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बेंगलुरु का ट्रैफिक: 4 KM के लिए Google इंजीनियर को लगे 45 मिनट, VIDEO वायरल

बेंगलुरु में ट्रैफिक की समस्या से परेशान गूगल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर वेंकटेश डी. का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इंजीनियर को अपने घर से महज 4 किलोमीटर दूर स्थित ऑफिस पहुंचने में 45 मिनट का समय लग गया, जिसमें आमतौर पर सिर्फ 10 मिनट लगते हैं.

बेंगलुरु का ट्रैफिक: 4 KM के लिए Google इंजीनियर को लगे 45 मिनट, VIDEO वायरल
सॉफ्टवेयर इंजीनियर वेंकटेश डी. ने बताया कि उनका ऑफिस उनके घर से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
  • बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया पर ट्रैफिक जाम की गंभीर स्थिति का वीडियो साझा किया
  • इंजीनियर ने बताया कि 4KM की दूरी तय करने में सामान्यतः नौ से दस मिनट लगते हैं, लेकिन उन्हें पैंतालीस मिनट लगे
  • सुबह दस बजे घर से निकले इंजीनियर को भारी ट्रैफिक जाम के कारण सुबह दस पैंतालीस बजे ऑफिस पहुंचना पड़ा
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बेंगलुरु: देश की सिलिकॉन वैली और आईटी हब कहा जाने वाला बेंगलुरु शहर एक बार फिर अपनी रफ्तार को लेकर सुर्खियों में है. इस बार सोशल मीडिया पर गूगल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने बेंगलुरु के रोजमर्रा के ट्रैफिक की दर्दनाक हकीकत को बयां किया है.

ऑफिस घर से 4 किलोमीटर की दूरी 

वीडियो पोस्ट करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर वेंकटेश डी. ने बताया कि उनका ऑफिस उनके घर से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सामान्य परिस्थितियों में इस दूरी को तय करने में बमुश्किल 9 से 10 मिनट का समय लगना चाहिए. लेकिन बेंगलुरु की सड़कों पर रेंगते वाहनों के कारण, उस दिन उन्हें इस छोटे से सफर को पूरा करने में पूरे 45 मिनट लग गए. 

लंबे ट्रैफिक जाम के कारण भारी निराशा

वेंकटेश ने अपने सफर का विवरण देते हुए बताया कि वह सुबह 10:00 बजे अपने घर से ऑफिस के लिए निकले थे. उन्हें उम्मीद थी कि वे कुछ ही मिनटों में पहुंच जाएंगे, लेकिन भारी जाम के चलते वे सुबह 10:45 बजे ही अपने ऑफिस पहुंच सके. इस बेहद धीमी रफ्तार और लंबे ट्रैफिक जाम के कारण उन्हें भारी निराशा और झुंझलाहट का सामना करना पड़ा.

रोजाना का 'सिरदर्द' 

यह वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गया और हजारों नेटिजन्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई स्थानीय निवासियों और आईटी प्रोफेशनल्स ने इस वीडियो पर कमेंट करते हुए कहा कि बेंगलुरु में यह किसी एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि हर नौकरीपेशा इंसान को रोजाना इसी 'सिरदर्द' से गुजरना पड़ता है. लोग अब शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी सवाल उठाने लगे हैं. 

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