- शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पश्चिम बंगाल में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई तेज़ हो गई है
- नगर निगम ने तिलजाला, कस्बा और बेलेघाटा समेत कई इलाकों में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अवैध ढांचों को ध्वस्त किया
- पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुलडोजर कार्रवाई पर कड़ी आलोचना की और इसे गरीबों के खिलाफ राजनीति बताया।
पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही 'बुलडोजर एक्शन' भी शुरू हो गया है. शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से बंगाल में कई जगहों पर बुलडोजर चलाए गए हैं. सरकार कहती है कि बुलडोजर अवैध निर्माण पर चलाए जा रहे हैं. सरकार का दावा है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' लिया जा रहा है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस कार्रवाई को 'बुलडोजर पॉलिटिक्स' या 'बुलडोजर स्टेट' बताती है.
अब पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को कई जगहों पर बुलडोजर एक्शन लिया गया है. रविवार को तिलजाला, कस्बा और बेलेघाटा सहित शहर के कई हिस्सों में कथित अवैध ढांचों पर बुलडोजर चलाया गया. अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उन ढांचों को ध्वस्त किया, जो नगर नगम के नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए थे.
अधिकारियों ने बताया कि बेलेघाटा में ईस्ट कुरिया रोड पर टीएमसी नेता राजू नस्कर से कथित तौर पर जुड़ी एक इमारत को भी ध्वस्त कर दिया गया. इस बीच, जमीन घोटाले के आरोपी 'सोना पप्पू' से जुड़े कस्बा इलाके के कुछ हिस्सों में भी ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया. आरोप है कि वहां बिना अनुमति के पांच मंजिला इमारत का निर्माण किया गया था.
इन कार्रवाइयों पर पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा, 'उन्होंने बुलडोजरों का इस्तेमाल करके घरों को ढहा दिया है. और तो और मेयर को भी इसकी भनक तक नहीं लगने दी. बुलडोजरों का इस्तेमाल करके मासूम फेरीवालों के ठेलों को भी तोड़-फोड़ दिया गया.'
इससे पहले भी ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि 'अगर आप किसी अवैध निर्माण को भी गिरा रहे हैं, तब भी लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार है. बंगाल कोई 'बुलडोजर स्टेट' नहीं है.'
कैसे शुरू हुआ 'बुलडोजर एक्शन'?
9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. 12 मई को कोलकाता के तिलजाला में चमड़े की एक फैक्ट्री में आग लग गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी.
आग लगने के 30 घंटे के भीतर ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फैक्ट्री को ढहाने के आदेश दे दिए थे. 30 घंटे के अंदर-अंदर भारी सुरक्षाबल के साथ बुलडोजर पहुंचे और फैक्ट्री को ढहा दिया गया. इसके मालिक जफर निसार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था.

जिस दिन आग लगी, उसी दिन सरकार ने जांच कमेटी बना दी. सीएम शुभेंदु ने बताया था कि जांच में सामने आया कि फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी.
इसके बाद तिलजला में कई और अवैध इमारतों पर बुलडोजर चलाया गया. बुलडोजर एक्शन के खिलाफ 17 मई को तिलजला में विरोध प्रदर्शन भड़क उठा. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव भी किया. इसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.
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हसनाबाद और हावड़ा स्टेशन के बाहर बुलडोजर
16 मई को उत्तर 24 परगना जिले के हसनाबाद और हावड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाए गए. हसनाबाद में अवैध ढांचों को बुलडोजर से ढहाया गया.
16 मई की ही रात को हावड़ा और सियालदेह रेलवे स्टेशन के बाहर अतिक्रमण हटाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया गया. इस दौरान बुलडोजरों की मदद से गंगा घाट से लेकर स्टेशन परिसर तक के इलाके में बनी अस्थायी दुकानों और अवैध ढांचों की कतारों को ढहा दिया गया.
कुछ फेरीवालों ने आरोप लगाया था कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई शुरू करने से पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया गया था. कई दुकानदारों ने दावा किया था कि वे यहां दशकों से दुकान लगा रहे थे.
VIDEO | Howrah, West Bengal: A demolition drive was conducted near Howrah Railway Station area to remove illegal encroachments on Saturday night.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 17, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/lv7NvagNMZ
वहीं, अधिकारियों का कहना था कि रेलवे की जमीन पर हुए अवैध कब्जों का हटाने और स्टेशन के आसपास पैदल चलने वालों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए यह कार्रवाई बहुत जरूरी थी.

