नई मां को अक्सर ये सलाह दी जाती है कि बच्चा बहुत छोटा है, इसे अंडा, मूंगफली या भारी चीजें मत खिलाना, नहीं तो बच्चे को लाइफटाइम के लिए एलर्जी हो सकती है. दशकों से हमारे घरों में, भी सुनने को मिलता है. लेकिन अब विज्ञान ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह से पलट दिया है.
हाल ही में आई एक बड़ी मेडिकल रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बच्चों को एलर्जी वाली चीजों से दूर रखने की बजाय, अगर उन्हें सही समय पर वो चीजें खिला दी जाएं, तो उनका शरीर उस खाने को आसानी से पचा लेता है और एलर्जी का खतरा हमेशा के लिए कम हो जाता है.
इस नई स्टडी के मुताबिक, जब से डॉक्टरों ने अपनी पुरानी सलाह को बदलकर बच्चों को 6 महीने की उम्र से ही अंडा खिलाने की सिफारिश की है, तब से बच्चों में अंडे से होने वाली एलर्जी के मामलों में 17% से भी ज्यादा की भारी गिरावट देखी गई है.
क्या कहती है यह नई रिसर्च?
यह महत्वपूर्ण स्टडी मशहूर मेडिकल जर्नल 'JAMA पेडियाट्रिक्स' (JAMA Pediatrics) में छपी है. इस रिसर्च की मुख्य लेखिका (Lead Author) जेनिफर कोपलीन हैं, जो 'यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड चाइल्ड हेल्थ रिसर्च सेंटर' में बच्चों की एलर्जी और महामारी विज्ञान (Childhood Allergy and Epidemiology) की ग्रुप लीडर हैं.

बच्चे को किस उम्र से अंडे देना चाहिए. Photo Credit: Image Credit: Pexels
जेनिफर कोपलीन ने इस रिसर्च के बारे में बताते हुए कहा-
यह स्टडी साफ तौर पर दिखाती है कि जब मेडिकल गाइडलइंस को पुख्ता सबूतों के आधार पर बदला जाता है और पेरेंट्स उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाते हैं, तो बच्चों में फूड एलर्जी को बहुत बड़े लेवल पर कम किया जा सकता है.
यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया में की गई है, लेकिन इसके नतीजे भारत समेत पूरी दुनिया के माता-पिता के लिए बेहद जरूरी हैं, क्योंकि यह उन पेरेंट्स का डर दूर करती है जो अपने बच्चों को अंडा या अन्य नई चीजें खिलाने से कतराते हैं.
पुराना नियम क्या था?
बच्चों को क्या खिलाना चाहिए और क्या नहीं, इसे लेकर पिछले कुछ दशकों में डॉक्टरों की राय बहुत तेजी से बदली है. यही वजह है कि आज के समय में कई पेरेंट्स इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि वे किस डॉक्टर की बात पर भरोसा करें और कौन सी सलाह उनके बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित है.
आज से करीब 26 साल पहले, साल 2000 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स (AAP) ने पेरेंट्स को यह सलाह दी थी कि जिन बच्चों को एलर्जी का ज्यादा खतरा है उन्हें कम से कम 2 साल की उम्र तक अंडा बिल्कुल नहीं देना चाहिए. उस समय वैज्ञानिकों का सोचना था कि बच्चे के शरीर को इन चीजों से दूर रखकर एलर्जी वाले रिएक्शन से बचाया जा सकता है.
साल 2008 में आया बदलाव- जैसे-जैसे मेडिकल साइंस ने तरक्की की और नई रिसर्च सामने आईं, डॉक्टरों को अहसास हुआ कि यह सोच गलत थी. साल 2008 में AAP ने अपनी गाइडलाइंस को अपडेट किया और कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बच्चों को अंडा देर से खिलाने से एलर्जी रुकती है. इसके बजाय उन्होंने 6 महीने की उम्र से ही बच्चों की डाइट में अंडा शामिल करने का समर्थन किया.
साल 2016 की ग्लोबल गाइडलाइंस- साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी नेशनल गाइडलाइंस बदल दीं. वहां के डॉक्टरों ने साफ कहा कि बच्चों को उनके पहले जन्मदिन से पहले ही अंडा और एलर्जी पैदा करने वाली दूसरी चीजें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में देना शुरू कर देना चाहिए, ताकि उनका शरीर इसके लिए तैयार हो सके.

