी शाही दौर में रसूखदार और प्रभावशाली लोगों का पसंदीदा ठिकाना हुआ करता था. अब केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए इसे वापस लिया जाएगा. क्लब मैनेजमेंट को बेदखली के लिए जारी एक नोटिस में कहा गया है कि यह तय किया गया है कि दिल्ली के एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक इलाके में स्थित यह जगह, रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा के अन्य जरूरी कामों के लिए बेहद जरूरी है.
जिमखाना क्लब के आर्किटेक्ट थे रॉबर्ट टी रसेल
दिल्ली जिमखाना क्लब भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित संभ्रांत सामाजिक संस्थानों में से एक है. जुलाई 1913 में स्थापित, इसकी मशहूर लुटियंस-डिजाइन वाली मुख्य इमारतें शीर्ष नौकरशाहों, राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों के लिए एक मुख्य मिलन स्थल के तौर पर काम करती हैं. यह क्लब अपने मौजूदा पते पर 1930 के दशक की शुरुआत में बनाया गया था. इस इमारत को बनाने का ठेका आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी रसेल को दिया गया था. उनकी बनाई दो अन्य इमारतें भी शहर की पहचान बन गईं. कनॉट प्लेस और कमांडर-इन-चीफ का निवास, जिसे बाद में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निवास 'तीन मूर्ति भवन' के नाम से जाना गया.
क्लब का मेंबर बनने के लिए 40 साल तक इंतजार
जिमखाना क्लब क्लब में परमानेंट सदस्यों की संख्या की एक सीमा तय है, जो लगभग 5,600 है. हर साल, सदस्यता छोड़ने या मौजूदा सदस्यों के निधन से खाली हुई जगहों को भरने के लिए लगभग 100 नए परमानेंट सदस्यों को शामिल किया जाता है. इस खास क्लब में सदस्य बनने के इच्छुक लोगों की वेटिंग लिस्ट काफी लंबी होती है. इनमें से कुछ लोगों को तो 40 साल से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ता रहा. जहां एक ओर सरकारी और रक्षा कर्मियों के लिए सदस्यता में एक कोटा तय है, वहीं निजी या आम नागरिक श्रेणी के इच्छुक सदस्यों को वेटिंग लिस्ट में अपनी जगह पक्की करने के लिए 7 लाख रुपए से ज्यादा की आवेदन फीस जमा करनी पड़ती है.
जिमखाना क्लब: विवाद से बंदी तक की कहानी
- 1913 के जुलाई में दिल्ली में ब्रिटिश अधिकारियों और सेना के अफसरों के लिए बना इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब.
- 1918 में सरकार ने इस क्लब के लिए जमीन लीज पर दी.
- 1947 में आजादी के बाद इसका नाम दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया.
- 1950-2000 तक इसमें सुविधाओं का विस्तार किया गया, खेल, डाइनिंग ह़ल और अन्य चीजें बनीं.
- 2010 में इस क्लब में वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत आई.
- 2018-19 में कॉरपोरेट मंत्रालय की जांच में पता चला कि सदस्यता आवेदन शुल्क में अचानक बड़ी बढ़ोतरी की गई और सरकारी कर्मचारी के लिए 1.5 लाख और प्राइवेट लोगों के लिए साढ़े 7 लाख किया गया.
- 2021 में क्लब के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई.
- 2022 में प्रोफेशल लोगों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव पास किया गया.
- 2026 में जिमखाना क्लब से 47 करोड़ रुपये बकाए की मांग की गई, जिसमें 36 करोड़ रुपये रिवाइज लीज रेट था.
- मई 2026 में सरकार ने जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का आदेश दिया.
प्रधानमंत्री के सरकारी आवास के पास है जिमखाना क्लब
उप-भूमि एवं विकास अधिकारी सुचित गोयल द्वारा 22 मई को क्लब को नोटिस जारी किया गया था. इसमें क्लब की जनरल कमेटी और सेक्रेटरी को बताया गया कि 2 सफदरजंग रोड पर स्थित मौजूदा 27.3 एकड़ की जगह, जो 7 लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री के सरकारी आवास के पास है, 5 जून को सरकार अपने कब्जे में ले लेगी. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने नोटिस में कहा कि क्लब की जमीन इसलिए वापस ली जा रही है क्योंकि यह जरूरी संस्थागत जरूरतों, शासन के इंफ्रास्ट्रक्चर और जनहित के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए जरूरी है, जिन्हें आसपास की सरकारी जमीनों को वापस लेने के काम के साथ जोड़ा गया है.
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क्लब के सेक्रेटरी को संबोधित नोटिस में कहा गया कि आपको निर्देश दिया जाता है कि आप बताई गई तारीख को इस दफ्तर के प्रतिनिधियों को इस जगह का शांतिपूर्ण कब्जा सौंप दें. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो कानून के मुताबिक कब्जा ले लिया जाएगा. नोटिस में लीज डीड के क्लॉज 4 का जिक्र किया गया है, जिसमें बताया गया है कि अगर जमीन किसी सार्वजनिक काम के लिए जरूरी हो तो लीज देने वाले के पास उस जगह में दोबारा प्रवेश करने का अधिकार होता है. इन्हीं अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने भूमि और विकास कार्यालय के जरिए लीज को खत्म कर दिया है और प्रॉपर्टी में तुरंत दोबारा प्रवेश करने का आदेश दिया है. नोटिस में कहा गया कि जमीन का पूरा हिस्सा उस पर बनी सभी इमारतों, ढांचों, लॉन और फिटिंग्स के साथ लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के जरिए पूरी तरह से राष्ट्रपति के अधिकार में आ जाएगा.
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