न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि इस कार्रवाई के दौरान हावड़ा स्टेशन के बाहर करीब 150 स्टॉल और सड़क किनारे लगने वाली दुकानों को हटा दिया गया था. साथ ही 200 से ज्यादा फेरीवालों को भी हटाया गया था. वहीं, सियालदेह में 250 से ज्यादा स्टॉल और फेरीवालों पर कार्रवाई की गई थी.
इस कार्रवाई पर बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कहा था, 'सरकारी जगह पर अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जहां अवैध रूप से निर्माण होगा, वहां बुलडोजर चलेगा.'
जब नंदीग्राम में चला बुलडोजर
19 मई को पश्चिमी बर्दवान जिले के बर्नपुर और पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम में बुलडोर चले. बर्नपुर में SAIL के IISCO स्टील प्लांट की जमीन पर टीएमसी के दो अनाधिकृत दफ्तरों को गिराने के लिए बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया था. कंपनी के प्रवक्ता ने बताया था कि लगभग 1,500 वर्ग फीट जमीन को खाली कराकर प्लांट के कब्जे में वापस ले लिया गया है.
उसी दिन नंदीग्राम के जलापाई इलाके में 4 अवैध ढांचों को गिराया गया. कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर ये कार्रवाई की गई थी. अधिकारियों का कहना था कि जिस जमीन पर इन परिवारों ने अपने घर बनाए थे, वह राज्य सरकार की थी. उन्होंने बताया था कि बार-बार नोटिस देने के बावजूद इन लोगों ने जगह नहीं छोड़ी थी.
Nandigram, West Bengal: Illegal constructions on government land were demolished using bulldozers following Calcutta High Court orders. Police supervised the operation in the Jalpai area, where several houses were razed. pic.twitter.com/z8vhNvdbyA
— IANS (@ians_india) May 19, 2026
अधिकारियों ने बताया था कि हाई कोर्ट का आदेश मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की मदद से सिंचाई विभाग की कब्जाई गई जमीन को वापस लिया गया.
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सॉल्ट लेक के बाहर लगी प्रतिमा भी हटी
कोलकाता के पास सॉल्ट लेक स्टेडियम के VVIP गेट के बाहर लगी एक प्रतिमा को भी शनिवार को ढहा दिया गया. इस प्रतिमा को लेकर विवाद बना रहता था.
बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने इस प्रतिमा को हटाने का आदेश दिया था. उन्होंने कहा कि यह एक विचित्र और बेढंगी प्रतिमा है, जिसमें कटे हुए पैरों पर फुटबॉल रखी हुई दिखाई गई है.

यह प्रतिमा 2017 में सॉल्ट लेक स्टेडियम के रेनोवेशन के दौरान स्थापित की गई थी. इसमें धड़ का निचला हिस्सा दिखाया गया था, जिसके ऊपर एक फुटबॉल रखी हुई थी, जिस पर 'बिस्व बांग्ला' का लोगो बनाया गया था. प्रतिमा के दोनों पैरों के ऊपर भी फुटबॉल रखी गई थी, जिनमें से एक पर 'जॉयी' शब्द लिखा हुआ था.
23 मई को ही कोलकाता के बेलेघाटा इलाके में टीएमसी के एक दफ्तर को भी बुलडोजर से ढहाया गया. अधिकारियों का कहना था कि इस दफ्तर को एक व्यक्ति की निजी जमीन पर बनाया गया था.
बुलडोजर एक्शन पर पॉलिटिक्स
बंगाल में जब से शुभेंदु अधिकारी सीएम बने हैं, तब से ही 'बुलडोजर एक्शन' शुरू हो गया है. सरकार दावा करती है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा किया गया है, जिन्हें हटाया जा रहा है.
पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि घरों से लेकर फेरीवालों तक, गरीब लोग राजनीतिक अहंकार की कीमत चुका रहे हैं. बंगाल में बुलडोजर की राजनीति नहीं चलती. टैगोर और नेताजी की धरती पर आम नागरिकों के खिलाफ भय, बल और विध्वंसकारी अभियानों के जरिए शासन नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा था कि जो सरकार पहले विध्वंस करती है और बाद में सुनती है, वह बंगाल की आत्मा को ही भूल चुकी है.

बुलडोजर एक्शन को लेकर टीएमसी सांसद सयानी घोष ने कहा था कि बंगाल के लोग खुद देख लें कि वे बुलडोजर की संस्कृति चाहते हैं या नहीं? सयानी घोष का कहना था कि अगर लोग बुलडोजर की संस्कृति चाहते हैं तो भाजपा बनी रहेगी. अगर वह शांति की संस्कृति चाहते हैं तो ममता बनर्जी वापस आएंगी.
शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि 'पिछली सरकार के दौरान भ्रष्टाचार बेरोक-टोक फलता-फूलता रहा. नगर निगम के अधिकारियों की जानकारी और प्रभावशाली नेताओं के संरक्षण में पैसों के बदले अवैध निर्माण किए गए.'
उन्होंने कहा कि 'अवैध निर्माण में शामिल सभी लोगों के साथ-साथ ऐसी अनियमितताओं को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.'
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