बच्चों को फूड एलर्जी से बचाने के लिए क्या करें. Photo Credit: iStock
अमेरिका और भारत जैसे देशों की क्या स्थिति है?
भले ही यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया में हुई हो, लेकिन इसके मायने भारत और अमेरिका जैसे देशों के लिए भी बहुत बड़े हैं. अमेरिका के बड़े मेडिकल संगठन जैसे अमेरिकन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी' भी अब यही सलाह देते हैं कि बच्चे को 6 महीने की उम्र के आसपास से ही अंडा देना शुरू कर देना चाहिए.
हालांकि, रिसर्चर्स ने एक चिंताजनक बात भी नोट की है. ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले अमेरिका में पेरेंट्स अभी भी बच्चों को जल्दी अंडा देने में डरते हैं. साल 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में केवल 15.5% पेरेंट्स ही अपने बच्चों को 7 महीने की उम्र से पहले अंडा देते हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह संख्या 57% पहुंच चुकी है. भारत में भी जागरूकता की कमी के कारण बहुत से लोग बच्चों को साल भर का होने से पहले अंडा देने से बचते हैं.
आखिर क्या होती है अंडे की एलर्जी और यह कितनी खतरनाक है?
जब किसी बच्चे को अंडे से एलर्जी होती है, तो असल में उसका इम्यून सिस्टम अंडे की सफेदी (Egg White) या उसके पीले हिस्से (Egg Yolk) में मौजूद प्रोटीन को पहचान नहीं पाता. बच्चे का शरीर उस प्रोटीन को एक खतरनाक हमलावर या दुश्मन मान लेता है और उससे लड़ने के लिए जरूरत से ज्यादा रिएक्ट करने लगता है. इसी को हम एलर्जी रिएक्शन कहते हैं.
अंडे की एलर्जी के लक्षण-
- स्किन पर लाल चकत्ते या पित्ती होना
- पेट में दर्द
- उल्टी या दस्त होना
- सांस लेने में दिक्कत
- खांसी या गले में सूजन आना
पेरेंट्स के लिए गाइड-
बच्चे को अंडा खिलाना कब और कैसे शुरू करें?
शिकागो के लूरी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की डॉक्टर एलिजाबेथ लिपनर (जो इस स्टडी में शामिल नहीं थीं) का कहना है कि यह रिसर्च साबित करती है कि सही समय पर सही जानकारी देने से समाज में कितना बड़ा और अच्छा बदलाव आ सकता है. उन्होंने पेरेंट्स को सलाह दी है कि बच्चों को अंडा खिलाने की जल्दीबाजी में कुछ बुनियादी बातों को नजरअंदाज न करें.
- डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को अंडा देने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका बच्चा सोलिड फूड खाने के लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं.
- गर्दन पर कंट्रोल- बच्चा अपने सिर और गर्दन को खुद अच्छी तरह से संभाल पा रहा हो और बिना किसी परेशानी के सीधा रख सकता हो.
- सहारे के साथ बैठना- बच्चा किसी थोड़े से सपोर्ट के साथ या बिना सहारे के भी सीधा बैठना सीख गया हो.
- खाने में दिलचस्पी- जब आप खुद कुछ खा रहे हों या बच्चे के सामने चम्मच लाएं, तो वह उसे देखकर अपना मुंह खोले और खाने की तरफ हाथ बढ़ाए.
- चीजें मुंह तक ले जाना- बच्चा खिलौनों या अन्य चीजों को हाथ में पकड़कर सीधे अपने मुंह तक ले जाने की कोशिश करने लगा हो और खाना निगलने के संकेत दे रहा हो.
शुरुआती दिनों में इन 3 बातों का विशेष ध्यान रखें-
- शुरुआत बिल्कुल थोड़ी मात्रा से करें- पहली बार में बच्चे को पूरा अंडा खिलाने की गलती न करें. अच्छी तरह उबले हुए अंडे का एक बहुत छोटा सा टुकड़ा (मश करके) या प्यूरी के रूप में बच्चे को चखाएं.
- दिन के समय खिलाएं- बच्चे को कोई भी नई चीज हमेशा सुबह या दोपहर के समय खिलाएं, ताकि अगर उसे कोई एलर्जी या दिक्कत हो, तो आपके पास डॉक्टर के पास जाने का पूरा समय हो.
- नजर रखें- अंडा खिलाने के बाद अगले कुछ घंटों तक बच्चे के शरीर, उसकी सांस और उसकी हरकतों पर नजर रखें. अगर सब कुछ सामान्य रहता है, तो आप धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं.
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