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सुप्रीम कोर्ट का जाली आदेश और खूंखार कैदी फरार, बेंगलुरु जेल का वो 'घोटाला' जिसने सबको चौंकाया

बेंगलुरु की सेंट्रल जेल से सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाकर उम्रकैद की सजा काट रहे एक खूंखार कैदी की रिहाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है.

सुप्रीम कोर्ट का जाली आदेश और खूंखार कैदी फरार, बेंगलुरु जेल का वो 'घोटाला' जिसने सबको चौंकाया
  • बेंगलुरु जेल से उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर ए को जाली सुप्रीम कोर्ट आदेश से रिहा कराया गया था
  • शंकर ए पर फिरौती के लिए अपहरण और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत उम्रकैद और जुर्माने की सजा थी
  • 3 दिसंबर 2018 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश फर्जी निकला, जिसके आधार पर जेल प्रशासन ने शंकर को रिहा किया था
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां उम्रकैद की सजा काट रहे एक खूंखार कैदी को रिहा कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश का इस्तेमाल किया गया. इस घोटाले का खुलासा होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. जेल अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले मुख्य आरोपी कैदी और उसके मददगारों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराई है.

आखिर क्या है पूरा मामला?

20 मई को बेंगलुरु के परप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई FIR के मुताबिक, यह शिकायत सेंट्रल जेल के प्रभारी अधीक्षक कर्ण बी क्षत्रिय की ओर से दी गई है. मामले में मुख्य आरोपी की पहचान शंकर ए के रूप में हुई है, जो अरुमुगम का बेटा है और बेंगलुरु सेंट्रल जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहा था.

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, दोषी शंकर ए को IPC की धारा 364A (फिरौती के लिए अपहरण) के तहत उम्रकैद और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. इसके अलावा, उसे IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत भी उम्रकैद और 5,000 रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा मिली थी. अदालत के आदेश के अनुसार ये दोनों सजाएं एक साथ चल रही थीं.

FIR में इस बात का जिक्र है कि जेल प्रशासन को 3 दिसंबर 2018 को एक ऑफिशियल लेटर मिला था, जो कथित रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक आपराधिक अपील के संबंध में जारी किया गया था. इस फर्जी आदेश को सच मानते हुए जेल अधिकारियों ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई. इसके बाद कैदी शंकर ने 13 नवंबर 2018 को कुल 10,000 रुपये का जुर्माना जमा किया और उसी दिन उसे जेल से रिहा कर दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने खोली पोल

कैदी की रिहाई के काफी समय बाद जेल प्रशासन को गोपनीय शिकायतें मिलीं कि शंकर ए ने जो अदालती दस्तावेज जमा किए थे, वे पूरी तरह फर्जी थे. इसके बाद कर्नाटक के जेल DG के कड़े आदेश पर एक आंतरिक उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई. बेंगलुरु के DIG ने पूरे रिकॉर्ड को वैरिफाई किया. इसके लिए जेल विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार से बात की और उस आदेश की प्रामाणिकता की जांच कराई. सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने रिकॉर्ड खंगालने के बाद लिखित में पुष्टि की कि 3 नवंबर 2018 का वह कथित आदेश पूरी तरह से फर्जी था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

दोबारा गिरफ्तारी के आदेश

जेल अधीक्षक की शिकायत में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि शंकर ए को जाली दस्तावेजों के जाल में फंसाकर गैर-कानूनी तरीके से जेल से भगाया गया है. इस साजिश में जेल के अंदर या बाहर के कई रसूखदार लोगों ने जाली रिकॉर्ड बनाने और उसे जेल तक पहुंचाने में मदद की होगी. पुलिस ने अब इस मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी की संगीन धाराओं में केस दर्ज कर लिया है. फरार दोषी को दोबारा गिरफ्तार करने और इस बड़ी आपराधिक साजिश में शामिल सभी चेहरों को बेनकाब करने के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं.

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